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जनपद के 369 परिषदीय स्कूल खो रहे अपना अस्तित्व
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फिरोजाबाद। जनपद के कई परिषदीय स्कूल अपना अस्तित्व खो रहे हैं। यू-डायस डाटा बनने के बाद इन स्कूलों में छात्र संख्या न बराबर रह गई है। जबकि इन स्कूलों में शिक्षक तैनात हैं। 15 या 30 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की संख्या सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि सैकड़ों हैं। सरकार शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नई-नई भर्तियां कर रहीं हैं। 30 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों पर भारत सरकार ने गहरा असंतोष जताया है। बीएसए अरविंद पाठक ने भी खंड शिक्षाधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
जनपद में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1525 और जूनियर स्कूल 627 है। इनमें 13 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जो अस्तित्व ही खो रहे हैं। इनमें छात्र संख्या 15 से कम है। जूनियर स्कूलों की संख्या 20 है। यानी 33 परिषदीय स्कूल 15 से कम छात्र संख्या लेकर संचालित हो रहे हैं। जबकि 30 से कम छात्र संख्या वाले प्राइमरी स्कूल 173 और जूनियर स्कूल 163 हैं। कुल 339 स्कूलों ने छात्र संख्या मानक से कम हो रहे हैं। 170 स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक ही तैनात है। यानी जिन स्कूलों में मानक से कम छात्र संख्या हैं, उनमें शिक्षकों की भरपूर तैनाती कर दी है। इसके बाद भी प्राथमिक शिक्षा का स्तर नहीं उठ सकता है। भारत सरकार ने असंतोष जताते हुए बीएसए को पत्र लिखा है। बीएसए अरविंद पाठक ने एबीएसए को नोटिस जारी करके पुन: छात्र संख्या का मूल्यांकन करने को कहा है। अगर छात्र संख्या कम ही है तो इन स्कूलों को शासन स्तर से ही नजदीक स्कूलों में मर्ज किया जा सकता है।
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जनपद में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1525 और जूनियर स्कूल 627 है। इनमें 13 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जो अस्तित्व ही खो रहे हैं। इनमें छात्र संख्या 15 से कम है। जूनियर स्कूलों की संख्या 20 है। यानी 33 परिषदीय स्कूल 15 से कम छात्र संख्या लेकर संचालित हो रहे हैं। जबकि 30 से कम छात्र संख्या वाले प्राइमरी स्कूल 173 और जूनियर स्कूल 163 हैं। कुल 339 स्कूलों ने छात्र संख्या मानक से कम हो रहे हैं। 170 स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक ही तैनात है। यानी जिन स्कूलों में मानक से कम छात्र संख्या हैं, उनमें शिक्षकों की भरपूर तैनाती कर दी है। इसके बाद भी प्राथमिक शिक्षा का स्तर नहीं उठ सकता है। भारत सरकार ने असंतोष जताते हुए बीएसए को पत्र लिखा है। बीएसए अरविंद पाठक ने एबीएसए को नोटिस जारी करके पुन: छात्र संख्या का मूल्यांकन करने को कहा है। अगर छात्र संख्या कम ही है तो इन स्कूलों को शासन स्तर से ही नजदीक स्कूलों में मर्ज किया जा सकता है।
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