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चलती बस में दुष्कर्म: दिल्ली पुलिस की बड़ी लापरवाही, अभी तक नहीं किया यह काम; एक बार कट चुका 28 हजार का चालान

Tue, 01 Sep 2026 08:40 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: विकास कुमार Updated Tue, 01 Sep 2026 08:40 PM IST
सार

बस की चालान हिस्ट्री से यह पता चला है कि यह वाहन लगातार यातायात नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर फर्राटा भर रहा था। जुलाई 2026 के दौरान मथुरा (यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र) में अत्यधिक तेज गति से बस चलाने के कारण 4-4 हजार रुपये के कई चालान काटे गए, जो अभी भी लंबित हैं।

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Delhi Police negligence Bus used in misdeed case not verified by ARTO report suppressed
जिस बस में हुआ सामूहिक दुष्कर्म उसके कारनामे आए बाहर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सामूहिक दुष्कर्म में प्रयुक्त स्लीपर बस के सत्यापन के मामले में भी दिल्ली पुलिस की गंभीर शिथिलता उजागर हुई है। वारदात में इस्तेमाल हुई स्लीपर बस (UP 83 ET 3789) को लेकर नियमानुसार दिल्ली पुलिस को पंजीकरण प्राधिकरण (एआरटीओ फिरोजाबाद) से वाहन का आधिकारिक सत्यापन कराना चाहिए था। हालांकि, घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस द्वारा एआरटीओ कार्यालय को सत्यापन या विभागीय कार्रवाई के लिए कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।

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फिरोजाबाद के एआरटीओ का बड़ा खुलासा
मामले में संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें इस पूरे प्रकरण की जानकारी केवल समाचार पत्रों और मीडिया माध्यमों से ही प्राप्त हुई है। फिरोजाबाद के एआरटीओ (प्रशासन) गौरी शंकर ठाकुर ने बताया कि दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक इस बस के संबंध में कोई भी आधिकारिक पत्र, नोटिस या सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। नियमतः किसी भी आपराधिक वारदात में वाहन प्रयुक्त होने पर संबंधित पुलिस बल को पंजीकरण प्राधिकारी को त्वरित रिपोर्ट भेजनी होती है।

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क्यों की जा रही रिपोर्ट भेजने में देरी?
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 86 (1) के पैरा ख में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी परमिट धारक वाहन का उपयोग किसी अवैध गतिविधि, गंभीर अपराध या गैर-कानूनी कार्य में किया जाता है, तो परिवहन प्राधिकरण उसका परमिट निलंबित या पूरी तरह निरस्त कर सकता है। हालांकि, परमिट निरस्तीकरण या निलंबन का अंतिम निर्णय पुलिस द्वारा भेजी जाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट और अपराध की गंभीरता पर ही निर्भर करता है। दिल्ली पुलिस द्वारा रिपोर्ट भेजने में की जा रही देरी के कारण बस के परमिट पर कानूनी शिकंजा कसने में विभागीय अड़चन आ रही है।

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बस का पूरा काला चिट्ठा
दिल्ली बस सामूहिक दुष्कर्म मामले में दिल्ली पुलिस की जांच के दायरे में आई स्लीपर/टूरिस्ट बस का पूरा काला चिट्ठा परिवहन विभाग के रिकॉर्ड (वाहन पोर्टल) से उजागर हो गया है। वाहन पंजीयन अभिलेखों के अनुसार, बस (रजिस्ट्रेशन नंबर UP 83 ET 3789) अनिल जादौन ने 27 अक्तूबर 2025 को खरीदी थी, जबकि फिरोजाबाद एआरटीओ कार्यालय में इसका औपचारिक पंजीकरण 28 अप्रैल 2026 को कराया गया था। वाहन की फिटनेस 17 अप्रैल 2028 तक वैध है।

लगातार अनदेखी कर चलाई जा रही थी बस
बस की चालान हिस्ट्री से यह पता चला है कि यह वाहन लगातार यातायात नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर फर्राटा भर रहा था। जुलाई 2026 के दौरान मथुरा (यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र) में अत्यधिक तेज गति से बस चलाने के कारण 4-4 हजार रुपये के कई चालान काटे गए, जो अभी भी लंबित हैं।

बांदा में कटा था 28 हजार का चालान
बांदा आरटीओ क्षेत्र में बिना वैध परमिट वाहन चलाने, सीट बेल्ट न लगाने और स्पीड गवर्नर/रिफ्लेक्टिव टेप नियमों के उल्लंघन पर बस पर 28 हजार रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया गया था। आगरा और नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) क्षेत्र में भी ओवरस्पीडिंग और लाइन डिसिप्लिन तोड़ने पर इस बस के चालान कटे हैं। लगातार हो रहे गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों के बावजूद बस का बेधड़क सड़कों पर संचालन होना परिवहन विभाग की मॉनिटरिंग पर भी सवाल खड़े करता है।

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