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UP: 1700 रुपये के लिए गर्भवती भाभी को दी दर्दनाक मौत, 30 वर्ष बाद मिला इंसाफ; देवर का जेल में कटेगा पूरा जीवन
Wed, 28 Feb 2024 07:14 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 28 Feb 2024 07:14 PM IST
सार
फिरोजाबाद में 1700 रुपये के लिए गर्भवती भाभी को दर्दनाक हत्या कर दी। मामले में 30 वर्ष बाद फैसला आया। कोर्ट ने दोषी देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक)
- फोटो : istock
विस्तार
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में बुधवार को गर्भवती महिला की हत्या के बाद लूट के मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई अपर जिला जज ग्यारह एवं विशेष जज दस्यु प्रभावित क्षेत्र रवींद्र कुमार की कोर्ट ने की। मामला 30 वर्ष पुराना था। सुनवाई के बाद दोषी देवर को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एक लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड में से 50-50 हजार की धनराशि मृतका की बेटियों को देने के आदेश दिए हैं।
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मामला दक्षिण थाना क्षेत्र का छह अगस्त 1994 का है। थाना क्षेत्र के मोहल्ला करबला गली नंबर सात निवासी मिथलेश पुत्री रामसनेही राठौर अपने चाचा चंद्रप्रकाश के घर सोने गई थीं। घर पर उसकी मां सूरजमुखी बहन सर्वेश उम्र दो वर्ष के साथ अकेली सो रही थी।
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चारपाई पर पड़ी मिली लाश
उसके पिताजी रुड़की चूड़ी के व्यापार के संबंध में 15 दिन पहले से गए थे। सात अगस्त की सुबह घर पहुंची तो देखा कि उसकी मां चारपाई पर मृत अवस्था में पड़ी थी। एक कमरे का कुंडा टूटा हुआ है, कनस्तर की दाल फैली थी। एक कनस्तर जिसमें चावल में 1700 रुपये रखे हुए गायब थे। मिथलेश की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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भाई ने दर्ज कराया मुकदमा
जांच के दौरान मृतका के भाई बलवीर सिंह राठौर द्वारा पुलिस को प्रार्थनापत्र देकर मृतका के देवर चंद्रप्रकाश व उसके साथियों के खिलाफ हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। पुलिस ने जांच के बाद मृतका के देवर चंद्रप्रकाश निवासी करबला व मोहर सिंह उर्फ मुन्ना राठौर निवासी सुदामा नगर थाना उत्तर के विरुद्ध हत्या व लूट की धारा में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया दोषी
मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या ग्यारह, विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रविंद्र कुमार की अदालत में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र राठौर व ललित बघेल ने की। उन्होंने कहा इसमें सात गवाहों ने गवाही दी। गवाही एवं साक्ष्य के आधार पर चंद्रप्रकाश को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही दोषी पर एक लाख बीस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को एक वर्ष के कारावास की अतिरिक्त सजा भोगनी होगी। दोनों बेटियों को 50-50 हजार की धनराशि मिथलेश व सर्वेश देवी को दिए जाने के आदेश दिए हैं। साक्ष्य के अभाव में मोहर सिंह उर्फ मुन्ना राठौर को दोषमुक्त किया है।