{"_id":"61268c418ebc3e79bb06d1fb","slug":"corona-became-free-yet-the-fear-did-not-decrease-the-number-of-students-in-schools-did-not-increase-even-on-the-second-day-firozabad-news-agr5050782196","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना मुक्त हुआ फिर भी कम नहीं हुआ खौफ, स्कूलों में छात्र संख्या दूसरे दिन भी नहीं बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना मुक्त हुआ फिर भी कम नहीं हुआ खौफ, स्कूलों में छात्र संख्या दूसरे दिन भी नहीं बढ़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। जनपद वर्तमान में पूरी तरह कोरोना मुक्त हो गया है, मगर अभिभावकों में कोरोना को लेकर खौफ कम नहीं हुआ है। दूसरे दिन भी स्कूलों में छात्र संख्या में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ। कक्षा छह से आठवीं तक के 20 से 25 फीसदी ही विद्यार्थी स्कूलों में पहुंचे। इस कारण निजी स्कूलों को ऑनलाइन क्लास का जारी रखना मजबूरी बन रहा है। अभिभावक कुछ दिन और इंतजार कर माहौल आंकना चाह रहे हैं।
जनपद में करीब 627 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। दो पालियों में स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। कोविड गाइडलाइन का पालन कराने के लिए पचास फीसदी ही बच्चे बुलाने के आदेश हैं। मगर दूसरे दिन भी स्कूलों में छात्र संख्या कम रही। अभिभावकों को अक्तूबर और नवंबर में संभावित तीसरी लहर का डर है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या कहीं आठ तो कहीं 10 दिखी। दूसरा गांव-गांव फैले वायरल का असर भी स्कूलों में पड़ रहा है। क्योंकि शहर से लेकर देहात क्षेत्रों तक घर-घर में बीमार पड़े हुए हैं। इधर, निजी स्कूूलों की बात करें तो छात्र संख्या कम बुलाने के आदेश पर अभी वाहन संचालित नहीं कराए हैं। इधर, निजी स्कूलों में अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई से संतुष्ट हैं।
स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम हैं। स्कूल आने के लिए छात्रों पर दबाव भी नहीं बनाया जा सकता है। इसमें अभिभावकों की सहमति भी आवश्यक है। फिर भी हम जागरूक कराकर छात्र संख्या को कोविड गाइडलाइन के अनुसार बढ़ाने पर जोर देंगे।
विज्ञापन
अंजली अग्रवाल, बीएसए
विज्ञापन
जनपद में करीब 627 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। दो पालियों में स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। कोविड गाइडलाइन का पालन कराने के लिए पचास फीसदी ही बच्चे बुलाने के आदेश हैं। मगर दूसरे दिन भी स्कूलों में छात्र संख्या कम रही। अभिभावकों को अक्तूबर और नवंबर में संभावित तीसरी लहर का डर है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या कहीं आठ तो कहीं 10 दिखी। दूसरा गांव-गांव फैले वायरल का असर भी स्कूलों में पड़ रहा है। क्योंकि शहर से लेकर देहात क्षेत्रों तक घर-घर में बीमार पड़े हुए हैं। इधर, निजी स्कूूलों की बात करें तो छात्र संख्या कम बुलाने के आदेश पर अभी वाहन संचालित नहीं कराए हैं। इधर, निजी स्कूलों में अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई से संतुष्ट हैं।
विज्ञापन
स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम हैं। स्कूल आने के लिए छात्रों पर दबाव भी नहीं बनाया जा सकता है। इसमें अभिभावकों की सहमति भी आवश्यक है। फिर भी हम जागरूक कराकर छात्र संख्या को कोविड गाइडलाइन के अनुसार बढ़ाने पर जोर देंगे।
विज्ञापन
अंजली अग्रवाल, बीएसए