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तेरा अहसास दिल को हर घड़ी खुश रंग लगता है...
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 28 Feb 2016 08:10 PM IST
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मशहूर साहित्यकार सालिम शुजा अंसारी के पांचवें गजल संग्रह आवाजें खामोशी की का विमोचन बेसिक शिक्षाधिकारी बालमुकुंद प्रसाद ने किया गया। इस मौके पर काव्य संध्या का आयोजन किया गया। गजलों को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध रह गए। अध्यक्षता वरिष्ठ शायर सूफी जमील अफगानी ने की।
समारोह में न्यायाधीश एसएस यादव न कहा कि सालिम शुजा अंसारी फीरोजाबाद को एक अलग पहचान देंगे। इतनी कम उम्र में पांच गजल संग्रह कहना कोई आम बात नहीं है। शायर संजय मिश्रा ने कहा कि यहां सबेरे भी खुश है, तमाशा बीन भी खुश, अजीब सायं है जिन से है आस्तीन भी खुश। कलीम नूरी ने कहा कि बरसों से भटकती है मीरा कोई दीवानी, इस कंस की नगरी में घनश्याम नहीं मिलता। मयंक अवस्थी ने कहा कि तेरा अहसास दिल को हर घड़ी खुश रंग लगता है, किसी सोने के जेवर पै कभी क्या जंग लगता है। डा. दौतराम ने कहा कि मेरा महबूब जब भी मुस्करादे। डा. मुजीब शहजर ने कहा कि मेरा मिजाज पूछने जो लोग आए थे, हाथों में आग जेब में बारूद लाए थे। सुनील साहिल, असलम, उमर पैकर, जावेद नियाज, सलीम नायाब, हाजी जावेद ने भी गजलें सुनाईं। कार्यक्रम में उबैस जमाल, इरफान साहिल, सिराजुउद्दीन, मिर्जा सलीम बेग, एबी चौबे, कासिम अलहद, मंजर नवाब आदि लोग उपस्थित रहे।
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समारोह में न्यायाधीश एसएस यादव न कहा कि सालिम शुजा अंसारी फीरोजाबाद को एक अलग पहचान देंगे। इतनी कम उम्र में पांच गजल संग्रह कहना कोई आम बात नहीं है। शायर संजय मिश्रा ने कहा कि यहां सबेरे भी खुश है, तमाशा बीन भी खुश, अजीब सायं है जिन से है आस्तीन भी खुश। कलीम नूरी ने कहा कि बरसों से भटकती है मीरा कोई दीवानी, इस कंस की नगरी में घनश्याम नहीं मिलता। मयंक अवस्थी ने कहा कि तेरा अहसास दिल को हर घड़ी खुश रंग लगता है, किसी सोने के जेवर पै कभी क्या जंग लगता है। डा. दौतराम ने कहा कि मेरा महबूब जब भी मुस्करादे। डा. मुजीब शहजर ने कहा कि मेरा मिजाज पूछने जो लोग आए थे, हाथों में आग जेब में बारूद लाए थे। सुनील साहिल, असलम, उमर पैकर, जावेद नियाज, सलीम नायाब, हाजी जावेद ने भी गजलें सुनाईं। कार्यक्रम में उबैस जमाल, इरफान साहिल, सिराजुउद्दीन, मिर्जा सलीम बेग, एबी चौबे, कासिम अलहद, मंजर नवाब आदि लोग उपस्थित रहे।
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