{"_id":"61af931dc5488861ae7ad888","slug":"claims-of-rejuvenation-in-council-schools-no-luck-boundary-wall-firozabad-news-agr517142043","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प के दावे, नसीब नहीं चारदिवारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प के दावे, नसीब नहीं चारदिवारी
विज्ञापन
फिरोजाबाद ! मोहल्ला शीशग्रान स्थित प्राथमिक विद्यालय में टीन सेड में बैठे छात्र-छात्राएं
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के कई स्कूल ऐसे हैं जहां सर्दी के दिनों में बच्चों को कक्षा की चार दीवारी भी नसीब नहीं हैं। बच्चे सर्द हवा में ठिठुरन के बीच बरामदे में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। वहीं ज्यादातर बच्चों को इस बार स्वेटर, जूते, मोजे भी नहीं मिल पाए। इससे बच्चे सर्दी से जूझ रहे हैं।
प्राथमिक विद्यालय हिमांयूपुर में तीन ही कक्ष हैं। कक्षा एक और दो के विद्यार्थी बरामदे में ही बैठते हैं। चल रही ठंडी हवाओं के बीच बच्चे ठिठुरते नजर आए। 95 फीसदी विद्यार्थियों के पास जूते, मौजे भी नहीं थे। बच्चें ठंड में टाट, पट्टियों पर बैठे थे। ऐसे में हर तरफ से ठंड का सामना करना पड़ रहा था। प्रधानाचार्य कमलेश ने बताया कि तीन कमरे हैं और कक्षा पांच तक विद्यालय संचालित हैं। ऐसे में दो कक्षाओं के बच्चों को बरामदे में बैठाना हमारी मजबूरी है।
प्राइमरी स्कूल शीशग्रान में विद्यालय के नाम पर सिर्फ टीनशेड पड़ा हुआ है। कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थी एक ही टीनशेड के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। गर्मी में लू के थपेड़े झेलने पड़ते हैं। सर्दियां शुरू हो गई हैं तो सर्द हवाएं भी बच्चों को ठिठुरने पर मजबूर करती हैं। पूरी सर्दी ठंडी हवाओं के बीच बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।
विज्ञापन
प्राइमरी स्कूल दबरई में छात्र संख्या अधिक है। ऐसे में विद्यार्थी बरामदे में बैठते हैं। सर्दी के दिनों में बच्चों को ठंडक का एहसास अधिक होता है। परिसर में अन्य कमरे में हैं, लेकिन उन कमरों का इस्तेमाल पुस्तक रखने और अन्य कामकाजों में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है। कई बच्चे तो ठंड के कारण बीमार भी हो रहे हैं।
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालय हिमांयूपुर में तीन ही कक्ष हैं। कक्षा एक और दो के विद्यार्थी बरामदे में ही बैठते हैं। चल रही ठंडी हवाओं के बीच बच्चे ठिठुरते नजर आए। 95 फीसदी विद्यार्थियों के पास जूते, मौजे भी नहीं थे। बच्चें ठंड में टाट, पट्टियों पर बैठे थे। ऐसे में हर तरफ से ठंड का सामना करना पड़ रहा था। प्रधानाचार्य कमलेश ने बताया कि तीन कमरे हैं और कक्षा पांच तक विद्यालय संचालित हैं। ऐसे में दो कक्षाओं के बच्चों को बरामदे में बैठाना हमारी मजबूरी है।
विज्ञापन
प्राइमरी स्कूल शीशग्रान में विद्यालय के नाम पर सिर्फ टीनशेड पड़ा हुआ है। कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थी एक ही टीनशेड के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। गर्मी में लू के थपेड़े झेलने पड़ते हैं। सर्दियां शुरू हो गई हैं तो सर्द हवाएं भी बच्चों को ठिठुरने पर मजबूर करती हैं। पूरी सर्दी ठंडी हवाओं के बीच बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।
विज्ञापन
प्राइमरी स्कूल दबरई में छात्र संख्या अधिक है। ऐसे में विद्यार्थी बरामदे में बैठते हैं। सर्दी के दिनों में बच्चों को ठंडक का एहसास अधिक होता है। परिसर में अन्य कमरे में हैं, लेकिन उन कमरों का इस्तेमाल पुस्तक रखने और अन्य कामकाजों में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है। कई बच्चे तो ठंड के कारण बीमार भी हो रहे हैं।