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Firozabad News: मौसम बदलने से बच्चे आ रहे निमोनिया की चपेट में

Mon, 11 Nov 2024 11:34 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Mon, 11 Nov 2024 11:34 PM IST
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Children are becoming vulnerable to pneumonia due to changing weather
फिरोजाबाद। बदलते मौसम में सबसे ज्यादा बच्चे बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इन दिनों बच्चे सबसे ज्यादा निमोनिया से पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 40 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। कई बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। इससे कई ज्यादा मरीज प्राइवेट अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, जिले में हर साल करीब 10 हजार बच्चे निमोनिया से पीड़ित होते हैं। दिन और रात के तापमान में गिरावट होने और ठंडी हवाएं चलने से लोगों को जुकाम, बुखार की समस्या बनी हुई है। इस मौसम में बच्चे भी बीमारियों की चपेट में अधिक आ रहे हैं। सर्दी की वजह से बच्चे निमोनिया के साथ-साथ खांसी, बुखार, कफ जमना, दस्त आदि की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों को लेकर परिजन प्रतिदिन सरकारी चिकित्सालय और निजी अस्पतालों में उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की बालरोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 बच्चों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।
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इनमें निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या करीब 40 तक पहुंच रही है। चिकित्सक बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं। बच्चों को सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े पहनाने के साथ, ठंडी चीजों का सेवन न करने की सलाह दे रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में निमोनिया के 30 फीसदी तक मामले बढ़े है। बच्चों में निमोनिया का खतरा टीकाकरण से कम किया जा सकता है। साथ ही छोटे बच्चों में मां का दूध पिलाते रहने से कई बीमारियों से बचाया जा सकता है। ओपीडी में आने वाले बच्चों का लक्षण के आधार पर परामर्श और बीमारी से बचाव के उपाय बता दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल जनपद में 10 हजार बच्चे निमोनिया का शिकार होते हैं।
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निमोनिया रोकने में वैक्सीन कारगर, फिर भी बचाव जरूरी

बच्चों के जन्म के बाद लगने वाली पेंटावैलेंट वैक्सीन में निमोनिया की वैक्सीन शामिल होती है। या अलग से हिब वैक्सीन लगवाई जा सकती है। जिन बच्चों को वैक्सीन लगती है उन्हें वायरल इंफेक्शन से होने वाली निमोनिया होने की संभावना 99 फीसदी कम हो जाती है। हालांकि अन्य कारकों से होने वाली निमोनिया फिर भी हो सकती है। रेस्पेरेटरी सिंसियल वायरस (आरएसवी) से होने वाली निमोनिया का दुनिया में कहीं इलाज नहीं है। इसमें कुछ ही घंटों में मौत की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए वैक्सीन लगने के बाद भी सावधानी जरूरी है।
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थोड़ी सी चूक बच्चों के लिए पड़ सकती है भारी

डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि ठंड के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए भारी पड़ सकती है। सर्दियों में बच्चों को छह लेयर कपड़े पहनाना चाहिए। उनके हाथ, पैर और सिर पूरी तरह से ढके होने चाहिए। बच्चों के लिए ठंड से ज्यादा हवा नुकसानदायक है। इसलिए बच्चों को बंद कमरे में बिना पंखा चलाए सुलाना चाहिए।




-ये बरतें सावधानियां

-बच्चों को ठंड से बचाएं।

-बच्चों को ठंडे पानी से न नहलाएं, उन्हें हवा के संपर्क से भी बचाएं।

. जन्म के बाद ही बच्चों का टीकाकरण जरूर करवाएं।
. सर्दी-जुकाम होने पर डॉक्टर को तत्काल दिखाएं और परामर्श लें।
. ठंड के मौसम में बच्चों को बंद कमरे में रखें और सुलाएं।
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