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शौचालय निर्माण में घपले की आशंका, शुरू हुई जांच
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पहाड़पुर में अधूरा पड़ा शौचालय।
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन के तहत बन रहे शौचालयों में बडे़ घपले की आशंका है। शौचालय से वंचित परिवारों को दी गई धनराशि में पंचायत सचिव और प्रधानों की मिलीभगत से घपले की आशंका है। चिन्हित किए गए 4200 परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में छह-छह हजार रुपये दिए जा चुके हैं। कहीं शौचालय का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो कहीं मानक के अनुसार निर्माण नहीं हो रहा है। छह-छह हजार रुपये की दूसरी किस्त लाभार्थियों को दी जानी है। डीएम ने पहली किस्त से शौचालय निर्माण कार्य की स्थिति की जांच करने के बाद ही दूसरी किस्त देने के आदेश दिए हैं। डीएम ने जांच के लिए जिला और पंचायत राज विभाग में तैनात जिला समन्वयकों, स्वेच्छाग्रहियों को तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
दो अक्तूबर वर्ष 2018 में ओडीएफ घोषित होने के बाद जिले में एक विशेष सर्वे कराया था। सर्वे के दौरान जिले में 28500 परिवार ऐसे मिले जहां शौचालय नहीं थे। इन परिवारों में एलओवी योजना के तहत शौचालय निर्माण कराया था। इसके बाद एक और सर्वे किया इसमें 4200 परिवारों को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत नि:शुल्क शौचालय निर्माण के लिए चिङ्क्षहत किया गया। मई-जून 2019 में हुए एलओवी फेस-प्रथम सर्वे के बाद इन परिवारों में शौचालय निर्माण के लिए साढे चार करोड रुपये की धनराशि शासन स्तर से जारी की गई। इसमें एक लाभार्थी को 12 हजार रुपये दिए जाने हैं। प्रथम किस्त के रुप में सभी 42 सौ परिवारों को छह-छह हजार रुपये की धनराशि जारी दी जा चुकी है। दूसरी किस्त जारी की जानी है।
पहली किस्त मिलने के बाद भी कई परिवारों ने शौचालय बनाने तक शुरू नहीं किए हैं, कहीं शौचालाय मानक के अनुसार नहीं बनाए जा रहे हैं। इस पूरे खेल में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिलीभगत की शिकायतें डीएम तक पहुंची हैं। 4200 परिवारों के लिए पहली किस्त की धनराशि के हिसाब से करीब ढाई करोड़ रुपये सरकारी खजाने से जा चुके हैं। डीएम चंद्र विजय सिंह ने शौचालयों को लेकर मिल रही शिकायतों के आधार पर दूसरी किस्त जारी करने से पहले जांच शुरू करा दी है। शौचालय निर्माण की जांच के लिए डीएम ने जिला स्तरीय अधिकारियों के अतिरिक्त पंचायत राज विभाग में तैनात जिला समन्वयकों एवं स्वेच्छाग्रहियों को निर्देश दिए हैं। सभी से तीन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को निर्देशित किया गया है।
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दो अक्तूबर वर्ष 2018 में ओडीएफ घोषित होने के बाद जिले में एक विशेष सर्वे कराया था। सर्वे के दौरान जिले में 28500 परिवार ऐसे मिले जहां शौचालय नहीं थे। इन परिवारों में एलओवी योजना के तहत शौचालय निर्माण कराया था। इसके बाद एक और सर्वे किया इसमें 4200 परिवारों को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत नि:शुल्क शौचालय निर्माण के लिए चिङ्क्षहत किया गया। मई-जून 2019 में हुए एलओवी फेस-प्रथम सर्वे के बाद इन परिवारों में शौचालय निर्माण के लिए साढे चार करोड रुपये की धनराशि शासन स्तर से जारी की गई। इसमें एक लाभार्थी को 12 हजार रुपये दिए जाने हैं। प्रथम किस्त के रुप में सभी 42 सौ परिवारों को छह-छह हजार रुपये की धनराशि जारी दी जा चुकी है। दूसरी किस्त जारी की जानी है।
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पहली किस्त मिलने के बाद भी कई परिवारों ने शौचालय बनाने तक शुरू नहीं किए हैं, कहीं शौचालाय मानक के अनुसार नहीं बनाए जा रहे हैं। इस पूरे खेल में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिलीभगत की शिकायतें डीएम तक पहुंची हैं। 4200 परिवारों के लिए पहली किस्त की धनराशि के हिसाब से करीब ढाई करोड़ रुपये सरकारी खजाने से जा चुके हैं। डीएम चंद्र विजय सिंह ने शौचालयों को लेकर मिल रही शिकायतों के आधार पर दूसरी किस्त जारी करने से पहले जांच शुरू करा दी है। शौचालय निर्माण की जांच के लिए डीएम ने जिला स्तरीय अधिकारियों के अतिरिक्त पंचायत राज विभाग में तैनात जिला समन्वयकों एवं स्वेच्छाग्रहियों को निर्देश दिए हैं। सभी से तीन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को निर्देशित किया गया है।
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