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बाढ़ से पचास करोड़ का चूड़ी कारोबार प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो, फीरोजाबाद
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:06 PM IST
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चूड़ी कारोबार प्रभावित
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिहार, असम और बंगाल में बाढ़ से गंभीर हालात हैं। इसका असर सुहाग नगरी के चूड़ी कारोबार पर भी पड़ रहा है। बिहार चूड़ी की सबसे बड़ी मंडी है। इन तीनों राज्यों में एक सीजन में लगभग पचास लाख का चूड़ी का कारोबार होता है। सावन के सीजन के साथ-साथ बिहार में दशहरा और छठ पर कांच की चूड़ियों की बंपर सेल होती है। इसके लिए वहां के व्यापारी आर्डर लेकर अभी से सुहाग नगरी में दस्तक देने लगते हैं लेकिन बाढ़ ने व्यापारियों के कदम जहां के तहां रोक दिए हैं। सावन के सीजन में माल भी ट्रांसपोर्ट पर पड़ा हुआ है। अभी जिन इलाकों में बाढ़ नहीं है उन रूटों पर गाड़ियां जा रही हैं लेकिन इन रूटों पर भी पूरी जानकारी करने के बाद ही माल भेजा जा रहा है।
फीरोजाबाद में सबसे अधिक चूड़ी बिहार जाती है। सावन के साथ-साथ बिहार में दशहरा और छठ का सीजन भी काफी चलता है। इन पर्वों चूड़ी की यहां बंपर सेल होती है। चूड़ी व्यापारी नीरज जैन बताते हैं कि दशहरा और छठ के लिए बिहार से अभी से व्यापारी आर्डर लेकर आने लगते थे। लेकिन बाढ़ के कारण व्यापारी यहां नहीं आ रहे। सावन के लिए दिए आर्डरों को भी बाढ़ प्रभावित इलाकों के व्यापारियों ने कैंसल करा दिया है। बाढ़ के कारण बिहार में जब कारोबार चौपट है तब यहां से माल भेजने पर भी ब्रेक लग गया है। माल पैक किया हुआ रखा है लेकिन भेज नहीं पा रहे।
चूड़ी व्यापारी नितेश अग्रवाल का कहना है कि बाढ़ ने पूरा सीजन चौपट कर दिया है। रास्ते में कई गाड़ियां फंसी हुई हैं। दूसरे रास्तों से गाड़ियां जा रही हैं इस लिए जिन इलाकों में बाढ़ नहीं है वहां भी माल देर से पहुंच रहा है। पटना चूड़ी की सबसे बड़ी मंडी है। बिहार रोड़ लाइंस के संचालक अजय अग्रवाल का कहना है कि बिहार के रूट से ही गाड़ियां बंगाल और असम के लिए जाती हैं। बाढ़ के कारण कारोबार प्रभावित तो है लेकिन जिन इलाकों में बाढ़ नहीं है वहां माल भेजा जा रहा है। कुछ गाड़ियां बाढ़ प्रभावित कोटी क्षेत्र में फंसी हुई हैं। उन्होंने बताया कि फीरोजाबाद से औसत 70 से 80 गाड़ियां प्रति दिन बिहार और बंगाल से रूट पर जाती हैं। बाढ़ के कारण कम गाड़ियां निकल रही हैं।
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इन क्षेत्रों में है बाढ़ का प्रभाव
बिहार के सुपौल, किशनगंज, पूर्णिया, चंपारण, मुजफ्फरपुर में बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव है। इनमें किशनगंज और मुजफ्फरपुर में शहर से काफी संख्या में चूड़ियां जाती हैं।
तगादा फंसा, आर्डर नहीं मिले
रक्षाबंधन पर बिहार और बंगाल से चूड़ी व्यापारियों को जहां पुराना बकाया मिल जाता है वहीं इसके साथ-साथ नए आर्डर मिल जाते हैं। बंगाल में नवदुर्गा और काली पर्व के लिए बंपर आर्डर सावन के महीने में ही मिल जाते हैं और रक्षाबंधन के सहारे पुराना भुगतान मिल जाता है। लेकिन बाढ़ के कारण चूड़ी व्यापारियों का लाखों रुपया फंस गया है।
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फीरोजाबाद में सबसे अधिक चूड़ी बिहार जाती है। सावन के साथ-साथ बिहार में दशहरा और छठ का सीजन भी काफी चलता है। इन पर्वों चूड़ी की यहां बंपर सेल होती है। चूड़ी व्यापारी नीरज जैन बताते हैं कि दशहरा और छठ के लिए बिहार से अभी से व्यापारी आर्डर लेकर आने लगते थे। लेकिन बाढ़ के कारण व्यापारी यहां नहीं आ रहे। सावन के लिए दिए आर्डरों को भी बाढ़ प्रभावित इलाकों के व्यापारियों ने कैंसल करा दिया है। बाढ़ के कारण बिहार में जब कारोबार चौपट है तब यहां से माल भेजने पर भी ब्रेक लग गया है। माल पैक किया हुआ रखा है लेकिन भेज नहीं पा रहे।
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चूड़ी व्यापारी नितेश अग्रवाल का कहना है कि बाढ़ ने पूरा सीजन चौपट कर दिया है। रास्ते में कई गाड़ियां फंसी हुई हैं। दूसरे रास्तों से गाड़ियां जा रही हैं इस लिए जिन इलाकों में बाढ़ नहीं है वहां भी माल देर से पहुंच रहा है। पटना चूड़ी की सबसे बड़ी मंडी है। बिहार रोड़ लाइंस के संचालक अजय अग्रवाल का कहना है कि बिहार के रूट से ही गाड़ियां बंगाल और असम के लिए जाती हैं। बाढ़ के कारण कारोबार प्रभावित तो है लेकिन जिन इलाकों में बाढ़ नहीं है वहां माल भेजा जा रहा है। कुछ गाड़ियां बाढ़ प्रभावित कोटी क्षेत्र में फंसी हुई हैं। उन्होंने बताया कि फीरोजाबाद से औसत 70 से 80 गाड़ियां प्रति दिन बिहार और बंगाल से रूट पर जाती हैं। बाढ़ के कारण कम गाड़ियां निकल रही हैं।
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इन क्षेत्रों में है बाढ़ का प्रभाव
बिहार के सुपौल, किशनगंज, पूर्णिया, चंपारण, मुजफ्फरपुर में बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव है। इनमें किशनगंज और मुजफ्फरपुर में शहर से काफी संख्या में चूड़ियां जाती हैं।
तगादा फंसा, आर्डर नहीं मिले
रक्षाबंधन पर बिहार और बंगाल से चूड़ी व्यापारियों को जहां पुराना बकाया मिल जाता है वहीं इसके साथ-साथ नए आर्डर मिल जाते हैं। बंगाल में नवदुर्गा और काली पर्व के लिए बंपर आर्डर सावन के महीने में ही मिल जाते हैं और रक्षाबंधन के सहारे पुराना भुगतान मिल जाता है। लेकिन बाढ़ के कारण चूड़ी व्यापारियों का लाखों रुपया फंस गया है।