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Firozabad News: डकैती व तोड़फोड़ के मामले में श्रमिक नेता रामदास मानव समेत सभी 6 आरोपी बरी

Thu, 22 Oct 2026 12:18 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Thu, 22 Oct 2026 12:18 AM IST
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All 6 accused, including labor leader Ramdas Manav, acquitted in robbery and vandalism case
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद। विशेष न्यायाधीश (डकैती)/एडीजे पॉक्सो-3 के पीठासीन अधिकारी निर्दोष कुमार की अदालत ने बहुचर्चित डकैती और तोड़फोड़ के एक मामले में श्रमिक नेता रामदास मानव समेत सभी छह अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
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मामला थाना रामगढ़ क्षेत्र से जुड़ा है। चूड़ी व्यापारी शहनशाह बाबर निवासी झमैया टोला (रसूलपुर) ने 17 मई 2019 को तहरीर दी थी कि 8 मई 2019 को उनकी डीसीएम गाड़ी में करीब 2.5 लाख रुपये का चूड़ी का माल भरकर कारीगरों के पास भेजा जा रहा था। आरोप था कि सैलई से सांती रोड पर नगला पीपरिया के पास श्रमिक नेता रामदास मानव, राकेश कुमार, मुलायम सिंह, हाकिम सिंह निवोरिया जाटव, बृजेन्द्र सिंह कोरी, उदयपाल कोरी और 10-12 अज्ञात लोगों ने गाड़ी को घेरकर तोड़फोड़ की और माल लूट लिया। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
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ट्रायल के दौरान मामला बदल गया। खुद शहनशाह बाबर और चश्मदीद गवाह/मुनीम राकेश ने अदालत में बयान दिया कि घटना उनके सामने नहीं हुई थी और वे अभियुक्तों को नहीं जानते-पहचानते हैं। वादी ने स्वीकार किया कि उसने अभियुक्तों को पहली बार अदालत में ही देखा है और उनके द्वारा न तो कोई लूटपाट की गई और न ही कोई तोड़फोड़ की गई। वादी ने यह भी बताया कि उसने तहरीर खुद नहीं लिखी थी, बल्कि पुलिस या अन्य लोगों के कहने पर नाम लिखाए गए थे। इसी प्रकार चश्मदीद गवाह राकेश ने भी भीड़ में आरोपियों द्वारा लूट या तोड़फोड़ किए जाने से साफ इन्कार कर दिया। गवाहों के समर्थन न मिलने और साक्ष्यों के अभाव के चलते अदालत ने रामदास मानव, राकेश कुमार, मुलायम सिंह, हाकिम सिंह निवोरिया जाटव, बृजेन्द्र सिंह कोरी और उदयपाल कोरी को बरी कर दिया।
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झूठे मुकदमे में इंसाफ की मांग करते हुए मौत के आगोश में समा गए थे रामप्रकाश

श्रमिक नेता रामदास मानव की इस प्रकरण में गिरफ्तारी के विरोध में उनके भाई रामप्रकाश (55) ने अन्न त्याग दिया था। वह लगातार अपने भाई के लिए इंसाफ की मांग कर रहे थे। लगातार 21 दिन तक अन्न-पानी न ग्रहण करने के चलते उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन ने उनको मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया था। वहां उपचार के दौरान उनकी 7 जून 2019 को मृत्यु हो गई थी। दूसरा बड़ा प्रकरण यह हुआ था कि इस मुकदमे के पीछे शहर विधायक मनीष असीजा का हाथ होने का आरोप लगाते हुए श्रमिक महिलाओं ने उनके आवास को घेर लिया था। पुलिस-प्रशासन को उस वक्त कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। शहर के चूड़ी कारखानों में भी हड़ताल हो गई थी। शहरभर में पुतले भी दहन हुए थे।
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