किसानों की मौत पर प्रश्ाासन का मजाक

ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Tue, 07 Apr 2015 11:27 PM IST
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adminstration fun On the death of the farmers

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कभी ओले गिरे तो कभी बरसात। मौसम की मार से जिले में हजारों बीघा आलू और गेहूं की फसल बरबाद हो गई। प्राकृतिक आपदा से घिरा किसान सदमे में आ गया। आत्महत्या करने लगा। सदमे में कई किसानों की मौत हो गई। किसानों के हक की हुंकार भरने वाले वाले दलों से लेकर संगठनों तक खामोश हैं। जिस तरह सर्वे होना चाहिए था वह हुआ नहीं और जहां सर्वे हुआ वहां मुआवजे के नाम पर मजाक किया गया है। नुकसान हजारों लाखों में और मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा है।
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अब तक जिले में 17 किसानों की मौत हो चुकी है लेकिन प्रशासन की रिपोर्ट में इन मौतों का वास्ता फसलों के नुकसान से नहीं है।  इस बीच लाख टके का सवाल यह है कि किसानों को इतनी बड़ी संख्या में पहले कभी आत्महत्या या सदमे से मरते नहीं देखा फिर प्रशासन किस चश्मे से इस त्रासदी को देख रहा है। जिसकी आंखों के सामने पकी फसल उजड़ जाए उस किसान के लिए  यह सदमा नहीं तो और क्या है। पकी फसल देख जिस किसान ने बेटी के हाथ पीले करने से लेकर साहूकार का कर्ज चुकाने की उम्मीद लगा रखी हो उस किसान का फसलों पर ओले और बरसात की मार देख हार्टफेल नहीं होगा तो क्या...। फिर इन मौतों का कारण प्रशासन किस परिभाषा में तलाश रहा है। इससे पहले कब किस किसान ने पारिवारिक कलह में जान दी या किस किसान की मौत हुई है...? जवाब न प्रशासन के पास है और न ही किसानों के हितैषी बनने वाले नेताओं के पास। त्रासदी यह भी है कि किसानों का दर्द जानने अभी तक कोई जनप्रतिनिधि गांवों में नहीं गया है।
जनपद में बरबादी के ओले 15 मार्च से पड़ना शुरू हुए। पहली मौत नैपई के किसान रहीशपाल की हुई। गेहूं की फसल पर जब ओले गिरते देखे तो सदमे में वह मर गया। प्रशासन ने इसे फसलों के नुकसान से हुई मौत नहीं माना। यह परिवार आज भी सरकार की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
टूंडला के टीकरी में नीरज और हरीश्चंद्र यादव, हाथवंत में हरिश्चंद्र, बांस झरना में शिवशंकर, नारखी के गढ़ी हंसराम में गोपी चंद्र, खुशालपुर में मुन्नालाल, खैरगढ़ के कलूपुरा में कायम सिंह, बड़ा लालपुर के होरीलाल यादव की सदमे से मौत हो गई। जबकि लालपुर में श्री प्रकाश यादव, गढ़ी तिवारी में रामचरन निषाद, फतेहपुर नसीरपुर में नरेंद्र, लुखरिया निवासी किसान भूपेंद्र, शिकोहाबाद के नगला सैंदलाल निवासी किसान राकेश ने आत्महत्या कर ली। इनमें से किसी की भी मौत को प्रशासन ने फसलों के नुकसान से नहीं जोड़ा है। सदमे वाली मौतों को प्रशासन ने स्वाभाविक मौत कह दिया और आत्महत्या करने वालों को पारिवारिक कलह बता कर अपनी जवाबदेही पूरी कर दी। इन सभी परिवारों में मौतों के मातम के साथ फसलों के नुकसान की त्रासदी बता रही है कि इनकी फसलें उजड़ने के साथ सपने बिखर गए। परिवार और गांव के लोग कह रहे हैं कि मौतों का कारण क्या है....? पर प्रशासन का अपना नजरिया है अपना फार्मेट है जिसमें किसानों की मौत मुआवजे के सांचे में फिट नहीं बठती।

प्रशासन के आंकलन में 60 हजार हेक्टेयर से अधिक ही फसल बर्बाद हुई। 1499 हेक्टेयर फसल में 50 प्रतिशत से अधिक हानि हुई। प्रशासन ने किसानों को मुआवजा के रूप में दो करोड़ 69 लाख 80 हजार मांगे। शासन ने एक करोड़ 84 लाख जिले को मुआवजा राशि के रूप में दिए। मुआवजा की दरें शासन ने नौ हजार प्रति हेक्टेयर की दर से बढ़ाकर 18 हजार जरूर की हैं लेकिन किसान की जेब में आने वाला पैसा ऊंट के मुंह में जीरा समान है।

किसानों का दर्द
नारखी क्षेत्र के गांव गढ़ी हंसराम निवासी किसान बंटी सिंह का कहना है कि पूरे गांव में जिला प्रशासन द्वारा किसी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया। मेरी 18 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई, आजतक मुआवजे के रूप में एक रुपया नहीं मिला।

गांव गढ़ी अफोह निवासी जितेंद्रपाल सिंह का कहना है कि सपा सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है। सर्वे एवं मुआवजा वितरण के नाम पर किसानों से मजाक किया जा रहा है।

इंद्रपाल कहते हैं कि बरसात एवं ओलावृष्टि से नारखी क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक फसलें बर्बाद हो गईं हैं, परंतु सरकार द्वारा कोई सुध नहीं ली गई।

मुआवजे के नाम 750 रुपये
नैपई के बहादुर सिंह, राजेंद्र सिंह, महादेवी, दीवान सिंह, सुल्तान सिंह, सौदान सिंह, रामवीर सिंह गांव बजीरपुर कोटला के विनोद कुमार, रहीशपाल, रामवीर सिंह, हरीसिंह, गांव त्रिलोकपुर सोबरन सिंह आदि ऐसे किसान हैं जिन्हें मात्र 750 रुपये मुआवजा मिला है।

आलू की बर्बादी देख किसान ने विषाक्त खाया
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। फरिहा थाना क्षेत्र के गांव रखावली निवासी किसान गैंदालाल (55) पुत्र पुन्नीलाल ने आलू की खेती की थी। बरसात के चलते आलू की फसल बर्बाद होने से बची तो कोल्डस्टोरेज में जगह और बाजार में सही भाव न मिलने के कारण आलू खेत में ही सड़ने लगा। इसको लेकर गैंदालाल मानसिक रुप से परेशान रहने लगा। इसी परेशानी के चलते उसने सोमवार रात विषाक्त का सेवन कर लिया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है।

थम नहीं रहे रामदेवी के आंसू
फीरोजाबाद। अमर उजाला टीम सदर तहसील के गांव गढ़ी तिवारी में किसान रामचरन के आवास पर पहुंची। 15 मार्च की बारिश व ओलावृष्टि ने इस परिवार के सपनों पर बज्रपात किया। सपने बिखर गए। रामचरन अपनी बेटी की शादी की तैयारी कर रहा था। सवा लाख रुपया कर्ज लेकर उसने लीज पर खेत लेकर आलू और गेहूं की फसल की थी। रामचरन फसलों को बर्बाद देखकर तनाव में था। 26 मार्च को उसने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली। पूरा परिवार इस वक्त मुफलसी की जिंदगी जी रहा है। रामचरन की पत्नी रामदेवी के आंसू अभी भी थम नहीं रहे हैं। उसके पास इतना पैसा नहीं कि छोटी बेटी कंचन का उपचार करा लेती। मजबूरन उसे ऐलई में मामा के घर भेजना पड़ा। बेटों की पढ़ाई भी बंद करनी ही पड़ेगी। यहां नेता लोग ढांढस बंधाने तो पहुंचे लेकिन आर्थिक मदद के नाम पर सभी ने हाथ खड़े कर दिए।
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