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टीटीजेड की बंदिशों में जकड़ा कांच उद्योग

Sat, 06 Apr 2019 11:42 PM IST
anant jain anant anant
Updated Sat, 06 Apr 2019 11:42 PM IST
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टीटीजेड की बंदिशों में जकड़ा कांच उद्योग
कांच की फैक्ट्री - फोटो : demo pic
फिरोजाबाद। सुहागनगरी का कांच व चूड़ी उद्योग पिछले चार से साल टीटीजेड की बंदिशों में जकड़ा हुआ है। इसके चलते यहां न तो नए उद्योग लग पा रहे हैं और न ही कांच इकाइयां क्षमता के अनुरूप कांच उत्पादन कर रही पा रहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट तक मामला पहुंचा। केंद्र व प्रदेश स्तर पर पहल हुई, लेकिन आजतक उद्यमियों को सफलता नहीं मिली।

हाईकोर्ट के आदेश से वर्ष 1996 से सुहागनगरी में नेचुरल गैस से 200 कांच व चूड़ी इकाइयों का संचालन हो रहा है। इसके बावजूद टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण को लेकर तमाम बंदिशें लगा दी गई हैं।
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बढ़ते प्रदूषण की शिकायत पर फिरोजाबाद में जनवरी 2015 से नई इकाइयों की स्थापना व क्षमता विस्तार पर बैन लगा है। ऐसे में करोड़ों का निवेश करने वाली तीन दर्जन से अधिक इंकाइयों चालू होने की बाट जोह रही हैं।
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टीटीजेड में लगी रोक को हटवाने के लिए उद्यमी चार साल से दिल्ली से लखनऊ तक दौड़ लगा रहे हैं। हाईकोर्ट की शरण भी ली, परंतु मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने से मुश्किल बढ़ गई।

सुहागनगरी में कांच इंकाइयों द्वारा क्षमता विस्तार से शुरू हुआ शिकायतों का दौर सालों बाद भी जारी है। बाहरी औद्योगिक संगठनों द्वारा पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी, टीटीजेड अथॉरिटी में लगातार शिकायतें करने से कांच उद्योग की मुश्किलें बढ़ती गईं। उद्यमियों का स्पष्ट कहना है कि बड़े औद्योगिक संगठन कांच उद्योग के विकास में रुकवाट पैदा कर रहे हैं।

ताजमहल पर बढ़ते प्रदूषण व रखरखाव में लापरवाही को लेकर टीटीजेड से राहत मिलने की उम्मीद भी धूमिल होती नजर आ रही है। एमसी मेहता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश की अवमानना पर मंडलायुक्त को तलब कर लिया था।

ताजमहल को प्रदूषण से बचाने, उद्योग बरबाद न हों, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने विजन डाक्यूमेंट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। लंबी प्रक्रिया के बाद भी फाइनल विजन डाक्यूमेंट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नहीं हो सका है।

नई दिल्ली की सेफ संस्था द्वारा एनजीटी में कांच इकाइयों द्वारा प्रदूषण फैलाने, अफसरों द्वारा मानकों को ताक पर रखकर इकाइयों को अनुमति देने, क्षमता विस्तार के मामले में शिकायत की गई।


कई साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद एनजीटी ने सेफ संस्था की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे कांच उद्योग को बड़ी राहत मिली। प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित चल रहा है।

 
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