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Fatehpur News: प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व सात बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत
Mon, 26 Feb 2024 12:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Mon, 26 Feb 2024 12:53 AM IST
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फोटो-26-यज्ञोपवीत में मौजूद बटुक। संवाद
प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व सात बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत
संवाद न्यूज एजेंसी
बकेवर। बकेश्वर मंदिर में रविवार को प्राण प्रतिष्ठा के एक दिन पहले भगवान शनिदेव का गाजे- बाजे के साथ भ्रमण कराया गया। इसके बाद यज्ञ में सात वटुकों का गौरव मिश्रा, आलोक तिवारी, राधेश्याम तिवारी, हरिओम पांडे, अमन तिवारी, पुष्पेंद्र दुबे निवासी बकेवर और कानपुर के शिवम मिश्रा का यज्ञोपवीत हुआ।
इसके बाद श्रीराम कथावाचक आचार्य ने विधिविधान से गणपति पूजन, कलश और नवग्रह का पूजन कराया। आचार्य अतुल कृष्ण तिवारी ने कहा कि माता सती ने अभिमान वश कूंभज ऋषि से श्रीराम की कथा को नहीं सुना और श्री राम पर संदेह किया। उसके बाद माता सती बिना बुलाए अपने पिता के यज्ञ में गईं। भगवान शंकर का और अपना अपमान सहन नहीं कर सकी। योग अग्नि से अपने शरीर को जलाकर भस्म कर दिया। माता सती ने दोबारा जन्म लिया और इसके बाद हर-गौरी का विवाह आनंदपूर्वक संपन्न हुआ। हिमाचल ने कन्यादान दिया। विष्णु भगवान तथा अन्यान्य देव और देव-रमणियों ने नाना प्रकार के उपहार भेंट किए। ब्रह्माजी ने वेदोक्त रीति से विवाह कराया।
इस मौके पर महंत विवेकानंद सरस्वती काशी जूनागढ़ अखाड़ा , महंत द्वारकाधीश और संत रामदास मनेश्वर बाबा, कोतवाल गिरधर दास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व सात बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत
संवाद न्यूज एजेंसी
बकेवर। बकेश्वर मंदिर में रविवार को प्राण प्रतिष्ठा के एक दिन पहले भगवान शनिदेव का गाजे- बाजे के साथ भ्रमण कराया गया। इसके बाद यज्ञ में सात वटुकों का गौरव मिश्रा, आलोक तिवारी, राधेश्याम तिवारी, हरिओम पांडे, अमन तिवारी, पुष्पेंद्र दुबे निवासी बकेवर और कानपुर के शिवम मिश्रा का यज्ञोपवीत हुआ।
इसके बाद श्रीराम कथावाचक आचार्य ने विधिविधान से गणपति पूजन, कलश और नवग्रह का पूजन कराया। आचार्य अतुल कृष्ण तिवारी ने कहा कि माता सती ने अभिमान वश कूंभज ऋषि से श्रीराम की कथा को नहीं सुना और श्री राम पर संदेह किया। उसके बाद माता सती बिना बुलाए अपने पिता के यज्ञ में गईं। भगवान शंकर का और अपना अपमान सहन नहीं कर सकी। योग अग्नि से अपने शरीर को जलाकर भस्म कर दिया। माता सती ने दोबारा जन्म लिया और इसके बाद हर-गौरी का विवाह आनंदपूर्वक संपन्न हुआ। हिमाचल ने कन्यादान दिया। विष्णु भगवान तथा अन्यान्य देव और देव-रमणियों ने नाना प्रकार के उपहार भेंट किए। ब्रह्माजी ने वेदोक्त रीति से विवाह कराया।
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इस मौके पर महंत विवेकानंद सरस्वती काशी जूनागढ़ अखाड़ा , महंत द्वारकाधीश और संत रामदास मनेश्वर बाबा, कोतवाल गिरधर दास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।