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तेलियानी पीएचसी में सुबह 11 बजे तक नहीं शुरू हुआ इलाज
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोराई
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। बेहतर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के दम पर कायाकल्प अवार्ड में जिले में पहला व सूबे में आठवां स्थान हासिल करने वाली तेलियानी पीएचसी की सेवाएं बुधवार को पटरी से उतरी दिखीं। जिन सुविधाओं और सेवाओं के बल पर यह तमगा मिला, उसकी सुबह के पहर अंशमात्र ही झलक देखने को मिल सकी। इस अस्पताल में न संक्रमण से बचाव के उपाय दिखे और न ही मरीजों की नब्ज पकड़ने को चिकित्सक। बाकी स्टाफ का भी अता पता नहीं था। प्रसवोत्तर केेंद्र जरूर अपवाद रहा। प्रसव केंद्र में एक स्टाफ नर्स ड्यूटी निभाती मिलीं। हालांकि इस केंद्र में भी ड्यूटी से मजाक होता दिखा क्योंकि रात में बच्चा जन्मने वाली प्रसूता को सुबह होते ही छुट्टी दे दी गई। पेश है एक रिपोर्ट...
दमापुर के डॉक्टर ने संभाली ओपीडी
फतेहपुर। सर्दी में पीएचसी व सीएचसी की ओपीडी का संचालन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच हो रहा है। अमर उजाला ने इस अस्पताल का 50 मिनट जायजा लिया तो हाल ही में मिले तमगे से अलहदा हालात नजर आए। चिकित्साधीक्षक डॉ. अतुल श्रीवास्तव का चैंबर खाली था। पीएचसी में साढ़े 10 बजे के बाद आयुष चिकित्सकों का आना शुरू हो सका। सबसे पहले आयुष चिकित्सक संजीव आए। आयुष चिकित्सक डॉ. मेवालाल ने सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर परिसर मेें कदम रखा। 10 बजकर 40 मिनट पर दमापुर अस्पताल में तैनात डॉ. इरफान आए। इनमें से संजीव व मेवालाल कोविड-19 के चलते परिसर में सेवाएं देने के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। डॉ. इरफान के चिकित्साधीक्षक का चैंबर संभालने के बाद इलाज शुरू हो सका। हालांकि आयुष इलाज समय से ही शुरू हो गया था क्योंकि होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार वर्मा अपने चैंबर में मौजूद थे।
जच्चा व बच्चा से होता मिला मजाक
एनक्वास के दायरे में लाई गई जिले की इस पीएचसी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का सच कई तरह से सामने आया। यहां पर हरेक महीने औसतन 150 के पास प्रसव होते हैं लेकिन इन प्रसव को लेकर कितनी सजगता बरती जा रही है, इसकी सच्चाई प्रसवोत्तर केंद्र के रजिस्टर से पता चली। मंगलवार की रात को ढोढिय़ाही गांव शैलेंद्र की पत्नी विमला को लाकर भर्ती कराया गया था। अस्पताल मेें सबसे पहले नजर आईं प्रसवोत्तर केेंद्र की स्टाफ नर्स स्मृति यादव ने बताया कि बच्चा होने के बाद परिजन जच्चा और बच्चा को लेकर सुबह चले गए हैं।
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साढ़े 10 बजे खुला टीकाकक्ष का ताला
फतेहपुर। बुधवार व शनिवार का दिन टीकाकरण का होता है। इस दिन महिलाएं व नवजात बच्चों को जरूरी टीके लगाए जाते हैं लेकिन इस अस्पताल में टीकाकरण पर भी सवाल नजर आए। मसलन, टीका कक्ष में सुबह साढ़े 10 बजे तक ताला लटकता रहा। बाइक से उतरीं स्टाफ नर्स नेहा ने टीका कक्ष का ताला खोला। कक्ष खुलने के साथ ही बाहर से दो महिलाएं अंदर दाखिल हुईं और सामने की सीमेंटेड सीट पर बैठ गईं। कोविड-डेस्क बनी थी लेकिन उस पर कोई कर्मचारी नहीं दिखा। सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर पंजीयन कक्ष की ड्यूटी करने वाले राम सनेही इस डेस्क पर आकर बैठे लेकिन पर्चा का सीरियल बनाने लगे।
तेलियानी पीएचसी का कायाकल्प का प्रदेश में आठवां स्थान मिल चुका है। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्वास) के दायरे में इस पीएचसी को रखा गया है। राज्य स्तरीय टीम सर्वे कर चुकी है। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड की टीम के सर्वे पर अगर यह अस्पताल पास हो जाएगा तो इसे देेश की पहली सुविधापरक पीएचसी का गौरव हासिल हो जाएगा।
- डॉ. एहतेराम हुुसैन, जिला सलाहकार, क्वालिटी एश्योरेंस
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दमापुर के डॉक्टर ने संभाली ओपीडी
फतेहपुर। सर्दी में पीएचसी व सीएचसी की ओपीडी का संचालन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच हो रहा है। अमर उजाला ने इस अस्पताल का 50 मिनट जायजा लिया तो हाल ही में मिले तमगे से अलहदा हालात नजर आए। चिकित्साधीक्षक डॉ. अतुल श्रीवास्तव का चैंबर खाली था। पीएचसी में साढ़े 10 बजे के बाद आयुष चिकित्सकों का आना शुरू हो सका। सबसे पहले आयुष चिकित्सक संजीव आए। आयुष चिकित्सक डॉ. मेवालाल ने सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर परिसर मेें कदम रखा। 10 बजकर 40 मिनट पर दमापुर अस्पताल में तैनात डॉ. इरफान आए। इनमें से संजीव व मेवालाल कोविड-19 के चलते परिसर में सेवाएं देने के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। डॉ. इरफान के चिकित्साधीक्षक का चैंबर संभालने के बाद इलाज शुरू हो सका। हालांकि आयुष इलाज समय से ही शुरू हो गया था क्योंकि होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार वर्मा अपने चैंबर में मौजूद थे।
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जच्चा व बच्चा से होता मिला मजाक
एनक्वास के दायरे में लाई गई जिले की इस पीएचसी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का सच कई तरह से सामने आया। यहां पर हरेक महीने औसतन 150 के पास प्रसव होते हैं लेकिन इन प्रसव को लेकर कितनी सजगता बरती जा रही है, इसकी सच्चाई प्रसवोत्तर केंद्र के रजिस्टर से पता चली। मंगलवार की रात को ढोढिय़ाही गांव शैलेंद्र की पत्नी विमला को लाकर भर्ती कराया गया था। अस्पताल मेें सबसे पहले नजर आईं प्रसवोत्तर केेंद्र की स्टाफ नर्स स्मृति यादव ने बताया कि बच्चा होने के बाद परिजन जच्चा और बच्चा को लेकर सुबह चले गए हैं।
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साढ़े 10 बजे खुला टीकाकक्ष का ताला
फतेहपुर। बुधवार व शनिवार का दिन टीकाकरण का होता है। इस दिन महिलाएं व नवजात बच्चों को जरूरी टीके लगाए जाते हैं लेकिन इस अस्पताल में टीकाकरण पर भी सवाल नजर आए। मसलन, टीका कक्ष में सुबह साढ़े 10 बजे तक ताला लटकता रहा। बाइक से उतरीं स्टाफ नर्स नेहा ने टीका कक्ष का ताला खोला। कक्ष खुलने के साथ ही बाहर से दो महिलाएं अंदर दाखिल हुईं और सामने की सीमेंटेड सीट पर बैठ गईं। कोविड-डेस्क बनी थी लेकिन उस पर कोई कर्मचारी नहीं दिखा। सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर पंजीयन कक्ष की ड्यूटी करने वाले राम सनेही इस डेस्क पर आकर बैठे लेकिन पर्चा का सीरियल बनाने लगे।
तेलियानी पीएचसी का कायाकल्प का प्रदेश में आठवां स्थान मिल चुका है। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्वास) के दायरे में इस पीएचसी को रखा गया है। राज्य स्तरीय टीम सर्वे कर चुकी है। नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड की टीम के सर्वे पर अगर यह अस्पताल पास हो जाएगा तो इसे देेश की पहली सुविधापरक पीएचसी का गौरव हासिल हो जाएगा।
- डॉ. एहतेराम हुुसैन, जिला सलाहकार, क्वालिटी एश्योरेंस