फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   To decline thou, thou also adopt

ठुकराने वाली तू,अपनाने वाली भी तू

Wed, 10 Aug 2016 01:21 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर Updated Wed, 10 Aug 2016 01:21 AM IST
विज्ञापन
To decline thou, thou also adopt
जेके उमराव में भ्‍ाती बच्‍चा - फोटो : amarujala
फतेहपुर। हुसैनगंज थाना क्षेत्र के फिरोजपुर गांव के प्राइमरी स्कूल के पीछे पांच अगस्त को जिस नवजात के शरीर को चींटों और चींटियों ने छलनी कर दिया था। वह एक प्राइवेट आईसीयू में सांसें ले रहा है। अब शरीर से कीड़ों का निकलना बंद हो चुका है तो प्लेटलेट्स में भी सुधार हो रहा है। देखा जाए तो जिंदगी की जारी इस जंग के मुख्य किरदार  में स्कूल की रसोइयां और घर की गृहिणी शामिल हैं।
विज्ञापन

इस नवजात को फिरोजपुर प्राइमरी स्कूूल की रसोइया गोमती ने आंचल में छिपाकर हुसैनगंज सीएचसी पहुंचाया था। जिस वक्त रसोइया इसे लेकर सरकारी अस्पताल पहुंची थी, वह मौत के मुहाने पर था। पूरा शरीर छलनी था। चीटें और चींटियां शरीर पर रेंग रही थी। ऐसे में गोमती की ममता जाग उठी। वह समाज की दकियानूसी बातों से बेपरवाह होते हुए इसे जीवन देने के लिए आगे आई।
विज्ञापन


रामदुलारी की ममता जाग उठी
सीएचसी में डॉक्टर नवजात की जान को संभाल नहीं पा रहे थे। यह चर्चा करीब के मेडिकल स्टोर तक पहुंची। वहां किस्मत से जयराम नगर की रामदुलारी दवा लेने पहुंची थी। कान में आवाज गई तो उसकी ममता जाग उठी। उसने बच्चे को उठाया, मेडिकल स्टोर वाले ने भी मुफ्त में साफ-सफाई की और नवजात को चिल्ड्रेन स्पेशलिस्ट डॉ. जेके उमराव के पास पहुंचा दिया। गृहणी रामदुलारी ने नवजात की जान सलामती का बीड़ा उठा लिया है। पति राम किशोर मेहनत मजदूरी करते हैं। पति से सूनी कोख का हवाला देकर अपनाने का फैसला कर लिया। माली हालत बेहतर न होने के बावजूद यशोदा मइया बनी रामदुलारी ने नवजात की जिंदगी बचाने का जिम्मा संभाल लिया है। विश्वास जताया कि एक न एक दिन यह नवजात भी अन्य नवजात शिशुओं की तरह दुनिया देख सकेगा। राम किशोर कहते हैं कि यह नवजात उनकी बची जिंदगी का सहारा बन चुका है। इस पर जितना खर्च होगा करेंगे। फिर चाहे कितने बड़े कर्जदार ही क्यों न बन जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन


चलो किसी की तो भर गई गोद
फतेहपुर। राधा नगर पुलिया के पास लावारिस हालत में मिले नवजात को अपनाने की कोशिश करने वाली पुलिस चौकी में रसोइया सविता पर माली हालत पर जोर न चला। वह अपनी गोद का वात्सल्य इस तिरस्कृत नवजात पर लुटाने को आगे आई थी, लेकिन गरीबी के कारण ऐसा नहीं कर सकी। हालांकि वह खुश है कि उसकी न सही, किसी की गोद तो    भर गई।
साउथ सिटी के राधानगर की नई बस्ती में रहने वाली सविता पुलिस चौकी में रसोइया का काम करती है।  जुलाई के आखिरी सप्ताह में एक नवजात राधानगर पुलिया के पास मिला था। इस नवजात को अपनाने के लिए कई हाथ आगे बढ़े थे, उनमें एक सविता भी थी। सविता इस तिरस्कृत को लेकर सदर अस्पताल पहुंची। इलाज कराया, लेकिन मातृत्व सुख हासिल करने में कामयाब नहीं हो सकी। गरीबी आड़े आ गई और उसे मातृत्व सुख से वंचित होना पड़ा। इस नवजात को पुलिस और प्रशासन ने इस नवजात को औलाद के सुख से वंचित एक सक्षम दंपति के गोद में डाल दिया। आज भले ही वह अपने प्रयास में विफल रही, लेकिन एक महिला होने के नाते उसे इस बात की प्रसन्नता है कि आखिर नवजात को किसी यशोदा का सहारा तो मिल गया।

दूसरी ओर इलाज कर रहे डॉ. जेके उमराव का   कहना है कि नवजात की हालत मेें सुधार हो रहा है। सोमवार से पहले शरीर से कीड़े निकल रहे थे, अब यह बंद हो गया है। प्लेटलेट्स में खासा इजाफा हुआ है। जिस वक्त भर्ती हुआ था तब महज 64 हजार प्लेटलेट्स काउंट हुई थी। इस समय यह एक लाख 40 हजार क्रास कर चुकी हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed