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Fatehpur News: बारिश और तेज हवा से हजारों बीघे फसल तबाह, किसान बेहाल
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फोटो-06- बरसात के चलते गिरी केला की फसल। संवाद
फतेहपुर/बकेबर। लगातार बारिश और तेज हवा से देवमई-मलवां क्षेत्र के कई गांवों में केले, मिर्च, धान, परवल, लौकी और कद्दू की फसलें बर्बाद हो गईं। मवाईया, कृष्णापुर और बांका में करीब 500 बीघा केले की फसल प्रभावित हुई है। अगैती धान और केला तैयार था, लेकिन बारिश और हवा से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।
कृष्णापुर में राम बहादुर सिंह की पांच, शिव बहादुर सिंह की तीन, अवधेश सिंह की तीन, रणविजय सिंह की दो और वासुदेव की पांच बीघा केले की फसल बर्बाद हुई। बांका में पुत्ती सिंह की 10, सुशील सिंह की पांच, अरविंद कुशवाहा व रज्जन की एक-एक और विवेक सिंह की तीन बीघा फसल खराब हुई। मवाईया में राजू कुशवाहा की एक, जीतू सिंह की पांच, मनु राम तिवारी की दो, वीरेंद्र कुशवाहा की एक, रामनरेश विश्वकर्मा की दो, अरुण तिवारी की दो, रमाकांत कुशवाहा की तीन, रामबाबू कुशवाहा की चार, दिनेश तिवारी की चार और अरविंद कुशवाहा की एक बीघा फसल प्रभावित हुई।
भैरमपुर और मथुरापुर में रामकरण निषाद की तीन, धनीराम निषाद की छह, राम प्रसाद की दो, कल्लू निषाद की दो, ननका की दो, संजय निषाद की दो और रामबाबू कुशवाहा की एक बीघा मिर्च खराब हुई। बकेवर में मनीराम कुशवाहा, राजकमल कुशवाहा, भोला कुशवाहा और शिवराम की लौकी व कद्दू की फसल बर्बाद हुई। मानीखेड़ा, खेसहान और गाजीपुर में जलभराव से जगरूप कुशवाहा व मोहन कुशवाहा की 10 बीघा केला और 26 बीघा धान तथा सुशील कुशवाहा की पांच बीघा परवल की फसल खराब हो गई।
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किसानों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद नुकसान का सर्वे नहीं हुआ। एसडीएम बिंदकी निशांत तिवारी ने बताया कि शासन से अभी सर्वे का आदेश नहीं आया है। आदेश मिलने पर सर्वे कराया जाएगा।
बारिश ने फेरा किसानों की उम्मीदों पर पानी
जाफरगंज। खजुहा विकासखंड के यमुना तटवर्ती क्षेत्र में करीब एक पखवाड़े की बारिश से खरीफ की 50 फीसदी फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी थी। शुक्रवार और शनिवार की बारिश ने बची फसल भी चौपट कर दी। खेतों में पानी भरने से धान, तिल, तिली, अरहर और कुम्हड़े समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। कई खेतों में धान गिरकर सड़ने लगा है, जबकि कुम्हड़े की फसल को किसानों के मुताबिक करीब 90 फीसदी तक नुकसान हुआ है।
बरवा, खुंटाझाल, कोरवल, शुकलनपुर, मऊदेव, बारा, ककोरा, गौरा, भारतपुर, गहरूखेड़ा, आंवरखेड़ा और सुल्तानगढ़ समेत सैकड़ों गांवों के किसान प्रभावित हैं। किसानों ने खाद-बीज, जुताई और बुआई में बड़ी रकम खर्च की थी और फसल बेचकर कर्ज चुकाने की उम्मीद थी। अब फसल बर्बाद होने से कर्ज और अगली फसल की तैयारी की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने प्रशासन से गांव-गांव सर्वे कराकर क्षति का आकलन कराने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
पानी की निकासी न हुई तो बढ़ सकता नुकसान
बारा गांव निवासी किसान दिनेश ने बताया बारिश और जलभराव से धान, अरहर और तिल की फसल प्रभावित हुई है। समय पर पानी की निकासी नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। प्रशासन को सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाना चाहिए।
शुक्लनपुर निवासी किसान संतोष वर्मा ने बताया बारिश और जलभराव से धान, अरहर और तिल की फसल प्रभावित हुई है। समय पर पानी की निकासी नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। प्रशासन को सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाना चाहिए।
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कृष्णापुर में राम बहादुर सिंह की पांच, शिव बहादुर सिंह की तीन, अवधेश सिंह की तीन, रणविजय सिंह की दो और वासुदेव की पांच बीघा केले की फसल बर्बाद हुई। बांका में पुत्ती सिंह की 10, सुशील सिंह की पांच, अरविंद कुशवाहा व रज्जन की एक-एक और विवेक सिंह की तीन बीघा फसल खराब हुई। मवाईया में राजू कुशवाहा की एक, जीतू सिंह की पांच, मनु राम तिवारी की दो, वीरेंद्र कुशवाहा की एक, रामनरेश विश्वकर्मा की दो, अरुण तिवारी की दो, रमाकांत कुशवाहा की तीन, रामबाबू कुशवाहा की चार, दिनेश तिवारी की चार और अरविंद कुशवाहा की एक बीघा फसल प्रभावित हुई।
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भैरमपुर और मथुरापुर में रामकरण निषाद की तीन, धनीराम निषाद की छह, राम प्रसाद की दो, कल्लू निषाद की दो, ननका की दो, संजय निषाद की दो और रामबाबू कुशवाहा की एक बीघा मिर्च खराब हुई। बकेवर में मनीराम कुशवाहा, राजकमल कुशवाहा, भोला कुशवाहा और शिवराम की लौकी व कद्दू की फसल बर्बाद हुई। मानीखेड़ा, खेसहान और गाजीपुर में जलभराव से जगरूप कुशवाहा व मोहन कुशवाहा की 10 बीघा केला और 26 बीघा धान तथा सुशील कुशवाहा की पांच बीघा परवल की फसल खराब हो गई।
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किसानों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद नुकसान का सर्वे नहीं हुआ। एसडीएम बिंदकी निशांत तिवारी ने बताया कि शासन से अभी सर्वे का आदेश नहीं आया है। आदेश मिलने पर सर्वे कराया जाएगा।
बारिश ने फेरा किसानों की उम्मीदों पर पानी
जाफरगंज। खजुहा विकासखंड के यमुना तटवर्ती क्षेत्र में करीब एक पखवाड़े की बारिश से खरीफ की 50 फीसदी फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी थी। शुक्रवार और शनिवार की बारिश ने बची फसल भी चौपट कर दी। खेतों में पानी भरने से धान, तिल, तिली, अरहर और कुम्हड़े समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। कई खेतों में धान गिरकर सड़ने लगा है, जबकि कुम्हड़े की फसल को किसानों के मुताबिक करीब 90 फीसदी तक नुकसान हुआ है।
बरवा, खुंटाझाल, कोरवल, शुकलनपुर, मऊदेव, बारा, ककोरा, गौरा, भारतपुर, गहरूखेड़ा, आंवरखेड़ा और सुल्तानगढ़ समेत सैकड़ों गांवों के किसान प्रभावित हैं। किसानों ने खाद-बीज, जुताई और बुआई में बड़ी रकम खर्च की थी और फसल बेचकर कर्ज चुकाने की उम्मीद थी। अब फसल बर्बाद होने से कर्ज और अगली फसल की तैयारी की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने प्रशासन से गांव-गांव सर्वे कराकर क्षति का आकलन कराने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
पानी की निकासी न हुई तो बढ़ सकता नुकसान
बारा गांव निवासी किसान दिनेश ने बताया बारिश और जलभराव से धान, अरहर और तिल की फसल प्रभावित हुई है। समय पर पानी की निकासी नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। प्रशासन को सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाना चाहिए।
शुक्लनपुर निवासी किसान संतोष वर्मा ने बताया बारिश और जलभराव से धान, अरहर और तिल की फसल प्रभावित हुई है। समय पर पानी की निकासी नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। प्रशासन को सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाना चाहिए।

फोटो-06- बरसात के चलते गिरी केला की फसल। संवाद