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रुद्रवंती के संरक्षण को प्रशासन ने उठाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो/फतेहपुर
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:05 PM IST
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रुद्रवंती के क्षेत्र का निरीक्षण करते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दोआबा की दुर्लभ औषधि मानी जाने वाली रुद्रवंती के संरक्षण की दिशा में बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। राजस्व विभाग, वन विभाग, चिकित्सा विभाग की टीम ने पैमाइश की। टीम के अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार कर ली है।
स्वामी विज्ञानानंद ने रुद्रवंती के संरक्षण के लिए शासन को पत्र लिखा था। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रशासन को पत्र लिख कर निर्देश दिया था कि रुद्रवंती वाले क्षेत्र का निरीक्षण कर उसके संरक्षण के लिए उचित कदम बढ़ाएं।
बुधवार को पीडी मनरेगा पुतान सिंह, डीएफओ सीपीसी मलिक व राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मझिलगांव के 15 बिस्वा में रुद्रवंती पाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि पहले करीब 20 बीघा में रुद्रवंती मिलती थी। कई साल पहले हर्बल उत्पादन करने वाली कंपनियां यहां से रुद्रवंती ले जाती थी। इसका आयुर्वेदिक दवाओं में प्रयोग होता है। टीबी जैसे असाध्य रोग के लिए पहले रुद्रवंती का ही सहारा लिया जाता था। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इसका क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है।
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पीडी मनरेगा ने बताया कि रुद्रवंती का क्षेत्रफल 15 बिस्वा में सीमित है। अभी यह निश्चित नहीं हो पाया कि यह जमीन भूमिधरी है या तालाबी नंबर है। तहसीलदार खागा राजस्व टीम भेज कर पैमाइश करा रहे हैं। रिपोर्ट मिलते ही मनरेगा से इस क्षेत्रफल का संरक्षण कराया जाएगा। जिला आयुर्वेद अधिकारी ने रुद्रवंती का नमूना लिया है। इसकी जांच कराएंगे। डीएफओ सीपीसी मलिक ने बताया कि वन विभाग की जमीन का सीमांकन कराया जाएगा। उसमें औषधीय रुद्रवंती का संरक्षण कराया जाएगा।
नया जीवन मिला था ससुर खदेरी नदी को
फतेहपुर। स्वामी विज्ञानानंद की पहल से ही जिले की मृतप्राय ससुर खदेरी नदी को नया जीवन मिला था। ससुर खदेरी नदी का जीर्णोद्धार राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बना। तत्कालीन जिलाधिकारी कंचन वर्मा को प्रधानमंत्री ने सम्मानित भी किया था। नदी के जीर्णोद्धार के बाद रुद्रवंती का संरक्षण मील का पत्थर साबित हो सकती है। स्वामी विज्ञानानंद ने बताया कि खागा तहसील के मझिलगांव में 90 बीघा की झील है। इसमें क्षेत्रीय लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसी जमीन में रुद्रवंती होती रही है। अवैध कब्जा कर उसमें खेती करने से यह विलुप्त प्राय होती जा रही है। उन्होंने बताया कि तीन दिन बाद इसका प्रोजेक्ट तैयार कर अधिकारी शासन को भेजेंगे।
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स्वामी विज्ञानानंद ने रुद्रवंती के संरक्षण के लिए शासन को पत्र लिखा था। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रशासन को पत्र लिख कर निर्देश दिया था कि रुद्रवंती वाले क्षेत्र का निरीक्षण कर उसके संरक्षण के लिए उचित कदम बढ़ाएं।
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बुधवार को पीडी मनरेगा पुतान सिंह, डीएफओ सीपीसी मलिक व राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मझिलगांव के 15 बिस्वा में रुद्रवंती पाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि पहले करीब 20 बीघा में रुद्रवंती मिलती थी। कई साल पहले हर्बल उत्पादन करने वाली कंपनियां यहां से रुद्रवंती ले जाती थी। इसका आयुर्वेदिक दवाओं में प्रयोग होता है। टीबी जैसे असाध्य रोग के लिए पहले रुद्रवंती का ही सहारा लिया जाता था। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इसका क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है।
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पीडी मनरेगा ने बताया कि रुद्रवंती का क्षेत्रफल 15 बिस्वा में सीमित है। अभी यह निश्चित नहीं हो पाया कि यह जमीन भूमिधरी है या तालाबी नंबर है। तहसीलदार खागा राजस्व टीम भेज कर पैमाइश करा रहे हैं। रिपोर्ट मिलते ही मनरेगा से इस क्षेत्रफल का संरक्षण कराया जाएगा। जिला आयुर्वेद अधिकारी ने रुद्रवंती का नमूना लिया है। इसकी जांच कराएंगे। डीएफओ सीपीसी मलिक ने बताया कि वन विभाग की जमीन का सीमांकन कराया जाएगा। उसमें औषधीय रुद्रवंती का संरक्षण कराया जाएगा।
नया जीवन मिला था ससुर खदेरी नदी को
फतेहपुर। स्वामी विज्ञानानंद की पहल से ही जिले की मृतप्राय ससुर खदेरी नदी को नया जीवन मिला था। ससुर खदेरी नदी का जीर्णोद्धार राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बना। तत्कालीन जिलाधिकारी कंचन वर्मा को प्रधानमंत्री ने सम्मानित भी किया था। नदी के जीर्णोद्धार के बाद रुद्रवंती का संरक्षण मील का पत्थर साबित हो सकती है। स्वामी विज्ञानानंद ने बताया कि खागा तहसील के मझिलगांव में 90 बीघा की झील है। इसमें क्षेत्रीय लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसी जमीन में रुद्रवंती होती रही है। अवैध कब्जा कर उसमें खेती करने से यह विलुप्त प्राय होती जा रही है। उन्होंने बताया कि तीन दिन बाद इसका प्रोजेक्ट तैयार कर अधिकारी शासन को भेजेंगे।