फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   The market of the market

मंडी के आढ़तियों का धंधा हुआ मंदा

Wed, 08 Jul 2020 10:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2020 10:12 PM IST
विज्ञापन
The market of the market
मंडी के अंदर किसानों से खरीद करने पर टैक्स देने के केंद्र सरकार के नए अध्यादेश से आढ़तियों का धंधा मंदा हो गया है। मंडी के बाहर से खरीदने और बेचने का कारोबार बढ़ रहा है।
विज्ञापन

इससे प्रशासन को मंडी शुल्क के नाम पर मिलने वाले राजस्व में भी कमी आई है। सुस्त व्यापार को लेकर आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है और उन्होंने सरकार के इस नए अध्यादेश का विरोध करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन

मंडी परिषद अधिनियम में मुफ्त व्यापार से जहां बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों को फायदा हुआ है वहीं परिषद में शुल्क जमा कर दुकानों को एलाट कराने वाले आढ़तियों का कारोबार मंदा हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मंडी में किसानों से सब्जी व गेहूं, चावल खरीदने वाले व्यापारियों को दो प्रतिशत मंडी शुल्क और आधा प्रतिशत विकास शुल्क जमा करना पड़ रहा है। ऐसे में व्यापारियों ने मंडी से खरीदारी करना बंद कर दिया है।
सरकार की इस नई व्यवस्था से करोड़ों रुपये का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। बिंदकी मंडी की बात की जाए तो यहां आढ़ती हर महीने डेढ़ करोड़ का राजस्व जमा करते थे। मुफ्त व्यापार नियम लागू होने के बाद महीने मेेें मात्र 25 से 30 लाख रुपये जमा हो रहे हैं।
गल्ला कारोबारी पंकज गुप्ता ने बताया कि मुफ्त व्यापार जबसे लागू हुआ है मंडी में आवक कम हो गई है। बाहर से खरीदारी करने में व्यापारियों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है।
यहां से किसानों के उत्पाद खरीदने में ढाई प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। इससे व्यापारियों ने मंडी आना कम कर दिया है।
बिंदकी मंडी के आढ़ती योगेंद्र सिंह ने कहा कि पहले मंडी में रोज 300 क्विंटल से अधिक की रोज खरीदारी होती थी।
मंडी के बाहर मुफ्त व्यापार जबसे किया गया है। मात्र 100 से 150 क्विंटल की आवक बची है। किसानों के घर में ही जाकर व्यापारी खरीद ले रहे हैं।
गल्ला व्यापारी संतोष कुमार का कहना है कि मंडी से अन्य प्रदेश में माल भेजने में केंद्र सरकार ने तो सभी टैक्स माफ कर दिए, लेकिन प्रदेश सरकार ने मंडी के अंदर से व्यापार पर टैक्स में बदलाव नहीं किया है।
वहां पहले की तरह ही शुल्क देना पड़ रहा है। इससे बाहरी व्यापारी बाहर से ही खरीदारी करते हैं।
गल्ला आढ़ती अनुपम गुप्ता का कहना है कि हथगाम, असोथर, थरियांव, धाता, छिवलहा से व्यापारी खरीदारी करते हैं।
उनको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। मंडी में लाखों रुपये की दुकान लेने के बाद पहले की तरह ही टैक्स देना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार को इसे खत्म करना चाहिए।

मंडी सचिव उमेश कुमार अवस्थी ने बताया कि जबसे मुफ्त व्यापार लागू हुआ है। मंडी के राजस्व में 80 फीसदी कमी आई है। ज्यादातर व्यापारी मंडी के बार से अपना कारोबार करने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed