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Fatehpur News: 15 माह में बनकर तैयार होने वाला सीबीजी प्लांट अधर में अटका

Sat, 19 Apr 2025 12:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Sat, 19 Apr 2025 12:28 AM IST
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The CBG plant which was to be completed in 15 months is stuck in limbo
फतेहपुर। जिले में पहला कंप्रेस्ड बायो गैस संयंत्र (सीबीजी) 15 माह में तैयार होकर संचालित होना था। लेकिन समय-सीमा खत्म होने के बाद भी संयंत्र की नींव तक नहीं रखी जा सकी है, जबकि चांदपुर तृतीय (चांदपुर दक्षिण की ओर नोन नदी के पास) में जमीन आवंटित कर दी गई। संयंत्र के संचालन होने से हर दिन पराली और गोबर से 10 मीट्रिक टन गैस (सीएनजी के रूप में ईंधन) का उत्पादन होगा। इससे स्वच्छ व हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने 27 जनवरी 2024 को बदायूं से फतेहपुर समेत 8 जिलों में सीबीजी संयंत्र स्थापित करने का वर्चुअल शिलान्यास किया था। उसी समय चांदपुर के दक्षिण दिशा में नोन नदी के पास 6.57 हेक्टेयर जमीन (16.23 एकड़) पर संयंत्र संचालन की जिम्मेदारी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड को सौंपी गई। पेट्रोनेट ने कागजी प्रक्रिया शुरू की। इसमें पर्यावरण समेत कई दस्तावेजी कामों को पूरा भी कर लिया गया। इसमें एक साल बाद भी कई कागजी कार्य बाकी हैं। इसके चलते 15 महीने बीतने के बाद भी संयंत्र स्थापित करने का काम शुरू नहीं हो सका है। इससे जैविक ईंधन उत्पादन में देरी हो रही है, वहीं स्थानीय लोगों के रोजगार की आस भी धुंधली पड़ रही है। हालांकि संचालनकर्ता अब काम जल्द शुरू होने का दावा कर रहे हैं।
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हर दिन 120 मीट्रिक टन पराली की खपत
पर्यावरण को प्रदूषण से रोकने की कवायद उप्र राज्य जैव ऊर्जा (बायो गैस) नीति–2022 के तहत की जा रही है। इसी नीति के तहत जिले में सीबीजी संयंत्र लगाने की योजना बनाई गई। इसमें हर दिन 120 मीट्रिक टन पराली की खपत होगी। वहीं गैस के उत्पादन में गोबर का भी प्रयोग किया जाएगा। प्लांट से बनने वाली गैस का उपयोग वाहनों के ईंधन के रूप में होगा। ईंधन बनाने के बाद बचे अवशेष (गंदगी) से जैविक खाद बनाई जाएगी। कंप्रेस्ड बायो गैस संयंत्र की लागत लगभग सौ करोड़ है।
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सौ से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार
- संयंत्र निर्माण से लेकर संचालन तक सौ से अधिक लोग रोजगार से जुड़ेंगे। वहीं किसानों से पराली व गोबर तय दाम में खरीदा जाएगा। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी। वहीं पराली जलने में कमी आने से पर्यावरण में प्रदूषण की कमी आएगी। इस संयंत्र का उद्देश्य अधिक से अधिक जैविक उत्पादों से ईंधन का निर्माण करना है।


- संयंत्र में किसानों से पराली व गोबर खरीदकर ईंधन तैयार किया जाएगा। वेस्टेज से जैविक खाद बनाई जाएगी। अभी कई नियम और कानून के पालन के काम शेष है। उनको जल्द पूरा कराया जा रहा है। काम जल्दी ही चालू होने की उम्मीद है।
पराग दांडगे, परियोजना प्रमुख, पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड
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