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मिट्टी की सेहत ढीली, जिले में निचले स्तर पर जिंक व सल्फर
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फतेहपुर। मॉडल गांव में कृषि विभाग ने बुधवार को शिविर लगाया और किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की। कुल 4562 किसानों के खेत का नमूना लिया गया। मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्व में जिंक व सल्फर की मात्रा निचले स्तर पर पहुंच गई है। फास्फोरस मध्यम और पोटाश की मात्रा पर्याप्त है।
रासायनिक खाद के अधिक उपयोग से खेत के मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। इसको सुधारने के लिए कृषि विभाग की टीम शिविर लगाकर किसानों को जागरूक कर रही है। उप कृषि निदेशक अनिल कुमार पाठक ने बताया कि असोथर ब्लाक के बेरुई गांव में 371 किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की गई है। बहुआ के कोरारी गांव से 263 किसानों के खेत, हसवा ब्लाक के दनियालपुर गांव मं 494 किसानों के खेत की मिट्टी जांच कराई गई है। भिटौरा के नरौली बुजुर्ग से 595 किसानों के खेत, तेलियानी के सरांय सहिजादा से 303 किसान, अमौली के धमिना खुर्द से 413 किसान, खजुहा के उरदौली गांव से 239 किसान, गोपालपुर अढ़ेना से 404 किसान, देवमई ब्लाक के टिकरा गांव में 209 किसानों के खेत से, ऐरायां के ओरम्हा गांव में 546 किसानों के खेत से, विजयीपुर ब्लाक के जगतपुर गांव से 128 किसानों ने अपने खेत की मिट्टी जांच कराई है। हथगाम के चंपतपुर से 250 और धाता के बम्हरौली गांव में 347 किसानों के खेत की मिट्टी जांच की गई है। मृदा लैब प्रभारी प्रेमदान पाल ने बताया कि असोथर और भिटौरा ब्लाक में पोटाश की मात्रा कम होने लगी है। जिंक, सल्फर और फास्फोरस को सही मात्रा में बनाए रखने के लिए रासायनिक खाद का उपयोग बंद करना होगा। हरी खाद, गोबर की खाद इस्तेमाल करने से मिट्टी में फिर से उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी।
जिंक, सल्फर, फास्फोरस व पोटाश की कमी से यह होता नुकसान
- जिंक की कमी होने पर पौधे में पीलापन आने लगता है। यह पर्याप्त होने पर पीलापन या कालापन नहीं आने देता।
- सल्फर की कमी होने पर पौधे की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) गड़बड़ हो जाती है। इसके पर्याप्त रहने पर रोग करीब नहीं आते।
- फास्फोरस की कमी होने पर पौध की जड़ें कमजोरी होने लगती हैं। उपज की गुणवत्ता प्रभावित होती है। दानों में पतलापन आ जाता है।
- पोटाश की कमी होने पर पौध की चमक गायब हो जाती है। पर्याप्त होने पर फसल दूर से ही चमक लिए होती है।
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रासायनिक खाद के अधिक उपयोग से खेत के मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। इसको सुधारने के लिए कृषि विभाग की टीम शिविर लगाकर किसानों को जागरूक कर रही है। उप कृषि निदेशक अनिल कुमार पाठक ने बताया कि असोथर ब्लाक के बेरुई गांव में 371 किसानों के खेत की मिट्टी की जांच की गई है। बहुआ के कोरारी गांव से 263 किसानों के खेत, हसवा ब्लाक के दनियालपुर गांव मं 494 किसानों के खेत की मिट्टी जांच कराई गई है। भिटौरा के नरौली बुजुर्ग से 595 किसानों के खेत, तेलियानी के सरांय सहिजादा से 303 किसान, अमौली के धमिना खुर्द से 413 किसान, खजुहा के उरदौली गांव से 239 किसान, गोपालपुर अढ़ेना से 404 किसान, देवमई ब्लाक के टिकरा गांव में 209 किसानों के खेत से, ऐरायां के ओरम्हा गांव में 546 किसानों के खेत से, विजयीपुर ब्लाक के जगतपुर गांव से 128 किसानों ने अपने खेत की मिट्टी जांच कराई है। हथगाम के चंपतपुर से 250 और धाता के बम्हरौली गांव में 347 किसानों के खेत की मिट्टी जांच की गई है। मृदा लैब प्रभारी प्रेमदान पाल ने बताया कि असोथर और भिटौरा ब्लाक में पोटाश की मात्रा कम होने लगी है। जिंक, सल्फर और फास्फोरस को सही मात्रा में बनाए रखने के लिए रासायनिक खाद का उपयोग बंद करना होगा। हरी खाद, गोबर की खाद इस्तेमाल करने से मिट्टी में फिर से उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी।
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जिंक, सल्फर, फास्फोरस व पोटाश की कमी से यह होता नुकसान
- जिंक की कमी होने पर पौधे में पीलापन आने लगता है। यह पर्याप्त होने पर पीलापन या कालापन नहीं आने देता।
- सल्फर की कमी होने पर पौधे की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) गड़बड़ हो जाती है। इसके पर्याप्त रहने पर रोग करीब नहीं आते।
- फास्फोरस की कमी होने पर पौध की जड़ें कमजोरी होने लगती हैं। उपज की गुणवत्ता प्रभावित होती है। दानों में पतलापन आ जाता है।
- पोटाश की कमी होने पर पौध की चमक गायब हो जाती है। पर्याप्त होने पर फसल दूर से ही चमक लिए होती है।
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