{"_id":"68bb3007df3a3a123e089f17","slug":"shivprakash-became-the-protector-of-the-border-and-the-patron-of-education-in-the-village-fatehpur-news-c-217-1-sknp1021-140232-2025-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: सीमा के रक्षक, गांव में शिक्षा के संरक्षक बने शिवप्रकाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: सीमा के रक्षक, गांव में शिक्षा के संरक्षक बने शिवप्रकाश
विज्ञापन
फोटो-21-बच्चों को पढा़ते शिवप्रकाश शुक्ला। संवाद
अमौली। देश की सरहदों पर तैनात रहकर जहां एक ओर वह सुरक्षा का जिम्मा निभा रहे हैं, वहीं छुट्टी में घर लौटते ही बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत करने लगते हैं। जी हां, यह जज्बा है कि बीएसएफ में तैनात जवान शिवप्रकाश शुक्ला का। जो जिले के नसेनिया गांव में रहते हैं। उन्होंने अपनी निशुल्क कोचिंग को जवान की पाठशाला नाम दे रखा है।
वर्ष 2011 में बीएसएफ में हवलदार के पद पर भर्ती हुए शिवप्रकाश जब भी छुट्टी पर घर आते हैं, सबसे पहले बच्चों के अभिभावकों को सूचना देते हैं। ताकि बच्चों को पढ़ा सकें। बच्चे भी बेसब्री से उनका इंतजार करते हैं, क्योंकि ये छुट्टियां उनके लिए किसी कोचिंग क्लास से कम नहीं होतीं।
नसेनिया, देवरी और डिघरुवा के बच्चों को उनकी सुविधानुसार सुबह और शाम दो-दो घंटे अंग्रेजी, गणित सहित अन्य विषयों की निशुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं। अंग्रेजी, गणित सहित कई विषयों की निशुल्क शिक्षा देकर वे बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
विज्ञापन
इतना ही नहीं गांव की मेरिट सूची में आने वाले होनहार छात्रों को शिवप्रकाश नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी करते हैं। इसमें प्रथम छात्र को 5100, द्वितीय को 3100 और तृतीय को 2100 रुपये देते हैं।
शिवप्रकाश कहते हैं है कि जिन बच्चों को गरीबी के कारण अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती उनके लिए कुछ कर पाना ही मेरे जीवन का असली उद्देश्य है। छुट्टियां कब बीत जाती हैं, पता ही नहीं चलता।
सेना की नौकरी पूरी करने के बाद शिवप्रकाश इस पाठशाला को और भी बड़ा रूप देना चाहते हैं। ताकि यह पहल सिर्फ गांव तक सीमित न रह जाए।
विज्ञापन
वर्ष 2011 में बीएसएफ में हवलदार के पद पर भर्ती हुए शिवप्रकाश जब भी छुट्टी पर घर आते हैं, सबसे पहले बच्चों के अभिभावकों को सूचना देते हैं। ताकि बच्चों को पढ़ा सकें। बच्चे भी बेसब्री से उनका इंतजार करते हैं, क्योंकि ये छुट्टियां उनके लिए किसी कोचिंग क्लास से कम नहीं होतीं।
विज्ञापन
नसेनिया, देवरी और डिघरुवा के बच्चों को उनकी सुविधानुसार सुबह और शाम दो-दो घंटे अंग्रेजी, गणित सहित अन्य विषयों की निशुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं। अंग्रेजी, गणित सहित कई विषयों की निशुल्क शिक्षा देकर वे बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।
विज्ञापन
इतना ही नहीं गांव की मेरिट सूची में आने वाले होनहार छात्रों को शिवप्रकाश नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी करते हैं। इसमें प्रथम छात्र को 5100, द्वितीय को 3100 और तृतीय को 2100 रुपये देते हैं।
शिवप्रकाश कहते हैं है कि जिन बच्चों को गरीबी के कारण अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती उनके लिए कुछ कर पाना ही मेरे जीवन का असली उद्देश्य है। छुट्टियां कब बीत जाती हैं, पता ही नहीं चलता।
सेना की नौकरी पूरी करने के बाद शिवप्रकाश इस पाठशाला को और भी बड़ा रूप देना चाहते हैं। ताकि यह पहल सिर्फ गांव तक सीमित न रह जाए।