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Fatehpur News: सदर नगर पालिका ने वाहनों की मरम्मत में खर्च किए 33 लाख
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फतेहपुर। सदर नगर पालिका परिषद ने सरकारी वाहनों की मरम्मत के नाम पर 33 लाख 18 हजार रुपये खर्च कर दिए। जब सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जरिये ब्योरा मांगा तो जवाब में अधूरी जानकारी दी गई।
नगर पालिका ने आरटीआई में कुल खर्च तो बता दिया मगर यह नहीं बताया कि कौन से वाहन कब और कहां सुधारे गए हैं। किस एजेंसी ने काम किया और बिलों की प्रतियां कहां हैं। इससे नगर पालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठ गए हैं।
जिले की युवा विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने आरटीआई दायर कर सदर नगर पालिका से सूचना मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि स्वास्थ्य विभाग में कितनी गाड़ियां हैं ईंधन कहां से लिया जाता है। मरम्मत किस एजेंसी से कराई जाती है।
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जवाब में बताया गया कि ईंधन एसएमएस पेट्रोलियम, सनगांव मोड़ और रामा ऑटो केयर, श्याम नगर उधन्नापुर से लिया जाता है। मरम्मत का कार्य साईं कृपा इंटरप्राइजेज असोथर और भारत ऑटोमोबाइल की ओर से किया जाता है।
सूचना में किसी वाहन का नंबर, मरम्मत की तारीख, स्थान या बिल की प्रति शामिल नहीं की गई। ये सभी विवरण आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) के तहत अनिवार्य हैं।
जानकारों का कहना है कि नगर पालिका में महज आठ से 10 वाहन हैं। ऐसे में प्रति वाहन तीन से चार लाख रुपये का खर्च संदिग्ध प्रतीत होता है। अधूरी सूचना मिलने पर आवेदक ने अब प्रथम अपील दाखिल की है ताकि यह पता चल सके कि जनता के टैक्स का पैसा आखिर कहां गया।
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नगर पालिका ने आरटीआई में कुल खर्च तो बता दिया मगर यह नहीं बताया कि कौन से वाहन कब और कहां सुधारे गए हैं। किस एजेंसी ने काम किया और बिलों की प्रतियां कहां हैं। इससे नगर पालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठ गए हैं।
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जिले की युवा विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने आरटीआई दायर कर सदर नगर पालिका से सूचना मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि स्वास्थ्य विभाग में कितनी गाड़ियां हैं ईंधन कहां से लिया जाता है। मरम्मत किस एजेंसी से कराई जाती है।
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जवाब में बताया गया कि ईंधन एसएमएस पेट्रोलियम, सनगांव मोड़ और रामा ऑटो केयर, श्याम नगर उधन्नापुर से लिया जाता है। मरम्मत का कार्य साईं कृपा इंटरप्राइजेज असोथर और भारत ऑटोमोबाइल की ओर से किया जाता है।
सूचना में किसी वाहन का नंबर, मरम्मत की तारीख, स्थान या बिल की प्रति शामिल नहीं की गई। ये सभी विवरण आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) के तहत अनिवार्य हैं।
जानकारों का कहना है कि नगर पालिका में महज आठ से 10 वाहन हैं। ऐसे में प्रति वाहन तीन से चार लाख रुपये का खर्च संदिग्ध प्रतीत होता है। अधूरी सूचना मिलने पर आवेदक ने अब प्रथम अपील दाखिल की है ताकि यह पता चल सके कि जनता के टैक्स का पैसा आखिर कहां गया।