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मौरंग ढुलाई में कीचड़ से लबालब हुई मझगवां की सड़क
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गीली मौरंग के परिवहन के कारण दलदल बनी मझगवां गांव की सड़क
- फोटो : FATEHPUR
किशनपुर। जलधारा के नजदीक मौरंग निकालने के कारण एक ओर जहां नदी के स्वरूप पर बदलाव होने की आशंका बनी हुई है। वहीं इस गीली मौरंग ने सड़क का हुलिया तो बिगाड़ दिया है।
बात हो रही है किशनपुर के मझगवां गांव की। जहां दिन रात ढुलाई में लगे वाहनों से गिरने वाले पानी ने सड़क को दलदल में बदल दिया है। सरकार को राजस्व प्राप्त हो रहा है और गांव के लोगों को उसके बदले नरक जैसी जिंदगी।
किशनपुर के मझगवां मौरंग खदान से रात-दिन मौरंग से लदी ओवरलोड गाड़ियां निकल रही है। जिन वाहनों से मौरंग का परिवहन हो रहा है। उन वाहनों की ट्रालियों से पानी गिरता रहता है।
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ग्रामीणों की मानें तो खनन के बाद गीली मौरंग सीधे वाहनों पर लोड कर दी जाती है। ऐसे में वाहन के निकलने पर पानी नीचे से गिरता रहता है। मजबूरन ग्रामीण इस कीचड़ से भरी सड़क से निकलते हैं।
हैरत की बात ये है कि खदान संचालन से पहले संचालकों द्वारा खनिज न्यास के तहत गांव के विकास के लिए बड़े-बड़े वायदों का पुलिंदा प्रशासन को सौंपा जाता है।
मगर एक बार खनन व परिवहन शुरू हुआ तो गांव के लोग नरक जैसी जिंदगी जीने को विवश हो जाते है। इस संबंध में खनन अधिकारी अजीत पांडेय का कहना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रोड खराब हो रही है तो उसे घाट संचालक बनवाएंगे।
यदि सड़क खराब होने से खनन प्रभावित हो रहा है तभी घाट संचालक रोड बनवाते हैं। अन्यथा इसका खनन विभाग या घाट संचालक से कोई लेनादेना नहीं होता।
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बात हो रही है किशनपुर के मझगवां गांव की। जहां दिन रात ढुलाई में लगे वाहनों से गिरने वाले पानी ने सड़क को दलदल में बदल दिया है। सरकार को राजस्व प्राप्त हो रहा है और गांव के लोगों को उसके बदले नरक जैसी जिंदगी।
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किशनपुर के मझगवां मौरंग खदान से रात-दिन मौरंग से लदी ओवरलोड गाड़ियां निकल रही है। जिन वाहनों से मौरंग का परिवहन हो रहा है। उन वाहनों की ट्रालियों से पानी गिरता रहता है।
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ग्रामीणों की मानें तो खनन के बाद गीली मौरंग सीधे वाहनों पर लोड कर दी जाती है। ऐसे में वाहन के निकलने पर पानी नीचे से गिरता रहता है। मजबूरन ग्रामीण इस कीचड़ से भरी सड़क से निकलते हैं।
हैरत की बात ये है कि खदान संचालन से पहले संचालकों द्वारा खनिज न्यास के तहत गांव के विकास के लिए बड़े-बड़े वायदों का पुलिंदा प्रशासन को सौंपा जाता है।
मगर एक बार खनन व परिवहन शुरू हुआ तो गांव के लोग नरक जैसी जिंदगी जीने को विवश हो जाते है। इस संबंध में खनन अधिकारी अजीत पांडेय का कहना है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि रोड खराब हो रही है तो उसे घाट संचालक बनवाएंगे।
यदि सड़क खराब होने से खनन प्रभावित हो रहा है तभी घाट संचालक रोड बनवाते हैं। अन्यथा इसका खनन विभाग या घाट संचालक से कोई लेनादेना नहीं होता।