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Fatehpur News: गंगा-पांडु नदी का बढ़ता जलस्तर, 16 गांवों पर बाढ़ का खतरा
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फोटो-49-गंगा और पांडु नदी में बढ़ते जलस्तर से चिंता में बैठा किसान। संवाद
चौडगरा। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से मलवां विकासखंड की अभयपुर और आशापुर ग्राम सभा के पास आसपास के 16 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। वहीं पांडु नदी भी उफान पर है। इससे किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटे तक जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो नदी का पानी खेतों और निचले इलाकों में फैल जाएगा।
बाढ़ की आशंका से सबसे अधिक प्रभावित किसान हैं। नदी किनारे स्थित खेतों में लगी खरीफ और सब्जियों की फसलें डूबने के कगार पर हैं। बड़ा खेड़ा गांव के किसान ननकू निषाद ने बताया कि खेतों में पानी भरने से महीनों की मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। हर वर्ष बाढ़ से फसलें नष्ट होने के बाद बैंक का कर्ज, बिजली बिल और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो जाता है।
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किसानों ने बताया कि खेतों में लगी भिंडी, लोबिया, करेला, परवल, मूली, पालक, धनिया और गोभी जैसी सब्जियां बर्बादी के मुहाने पर हैं। इसके अलावा गुलदाउदी, जाफरी और विष्णुकांता जैसे फूलों की खेती भी पानी बढ़ने पर पूरी तरह नष्ट हो सकती है।
खेत जलमग्न होने से पशुओं के लिए हरे चारे का भी गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बढ़ते जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने की मांग की है।
प्रभावित 16 गांवों के लोगों ने संभावित बाढ़ को देखते हुए राहत एवं बचाव की तैयारियां तत्काल शुरू करने, संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कराने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए तो जन-धन की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बाढ़ प्रबंधन अधिकारी कृष्णकांत ने बताया कि शुक्रवार को गंगा नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। सुबह आठ बजे जलस्तर 100.13 मीटर था जो शाम चार बजे घटकर 100.11 मीटर रह गया। वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान 100.86 मीटर से नीचे है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
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बाढ़ की आशंका से सबसे अधिक प्रभावित किसान हैं। नदी किनारे स्थित खेतों में लगी खरीफ और सब्जियों की फसलें डूबने के कगार पर हैं। बड़ा खेड़ा गांव के किसान ननकू निषाद ने बताया कि खेतों में पानी भरने से महीनों की मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
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उन्होंने कहा कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। हर वर्ष बाढ़ से फसलें नष्ट होने के बाद बैंक का कर्ज, बिजली बिल और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो जाता है।
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किसानों ने बताया कि खेतों में लगी भिंडी, लोबिया, करेला, परवल, मूली, पालक, धनिया और गोभी जैसी सब्जियां बर्बादी के मुहाने पर हैं। इसके अलावा गुलदाउदी, जाफरी और विष्णुकांता जैसे फूलों की खेती भी पानी बढ़ने पर पूरी तरह नष्ट हो सकती है।
खेत जलमग्न होने से पशुओं के लिए हरे चारे का भी गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बढ़ते जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने की मांग की है।
प्रभावित 16 गांवों के लोगों ने संभावित बाढ़ को देखते हुए राहत एवं बचाव की तैयारियां तत्काल शुरू करने, संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कराने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए तो जन-धन की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बाढ़ प्रबंधन अधिकारी कृष्णकांत ने बताया कि शुक्रवार को गंगा नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। सुबह आठ बजे जलस्तर 100.13 मीटर था जो शाम चार बजे घटकर 100.11 मीटर रह गया। वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान 100.86 मीटर से नीचे है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

फोटो-49-गंगा और पांडु नदी में बढ़ते जलस्तर से चिंता में बैठा किसान। संवाद