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Fatehpur News: निजी स्कूलों की किताबों, यूनिफॉर्म में हर साल 10 से 12 हजार हो रहे खर्च

Thu, 04 Apr 2024 12:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2024 12:08 AM IST
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Private schools spend Rs 10 to 12 thousand every year on books and uniforms.
फतेहपुर। निजी स्कूलों का सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया है। अभिभावक कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म के साथ अन्य शिक्षण सामग्री खरीदने में लगे हैं। अभिभावकों की भीड़ कॉपी-किताब से लेकर यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दुकानों में जुटना शुरू हो गई है।
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निजी स्कूलों में पाठ्यक्रम के अलावा कुछ खास प्रकाशकों की किताबें शामिल हैं। यह किताबें स्कूलों से निर्धारित की हुईं कुछ ही दुकानों पर मिल रही हैं। स्कूलों को कमीशन देने के लिए दुकानदार अभिभावकों से मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। एक बच्चे की कॉपी-किताब, शिक्षण सामग्री के साथ यूनिफॉर्म खरीदने मेें 10 से 12 हजार की धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। नियमित रूप से पढ़ाई करने वाले बच्चों को अपने ही स्कूलों में फिर से प्रवेश लेना पड़ रहा है। नए प्रवेश के नाम पर फिर से मोटी प्रवेश फीस वसूली जा रही है, जिससे अभिभावकों का अप्रैल का बजट बिगड़ गया है।
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एक बच्चे की कक्षा छह की कॉपी-किताबों का सेट साढ़े छह हजार रुपये में मिल रहा है। इसके अलावा चार से पांच हजार रुपये दो सेट यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, टाई, स्टेशनरी, बैग खरीदने में खर्च हो रहे हैं। बच्चों का लंच बॉक्स, पानी की बोतल भी सात से 800 रुपये में मिल रही है।
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सीबीएसई की गाइड लाइन में स्पष्ट है कि पहली व दूसरी कक्षा में भाषा और गणित के अलावा अन्य किसी विषय की किताब नहीं चलेगी। तीसरी से पांचवीं तक इन दो विषयों के अलावा पर्यावरण विषय की किताब शामिल की जाएगी। जो विषय एनसीईआरटी ने तय किया है, उनसे अलग कोई किताब नहीं चलाई जाएगी। केंद्रीय विद्यालय में पहली से पांचवीं तक अधिकतम चार किताबेंं ही चलती हैं। वह भी सभी एनसीईआरटी से प्रकाशित होती हैं। निजी स्कूलों में पांचवीं तक आठ से 10 किताबें चलाई जा रही हैं। यह सभी किताबें निजी प्रकाशकों की होती हैं। इससे बच्चों के बस्ते का बोझ बढ़ रहा है।
सीबीएसई के नियमों की अनदेखी की जा रही है। नियम है कि एनसीईआरटी के अलावा कोई दूसरी किताब न चलाई जाएं। इसके बावजूद स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें चला रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग का इन स्कूलों में नियंत्रण न होने के कारण मनमाने तरीके से निजी प्रकाशकों की किताबें चलाई जा रही हैं।
नई तहसील के समीप रहने वाले फूल सिंह का कहना है कि निजी स्कूलों की महंगी किताबों के साथ अन्य सामग्री खरीदने से अप्रैल का बजट बिगड़ गया है। यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि खरीदने में 10 हजार खर्च हो चुके हैं। अभी पानी की बोतल और लंच बॉक्स खरीदना शेष है।
मुराइटोला मोहल्ला निवासी बब्लू मौर्या का कहना है कि अब बच्चों का पढ़ाना कठिन होता जा रहा है। जाने माने स्कूल निरंकुश हो चुके हैं। हर साल बच्चे के प्रवेश शुल्क में पांच से 10 हजार वसूल रहे हैं। बस्ते के साथ अन्य सामान खरीदने में 10,500 पहले ही खर्च हो चुके हैं।

सभी सीबीएसई स्कूल गाइडलाइन का पालन करें। गाइडलाइन के तहत ही किताबें चलाएं। निरीक्षण में अगर मानक के विपरीत किताबें पकड़ी गईं, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ लिखा-पढ़ी की जाएगी। -शिवपूजन द्विवेदी, डीआईओएस
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