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कायाकल्प योजना बनी कंपोजिट ग्रांट खर्च करने में बाधक
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फतेहपुर। परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था सुधार के लिए भेजी गई कंपोजिट ग्रांट खर्च करने में कायाकल्प योजना बाधक बन रही है। अभी तक जिले के 2650 स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट की करीब आठ करोड़ रुपये की धनराशि डंप है। शुक्रवार को बीएसए ने बीईओ को पत्र भेजकर मार्च से पहले ग्रांट खर्च कराने के निर्देश दिए हैं।
परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प कराने का जिम्मा शासन स्तर से ग्राम पंचायतों को दिया गया है। सभी स्कूलों में आवश्यकता अनुसार ग्राम पंचायतों को बाउंड्री, हैंडपंप मरम्मत, शौचालय मरम्मत या निर्माण, टायल्स लगाने के साथ रंगाई-पुताई का काम कराने का प्रावधान है। काफी स्कूलों में यह काम कराए भी जा चुके हैं, तो कई स्कूलों में काम चल रहा है। ऐसे में कंपोजिट ग्रांट अभी तक स्कूलों में जस की तस हालत में डंप है। शासन के तय मानक न्यूनतम शून्य से 15 बच्चों पर 12500 रुपये और अधिकतम 1000 छात्र संख्या पर एक लाख रुपये कंपोजिट ग्रांट स्कूलों में भेजी गई है। अधिकांश स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत काम करानेे के प्रस्ताव तैयार हैं। ऐसे में कंपोजिट ग्रांट की धनराशि खर्च करने में बाधा पैदा हो रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक निर्माण एमपी वर्मा ने बताया कि कंपोजिट ग्रांट बहुत ही कम स्कूलों में खर्च होने की उम्मीद है। कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों की मरम्मत हो रही है या फिर प्रस्तावित है। ऐसे में बार-बार निर्देश के बावजूद स्कूलों ने कंपोजिट ग्रांट खर्च नहीं किया है। गुरुवार को एक बार फिर से सभी बीईओ को कंपोजिट ग्रांट मार्च तक खर्च कराने के लिए पत्र जारी किया गया है।
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परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प कराने का जिम्मा शासन स्तर से ग्राम पंचायतों को दिया गया है। सभी स्कूलों में आवश्यकता अनुसार ग्राम पंचायतों को बाउंड्री, हैंडपंप मरम्मत, शौचालय मरम्मत या निर्माण, टायल्स लगाने के साथ रंगाई-पुताई का काम कराने का प्रावधान है। काफी स्कूलों में यह काम कराए भी जा चुके हैं, तो कई स्कूलों में काम चल रहा है। ऐसे में कंपोजिट ग्रांट अभी तक स्कूलों में जस की तस हालत में डंप है। शासन के तय मानक न्यूनतम शून्य से 15 बच्चों पर 12500 रुपये और अधिकतम 1000 छात्र संख्या पर एक लाख रुपये कंपोजिट ग्रांट स्कूलों में भेजी गई है। अधिकांश स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत काम करानेे के प्रस्ताव तैयार हैं। ऐसे में कंपोजिट ग्रांट की धनराशि खर्च करने में बाधा पैदा हो रही है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक निर्माण एमपी वर्मा ने बताया कि कंपोजिट ग्रांट बहुत ही कम स्कूलों में खर्च होने की उम्मीद है। कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों की मरम्मत हो रही है या फिर प्रस्तावित है। ऐसे में बार-बार निर्देश के बावजूद स्कूलों ने कंपोजिट ग्रांट खर्च नहीं किया है। गुरुवार को एक बार फिर से सभी बीईओ को कंपोजिट ग्रांट मार्च तक खर्च कराने के लिए पत्र जारी किया गया है।
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