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किसानों को ड्रिप से केला की सिंचाई करने की सलाह
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फतेहपुर। उद्यान विभाग की टीम ने भिटौरा ब्लाक में टीशू केला की फसलों का सत्यापन किया। फसलों की सिंचाई में ड्रिप लगाने और सूक्ष्म पोषकतत्व ड्रिप सिंचाई से फसलों को देने की सलाह दी। साथ ही स्प्रिंकलर(उपकरण) लगाने के लिए प्रेरित किया।
टीशू केला की पौध से खेती करने वाले किसानों को उद्यान विभाग से अनुदान दिया जाता है। इसके लिए चयनित किसानों की फसलों का उद्यान विभाग की टीम सत्यापन करती है। सत्यापन रिपोर्ट के बाद किसानों के बैंक खाता में अनुदान की धनराशि भेजी जाएगी। इसके लिए उद्यान विभाग के योजना प्रभारी केपी सिंह व भिटौरा ब्लाक प्रभारी शब्बीर हुसैन ने ब्लाक क्षेत्र के चंदीपुर, धनसेनपुर गांव में किसानों की फसलों का सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की। चंदीपुर के किसान संत शरन ने एक हेक्टेयर में टीशू केला की फसल लगाई है। इन्होंने केला की फसल में ड्रिप से सिंचाई की व्यवस्था की है। इसी से सूक्ष्म पोषकतत्वों की कमी का पूरा करने के लिए उर्वरक का जैविक दवाओं का छिड़काव होता है। फिर असनी के मजरा धनसेनपुर गांव में किसान दिलीप, मुकेश और कृष्णा देवी के खेत में जाकर केला की फसल देखी। योजना प्रभारी केपी सिंह ने किसानों से कहा कि केला की फसल का ड्रिप से सिंचाई करें। इससे एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच में करीब छह फुट जमीन पड़ी होती है। उसमें सिंचाई का पानी नहीं जाता है। सिर्फ केला की पौध को पानी मिलता है। जो शेष जमीन पड़ी रहेगी, वहां पानी नहीं पहुंचने से खरपतवार भी नहीं होगा। साथ ही पानी की बचत होगी।
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टीशू केला की पौध से खेती करने वाले किसानों को उद्यान विभाग से अनुदान दिया जाता है। इसके लिए चयनित किसानों की फसलों का उद्यान विभाग की टीम सत्यापन करती है। सत्यापन रिपोर्ट के बाद किसानों के बैंक खाता में अनुदान की धनराशि भेजी जाएगी। इसके लिए उद्यान विभाग के योजना प्रभारी केपी सिंह व भिटौरा ब्लाक प्रभारी शब्बीर हुसैन ने ब्लाक क्षेत्र के चंदीपुर, धनसेनपुर गांव में किसानों की फसलों का सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की। चंदीपुर के किसान संत शरन ने एक हेक्टेयर में टीशू केला की फसल लगाई है। इन्होंने केला की फसल में ड्रिप से सिंचाई की व्यवस्था की है। इसी से सूक्ष्म पोषकतत्वों की कमी का पूरा करने के लिए उर्वरक का जैविक दवाओं का छिड़काव होता है। फिर असनी के मजरा धनसेनपुर गांव में किसान दिलीप, मुकेश और कृष्णा देवी के खेत में जाकर केला की फसल देखी। योजना प्रभारी केपी सिंह ने किसानों से कहा कि केला की फसल का ड्रिप से सिंचाई करें। इससे एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच में करीब छह फुट जमीन पड़ी होती है। उसमें सिंचाई का पानी नहीं जाता है। सिर्फ केला की पौध को पानी मिलता है। जो शेष जमीन पड़ी रहेगी, वहां पानी नहीं पहुंचने से खरपतवार भी नहीं होगा। साथ ही पानी की बचत होगी।
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