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किसानों की आखिरी उम्मीद पर भी फिरा पानी
ब्यूरो,अमर उजाला फतेहपुर
Updated Tue, 14 Apr 2015 12:03 AM IST
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किसानों की अंतिम उम्मीद पर भी पानी फिर गया है। सोमवार को हुई बारिश ने किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा है। इस बारिश से कटी फसल के साथ ही खेत में खड़ी फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। अब अनाज के साथ ही भूसे का भी संकट खड़ा हो गया है।
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रविवार की शाम और सोमवार सुबह हुई झमाझम बारिश और तेज हवा ने किसानों की बची-खुची फसलों को भी तहस नहस कर दिया।
तमाम किसानों की फसलें तेज हवा में उड़ गईं। फसल भीगने के साथ खलिहानों में पानी भर गया है। गेहूं की कटी और खड़ी दोनों फसलें पूरी तरह चौपट हो गई।
अरहर के खेतों में पानी भर जाने से उनके गिरने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों ने बताया कि एक हेक्टेयर में आमतौर पर लगभग आठ क्विंटल गेहूं पैदा हो रहा है। जबकि बारिश न होती तो एक हेक्टेयर में लगभग 48 से 50 क्विंटल गेहूं पैदा होता। जो बची खुची फसल है, उसमें थ्रेसर से मड़ाई कराने में भूसा काला निकल रहा है। इसे पशु भी नहीं खा रहे हैं। अब तो भूसा बेचना भी मुश्किल है। रविवार और सोमवार की बारिश से सदर, बिंदकी और खागा तहसील के किसानों की कमर तोड़ दी है। आखिरी उम्मीद पर भी इस बारिश ने पानी फेर दिया है।
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किसानों ने बया किया दर्द
सातों के किसान रामसुमेर सिंह चंदेल ने बताया कि पिछले सोमवार से अच्छी धूप निकलने लगी थी, जिससे फसलों की कटाई का काम शुरू हो गया है। गेहूं की मड़ाई में थ्रेशर भी चलने लगे, लेकिन रविवार व सोमवार को हुई बारिश से फिर कटाई मड़ाई का काम रुक गया है।
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किसान जितेंद्र सिंह गौतम ने बताया कि तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से फसल भीगने के साथ पूरे खेत व आसपास के खेतों में फैल गई है, जिसकों इकट्ठा किया जा रहा है। अन्न की पैदावार तो नहीं होगी कम से कम पशुओं के लिए भूसा की व्यवस्था हो जाए। चना की फसल को काटकर खलिहान में लगा दिया है। बेमौसम बारिश से खलिहान में पानी भर गया है।
असोथर के किसान राजेश, गजेंद्र सिंह यादव, राजाराम ने बताया कि मौसम की मार से पहले ही समय से फसलों की कटाई नहीं की जा सकी है। सोमवार की शाम ओला गिरने से बची हुई फसल भी खत्म हो गई। जोरदार बारिश से गेहूं के खेत और खलिहान मेें पानी भर गया है। खलिहान में लगी राई की फसल भी बारिश से चौपट हो गई। किसान राजित राम ने बताया कि इस बारिश से अरहर की फसल भी पूरी तरह से खराब हो गई है। ओला गिरने से गेहूं की खड़ी भी बर्बाद हो जाएगी।