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आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की मैडम बनी लक्ष्मी
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शहर के माहपुर मोहल्ले में आर्थिक रुप से कमजोर परिवार के बच्चों के साथ लक्ष्मी यादव
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। शहर के माहपुर मोहल्ले की लक्ष्मी यादव आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अंग्रेजी माध्यमिक की शिक्षा दे रही हैं। प्रतिदिन नि:शुल्क संचालित होने वाली इस पाठशाला में शाम को छह बजे तक लक्ष्मी यादव पढ़ाती हैं। नि:शुल्क इस पाठशाला में दो से बढ़कर छात्र संख्या 11 पहुंच गई है।
लक्ष्मी यादव के पिता कपूर सिंह यादव ठेकेदारी करते हैं। मां सियाकली यादव गृहिणी हैं। बड़े भाई स्वतंत्र सिंह प्राथमिक विद्यालय अतरहा में शिक्षक हैं। लक्ष्मी परास्नातक के साथ बीएड और एमएड तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले 10 महीने से मोहल्ले के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ा रही हैं। पाठशाला में आने वाले बच्चों को कॉपी, किताब, पेंसिल आदि का खर्च भी उनका परिवार खुशी से उठा रहा है। पठन-पाठन कार्य में शिक्षक बड़े भाई का सहयोग भी मिल रहा है।
समाजसेवी लक्ष्मी यादव ने बताया कि पढ़ाई छोड़ने के बाद पड़ोस के बच्चों को गलियों में खेलते देखा, तो उसे बच्चों को शिक्षा देने का मन बना। इसकी शुरुआत उन्होंने दो बच्चों से की। इसके बाद यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी और यह संख्या अब 11 पहुंच चुकी है। प्रतिदिन बच्चे शाम को चार बजे स्वयं आ जाते हैं और वह शाम छह बजे तक क्लास लेती हैं। बताया कि सप्ताह में एक दिन आर्ट एंड क्राफ्ट और डांस की भी क्लास चलाती हैं। उन्हें बच्चों के साथ रहकर पढ़ाने में बड़ी खुशी मिलती है।
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लक्ष्मी यादव के पिता कपूर सिंह यादव ठेकेदारी करते हैं। मां सियाकली यादव गृहिणी हैं। बड़े भाई स्वतंत्र सिंह प्राथमिक विद्यालय अतरहा में शिक्षक हैं। लक्ष्मी परास्नातक के साथ बीएड और एमएड तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले 10 महीने से मोहल्ले के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ा रही हैं। पाठशाला में आने वाले बच्चों को कॉपी, किताब, पेंसिल आदि का खर्च भी उनका परिवार खुशी से उठा रहा है। पठन-पाठन कार्य में शिक्षक बड़े भाई का सहयोग भी मिल रहा है।
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समाजसेवी लक्ष्मी यादव ने बताया कि पढ़ाई छोड़ने के बाद पड़ोस के बच्चों को गलियों में खेलते देखा, तो उसे बच्चों को शिक्षा देने का मन बना। इसकी शुरुआत उन्होंने दो बच्चों से की। इसके बाद यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी और यह संख्या अब 11 पहुंच चुकी है। प्रतिदिन बच्चे शाम को चार बजे स्वयं आ जाते हैं और वह शाम छह बजे तक क्लास लेती हैं। बताया कि सप्ताह में एक दिन आर्ट एंड क्राफ्ट और डांस की भी क्लास चलाती हैं। उन्हें बच्चों के साथ रहकर पढ़ाने में बड़ी खुशी मिलती है।
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