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खांदी कटी, डेढ़ सौ बीघे फसल जलमग्न

Mon, 06 Mar 2017 11:31 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर Updated Mon, 06 Mar 2017 11:31 PM IST
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Khandi cut, crop submerged one hundred bigha
प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला

निचली गंगा नहर में रविवार रात सुजानपुर गांव के पास खांदी कट गई। इससे करीब 150 बीघे गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। गेहूं पौध बड़े होने की वजह से डूबे नहीं हैं, लेकिन पानी अधिक होने से फसलें प्रभावित होंगी। खांदी कटने की सूचना किसानों ने जरौली पंप कैनाल के कर्मचारियों को दी। तब पंप कैनाल की मशीन बंद की गईं। काफी देर इंतजार के बाद किसानों ने फावड़ा लेकर खुद खांदी बांधी। देर शाम तक विभाग का कोई अफसर या कर्मचारी नहीं पहुंचा था।

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खांदी के पानी से कौंडर, बौडर, विधातीपुर और सुजानपुर गांव के किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। बौंडर गांव के बबलू सिंह के 12 बीघा गेहूं की फसल में पानी भर गया। खांदी का पानी मेड़ के ऊपर से बह रहा है। सुजानपुर गांव के प्रताप सिंह चौहान की आठ बीघा फसल में पानी भर गया है। इनका कहना है कि गेहूं की पूरी फसल में पानी भर गया है। गेहूं की बालियां निकल रही हैं। पानी भरने से फसल बर्बाद हो जाएगी। बौडर गांव के किसान नंदलाल की दो बीघा फसल जलमग्न हो गई है। इनके खेत के पास ही खांदी कटी है।
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पानी के बहाव से गेहूं के काफी पौध पानी में गिर गए हैं। बौडर गांव के राजेश दुबे के सात बीघा खेत में खांदी का पानी भरा है। खांदी कटने की सूचना मिलते ही किसान फावड़ा लेकर पहुंच गए। नहर विभाग के अधिकारियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। किसानों ने विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि नहर की पटरियों की मरम्मत नहीं कराई जाती है। हमेशा खांदी कटती रहती है। इससे रबी और खरीफ फसल को नुकसान होता है। नुकसान का मुआवजा भी नहीं मिलता। नहर विभाग के अधिकारी किसानोें पर ही खांदी काटने का आरोप लगाते हैं।
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फसलों की नुकसान होने की शिकायत करने वाले किसानों पर ही खांदी काटने का मुकदमा तक दर्ज करा दिया जाता है। इस डर से किसान नहर विभाग के अधिकारियाें की शिकायत भी नहीं करते हैं। अधिशासी अभियंता वैभव सिंह का कहना है कि खांदी कटने की सूचना मिली है। जेई को मौके पर भेज कर खांदी बंधवाने के निर्देश दिए गए हैं। खांदी कटने के कारणों की जानकारी करने के साथ ही नुकसान का भी आंकलन किया जाएगा।

इन किसानों का हुआ नुकसान
किसान फूलसिंह, मेवालाल, राजेश द्विवेदी, रामखेलावन, संतोष तिवारी, दिनेश, सोमनाथ, ब्रजलाल, शिवराम, रामप्रताप, चंदन, जयकरन, रामखेलावन सहित करीब 30 किसानों की फसलों में खांदी का पानी भर गया है।  


गेहूं की फसल में अधिक पानी भरने से पौधे पीले पड़ जाएंगे। खेत से यदि दो दिन पानी नहीं निकला तो जड़ व फसल सड़ने लगती है। गेहूं की पैदावार भी नहीं होगी। जिनमें दाने पड़ गए हैं, वे पतले हो जाएंगे। जितनी जल्दी हो सके किसान को खेत में भरे पानी को निकाल देना चाहिए। इसके बाद जिंक व यूरिया का छिड़काव जरूर करें।
- डॉ. नौशाद आलम, कृषि वैज्ञानिक, चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव।

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