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कंचन वर्मा में ससुर खदेरी को किया था पुनर्जीवित

Sun, 28 Aug 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sun, 28 Aug 2016 12:34 AM IST
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Kanchan Verma had to revive sasurKderi
एेसे दिन-रात चला था काम। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

डीएम के रूप में कंचन वर्मा का कार्यकाल जिले के लिए अतुलनीय योगदान वाला रहा। उन्होंने न केवल बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी बल्कि पर्यावरण के क्षेत्र में विलुप्त हो रही ससुर खदेरी नदी को पुनर्जीवित किया था।

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बता दें कि डीएम जीएस प्रियदर्शी के तबादले के बाद अप्रैल 2013 में आईएएस कंचन वर्मा ने जिले में डीएम का पद संभाला था। वह 30 सितंबर 2014 तक जिले में इस पद पर रहीं। अपने कार्यकाल में सबसे पहले तत्कालीन डीएम कंचन वर्मा ने परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयास शुरू किया।
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क्षेत्र भ्रमण में जो भी परिषदीय स्कूल मिलता था, उसमें कम से कम एक घंटे का समय देकर बच्चों को खुद पढ़ाती थीं। जिले में उन्होंने परिषदीय स्कूलों के मूल्यांकन परीक्षा की परंपरा डाली। शिक्षकों की उपस्थिति सुधारने के लिए अपने स्तर से स्कूल खुलने के समय निरीक्षण किया।
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निरीक्षण और गुणवत्ता खराब वाले स्कूलों में कार्यरत पहली बार साढ़े तीन सौ शिक्षकों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी कर ऐतिहासिक काम किया था। दोबारा गुणवत्ता परीक्षा सितंबर 2013 में कराई। इसमें गुणवत्ता खराब होने पर तीन सौ शिक्षकों पर प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की। यह पत्रावली बीएसए कार्यालय पहुंची ही थी कि उनका तबादला हो गया। इसीलिए यह कार्रवाई रद्दी की टोकरी में चल गई।

डीएम के रूप में आईएएस कंचन वर्मा का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कार्य ससुर खदेरी नदी को पुनर्जीवित करना रहा। ठिठौरा झील से निकलने वाली इस नदी का अस्तित्व खत्म होने के करीब था। इसके लिए उन्होंने 23 करोड़ का प्रोजक्ट तैयार कराया और मनरेगा के तहत पहले ठिठौरा झील की खोदाई कराई।


इसके बाद पहले चरण में 43 किमी दूरी सेमरी गांव तक नदी की खोदाई कराई। दूसरे चरण में उनका शेष नदी की खोदाई कराने का प्लान था। बाद में नदी और झील किनारे पौधरोपण कराना था, लेकिन जिले का दुर्भाग्य रहा कि 30 अप्रैल 2014 में उनका स्थानंतरण हो गया। इसके बाद कई डीएम आए और गए लेकिन किसी का ध्यान ससुर खदेरी नदी या उसके प्रोजेक्ट की ओर नहीं गया।

 

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