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जिला पंचायत अध्यक्ष पद हथियाने के लिए कवायद तेज..
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फतेहपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही राजनीति गलियारों में हलचल तेज हो गई है। तीनों प्रमुख दल भाजपा, सपा और कांग्रेस जीत का दावा कर रहे हैं। लेकिन हकीकत में सत्ता की कुंजी यहां निर्दलियों के हाथ में है।
46 में से 22 सीटों पर इस बार निर्दलीय जीते हैं। यह संख्या बताती है कि जीत का दावा करने वाले इन दलों को निर्दलियों के भरोसे ही जीत मिल सकती है। बहुमत का आंकड़ा 24 है, जिसे पाने के लिए तीनों दलों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है।
जिला पंचायत की कुल 46 सीटों पर हुए चुनाव में इस बार भाजपा ने 10, सपा ने नौ और कांग्रेस ने पांच पर जीत दर्ज की है। शेष 22 सीटों निर्दलीय आगे रहे हैं। बसपा का खाता नहीं खुल सका। तीनों दल जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पाने का ख्वाब देख रहे हैं।
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लेकिन इसके लिए जरूरी 24 सदस्यों का समर्थन किसी के पास फिलहाल नहीं है। जाहिर सी बात है कि बहुमत के अंक साधने के लिए इन दलों को निर्दलियों की हरहाल में जरूरत पड़ेगी। यानी निर्दलियों का रुझान जिस तरफ हुआ जिला पंचायत की सत्ता भी उसी के हाथ में होगी। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट सामान्य वर्ग के आरक्षित है।
भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष मिश्रा ने दावा किया है पार्टी के समर्थित 10 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। सपा, कांग्रेस और निर्दलीय के जिला पंचायत सदस्य उनके संपर्क में हैं। जब सपा की सरकार थी, तब भी भाजपा चुनाव जीती थी और इस बार भी जीत सुनिश्चित है।
वहीं, सपा जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने दावा किया है कि उनके नौ प्रत्याशी जिला पंचायत का चुनाव जीते हैं और छह प्रत्याशी ऐसे हैं जो जीतने के बाद सपा में आ गए हैं। अब सपा के 15 जिला पंचायत सदस्य हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय ने दावा किया कि कांग्रेस समर्थित पांच प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। सपा, भाजपा और निर्दलीय सदस्य उनके संपर्क में हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव मजबूती से लड़ा जाएगा। बता दें कि
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46 में से 22 सीटों पर इस बार निर्दलीय जीते हैं। यह संख्या बताती है कि जीत का दावा करने वाले इन दलों को निर्दलियों के भरोसे ही जीत मिल सकती है। बहुमत का आंकड़ा 24 है, जिसे पाने के लिए तीनों दलों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है।
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जिला पंचायत की कुल 46 सीटों पर हुए चुनाव में इस बार भाजपा ने 10, सपा ने नौ और कांग्रेस ने पांच पर जीत दर्ज की है। शेष 22 सीटों निर्दलीय आगे रहे हैं। बसपा का खाता नहीं खुल सका। तीनों दल जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पाने का ख्वाब देख रहे हैं।
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लेकिन इसके लिए जरूरी 24 सदस्यों का समर्थन किसी के पास फिलहाल नहीं है। जाहिर सी बात है कि बहुमत के अंक साधने के लिए इन दलों को निर्दलियों की हरहाल में जरूरत पड़ेगी। यानी निर्दलियों का रुझान जिस तरफ हुआ जिला पंचायत की सत्ता भी उसी के हाथ में होगी। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट सामान्य वर्ग के आरक्षित है।
भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष मिश्रा ने दावा किया है पार्टी के समर्थित 10 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। सपा, कांग्रेस और निर्दलीय के जिला पंचायत सदस्य उनके संपर्क में हैं। जब सपा की सरकार थी, तब भी भाजपा चुनाव जीती थी और इस बार भी जीत सुनिश्चित है।
वहीं, सपा जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने दावा किया है कि उनके नौ प्रत्याशी जिला पंचायत का चुनाव जीते हैं और छह प्रत्याशी ऐसे हैं जो जीतने के बाद सपा में आ गए हैं। अब सपा के 15 जिला पंचायत सदस्य हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय ने दावा किया कि कांग्रेस समर्थित पांच प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। सपा, भाजपा और निर्दलीय सदस्य उनके संपर्क में हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव मजबूती से लड़ा जाएगा। बता दें कि