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Fatehpur News: क्रोमियम अपशिष्ट से भूजल प्रदूषण की जांच तेज, हैंडपंपों का लिया जायजा
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फोटो-16-औंग के मधुचंद्रा केमिकल फैक्ट्री परिसर में सैंपल लेता कर्मचारी।संवाद
- फोटो : शहर के पुराना 132 केवी पावर सब स्टेशन का निरीक्षण करते एसडीएम महेश कुमार व अधीक्षक अभियंता जितेंद्र ढूल और कार्यकारी अभियंता दयाचंद रोहिल्ला।
औंग। मलवां विकासखंड के गोधरौली गांव में क्रोमियम युक्त रासायनिक अपशिष्ट से भूजल प्रभावित होने के मामले में जांच तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को स्टेट एनवायरमेंट चेन्नई के वैज्ञानिक सलाहकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने क्रोमियम डंपिंग यार्ड के आसपास जांच की।
टीम ने हैंडपंपों का निरीक्षण कर प्रदूषण के प्रभाव का दायरा जानने का प्रयास किया। जांच में जुटी टीम आईआईटी कानपुर को भी सहयोग करेगी। गोधरौली गांव में क्रोमियम युक्त अपशिष्ट के कारण पानी का रंग हरा और पीला होने की शिकायत है।
ग्रामीणों का दावा है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। छिवली, आशापुर, अभयपुर, राशुपुर और बड़ाहार समेत आसपास के गांव भी इस समस्या से प्रभावित हैं। एनजीटी के निर्देश पर विभिन्न विभागों की टीमें मामले की जांच कर रही हैं।
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एनजीटी में रखे 22 सुझाव
गोधरौली निवासी और एनजीटी में मामले की पक्षकार दिव्या द्विवेदी ने बताया कि अदालत में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति जारी रहने की अवधि को लेकर सवाल उठाया गया था। इसके बाद जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान के लिए एनजीटी में 22 सुझाव भी दिए हैं। इनमें सभी फैक्ट्रियों की जांच और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराने की मांग प्रमुख है।
उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां बोरवेल के जरिये रासायनिक अपशिष्ट को दोबारा जमीन के भीतर डाल देती हैं। इसकी जांच से भूजल प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने एनजीटी को सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अस्थायी कैंप स्थापित किया जाए, ताकि नियमों की अनदेखी करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर रोक लग सके और प्रदूषण की नियमित निगरानी हो सके।
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टीम ने हैंडपंपों का निरीक्षण कर प्रदूषण के प्रभाव का दायरा जानने का प्रयास किया। जांच में जुटी टीम आईआईटी कानपुर को भी सहयोग करेगी। गोधरौली गांव में क्रोमियम युक्त अपशिष्ट के कारण पानी का रंग हरा और पीला होने की शिकायत है।
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ग्रामीणों का दावा है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। छिवली, आशापुर, अभयपुर, राशुपुर और बड़ाहार समेत आसपास के गांव भी इस समस्या से प्रभावित हैं। एनजीटी के निर्देश पर विभिन्न विभागों की टीमें मामले की जांच कर रही हैं।
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एनजीटी में रखे 22 सुझाव
गोधरौली निवासी और एनजीटी में मामले की पक्षकार दिव्या द्विवेदी ने बताया कि अदालत में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति जारी रहने की अवधि को लेकर सवाल उठाया गया था। इसके बाद जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान के लिए एनजीटी में 22 सुझाव भी दिए हैं। इनमें सभी फैक्ट्रियों की जांच और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराने की मांग प्रमुख है।
उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां बोरवेल के जरिये रासायनिक अपशिष्ट को दोबारा जमीन के भीतर डाल देती हैं। इसकी जांच से भूजल प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने एनजीटी को सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अस्थायी कैंप स्थापित किया जाए, ताकि नियमों की अनदेखी करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर रोक लग सके और प्रदूषण की नियमित निगरानी हो सके।

फोटो-16-औंग के मधुचंद्रा केमिकल फैक्ट्री परिसर में सैंपल लेता कर्मचारी।संवाद- फोटो : शहर के पुराना 132 केवी पावर सब स्टेशन का निरीक्षण करते एसडीएम महेश कुमार व अधीक्षक अभियंता जितेंद्र ढूल और कार्यकारी अभियंता दयाचंद रोहिल्ला।