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महोत्सव में रचनाओं के माध्यम से शायरों ने भाईचारे का दिया संदेश

Tue, 10 Feb 2015 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Tue, 10 Feb 2015 12:04 AM IST
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in Mahotsav famous poets gave message of brotherhood

फतेहपुर महोत्सव की शाम को शायरों और कवियों ने नूरानी बना दिया। सोमवार शाम को हुए  मुशायरा और कवि सम्मेलन का उद्घाटन जिलाधिकारी राकेश कुमार ने दीप जलाकर किया। इसके बाद से एक से बढ़कर एक कलाम ने श्रोताओं की रूहानियत जगा दी।

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मशहूर शायर मंजर भोपाली ने अपने कलाम, ‘बेटियों के लिए भी हाथ उठाओ मंजर, सिर्फ अल्लाह से बेटा नहीं मांगा करते।

हम वो राही है लिये फिरते हैं सूरज सर पे, हम किसी पेड़ से साया नहीं मांगा करते।’ से बेटी बचाओ और खुद्दारी को उकेरा।

भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष पद्मश्री गोपालदास नीरज ने, ‘एक जुग बाद शब-ए-गम की सहर देखी है, देखने को न थी उम्मीद मगर देखी है’ पढ़ा।

नोएडा से आए कुंवर बेचैन ने कहा, ‘गमों की आंच पर आंसू उबालकर देखो, बनेंगे रंग किसी पर भी डालकर देखो। तुम्हारे दिल की चुभन भी जरूर कम होगी, किसी के पांव का कांटा निकालकर देखो’।
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ग्वालियर से आए प्रदीप चौबे ने पढ़ा, ‘शेर शेरनी से नहीं डरता क्योंकि वह प्यार करता है, आदमी औरत से डरता है क्योंकि वह प्यार नहीं सिर्फ शादी करता है’।

हास्य कवि मुधप श्रीवास्तव नरकंकाल ने, ‘इश्क में इस कदर हम मटियामेट हो गए, माशूका की शादी हो गई दो दिन लेट हो गए’ पढ़कर श्रोताओं को गुदगुदाया।

शिवशरण बंधु हथगामी ने पढ़ा, ‘रहते रहते घर में घर हो जाते हैं, चलते चलते लोग सफर हो जाते हैं, जिनके पास हुनर है भेष बदलने का, उनके सारे ऐब हुनर हो जाते हैं’।
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तरन्नुम नाज ने अपने कलाम, ‘क्या जमाने की है औकात वो क्या देता है, जो भी देता है मुझे मेरा खुदा देता है’। लखनऊ के शायर डा. तारिक कमर ने तंज करते हुए कहा कि, ‘यहां कोई मेरा अपना नहीं है, चलो अच्छा है कुछ खतरा नहीं है, बड़े लोगों से मिलकर देख आए, किसी दीवार पर साया नहीं है’। दिल्ली से आए विष्णु सक्सेना ने कहा, ‘हम तो वरदान को शाप समझ बैठे हैं, सामने पुण्य है और पाप समझ बैठे हैं, पहले मां-बाप को दौलत समझते थे हम, आज दौलत को ही मां-बाप समझ बैठे हैं’। सबा बलरामपुरी ने मुहब्बत पर अपना कलाम पढ़ा, ‘तेरी तस्वीर क्या लगाई थी, घर के दीवार-ओ-दर महकने लगे, तुझसे मिलकर मुझे हुआ एहसास, पत्थरों के भी दिल धड़कने लगे हैं’। इसके अलावा भोपाल के नुसरत मेंहदी, अलीगढ़ के शशांक प्रभाकर, मुरादाबाद के मंसूर उस्मानी, कानुपर के प्रमोद तिवारी ने भी कलाम पेश किए। अपने मनपंसद शायरों को सुनने आए कुछ श्रोताओं को दुख भी हुआ। वजह थी कि पहले से प्रस्तावित शायर मुनव्वर राना, राहत इंदौरी और दिल्ली की डा. सरिता शर्मा कार्यक्रम में किन्हीं वजहों से नहीं आ सके।

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