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आल्हा और फाग ने खूब मचाया धमाल, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा पंडाल
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Mon, 09 Feb 2015 12:44 AM IST
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दिन बीतने के साथ ही स्पोर्ट्स स्टेडियम में महोत्सव की आभा देखते बन रही है। मौसम अनुकूल न होने के बाद भी ख्वाहिशों परवान चढ़ रही हैं। निगाहें जो कुछ भी देखना चाहती हैं वह सामने नजर आ रहा है। न सिर्फ कला जगत की प्रतिभाएं बल्कि स्थानीय हुनर भी देखते बन रहा है।
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श्रुति बनर्जी की वंदना से आयोजनों की शुरूआत के साथ अन्नदाताओं को राह दिखाने वाले कृषि सम्मेलन के बाद आल्हा सम्राह राम इकबाल और कामता यादव के फाग गीतों ने शमां बांधा तो निजामुद्दीन की टीम का दिवारी और काठी नृत्य भी हरेक निगाह को खूब भाया।
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फॉलीवुड की टीम ने रंगारंग की प्रस्तुति में तरह तरह से धमाल मचाया। रात में कव्वाली का दीदार हुआ, जिसमें मशहूर फनकार असलम साबरी छा गए तो मनोज मिश्र का सूफी नृत्य आंखों को रमता गया।
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महोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं की काबिलियत का परचम लहरा रहा है। फॉलीवुड की अंजलि मौर्या एंड ग्रुप ने अदाकारी के कुछ ऐसे जलवे बिखेरे कि दर्शक दंग रह गए। बालीवुड के गीत- ‘मेरे यारा तेरे घर अगर आएंगे- हमें तेरी है कसम, संवर जाएंगे’ की प्रस्तुति ने शमां बांध दिया।
इसी ग्रुप ने ‘चिट्ठी न कोई संदेश जाने वो कौन सा देश’ लुभाने में सफल रहा। इसके बाद जॉली पटेल के ‘ हमरे सजनवा हमरा दिल ऐसा डोलै, अगले जन्म मोहे बिटिया न कीजो’ गीत की प्रस्तुति ने दर्शकों को अवाक कर दिया। मार्मिक अभियन करके इस किरदार ने 21 वीं सदी के समाज की सोंच पर प्रहार किया।
शशिकांत पटेल के ‘ओरी चिरइया नन्ही सी चिड़िया, अंगना में फिर आजा रे’ के जरिए प्रतिभा के रंग बिखरे।
विभिन्न रंगों से रमे फतेहपुर महोत्सव में आल्हा व फाग गायन ने खूब वाहवाही बटोरी। बिंदकी के कामता यादव ने फाग गायन के जरिए श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया। लोकनाथ पांडेय ने भी कामता यादव की टीम का साथ दिया। इससे पहले श्रीराम की आल्हा प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। भारतीय समाज का दर्पण बने आल्हा गीतों के जरिए आल्हा गायक ने एक से बढ़ कर एक आल्हा पेश किए।
...उठी निगाहें तो बस निहारती ही रहीं
फतेहपुर। फतेहपुर महोत्सव में लोक कला का भी वजूद सामने आ रहा है। आयोजन के तीसरे दिन निजामुद्दीन की टीम के पेश हुए दिवारी नृत्य निगाहोें में बसता गया। निजाम चच्चा के शार्गिदों ने दर्शकों को एकटक निहारने को मजबूर कर दिया। लाठियों की भिड़ंत के बीच कलाकारों ने जो नजारा प्रस्तुत किया वह जेहन में बसता चला गया। क्या बड़े क्या बुर्जुग, युवा तक इस कला के क्रददान बने नजर आए। इसी टीम ने बाद में काठी नृत्य का रोमांच भरा प्रस्तुतीकरण किया। दर्शक दीर्घा में बैठे लोग इस नजारे को दंग रह गए।
रिमझिम बरसात में क्या खूब छुट्टी का मजा
फतेहपुर। फतेहपुर महोत्सव का दीदार करने के लिए बच्चों और युवाओं के झुंड दिखाई दिए। रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम को बड़े और बुर्जुगों के साथ निहारने के साथ यह जमात विभिन्न पांडालों पर नजर आई। राधानगर से आए मनीष कुमार और उसके सहपाठी राघव गुप्ता ने कहा कि स्कूल की छुट्टी का लुत्फ उठाने से इससे अच्छा मौका और कहां मिलता। बताया कि अर्से से उन्हें विक्रम बैताल की कहानियों की चाह थी। हाथ में पकड़ी किताब को दिखाते हुए राघव बोला कि बुक स्टाल में यह ख्वाहिश भी पूरी हो गई।
प्रगतिशील 70 किसानों को किया सम्मानित
- वैज्ञानिक ढंग से खेती करने की दी सलाह
फतेहपुर। फतेहपुर महोत्सव में रविवार को कृषि गोष्ठी हुई, जिसमें प्रगतिशील किसानों को कंबल, घड़ी और डायरी देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतबाड़ी के योजनाओं के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
कृषि महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद उपकृषि निदेशक ने किसानों को तकनीकी ढंग से खेती करने की सलाह दी, जिससे फसल की पैदावार में लागत कम और मुनाफा अधिक होने की संभावना रहती है। मौसम की उलट पलट के बावजूद भी किसानों को धैर्य रखने की जरूरत है। इस बारिश से रबी की फसलों में अधिक नुकसान नहीं होगा। एक दो दिन मौसम साफ होने की संभावना है। अच्छी खेती करने वाले किसान इसमें 100 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाना था लेकिन मौसम खराब होने की वजह से सभी किसान नहीं आ सके, जिससे मात्र 70 किसानों को सम्मानित किया गया है। इसमें शैलेंद्र सिंह, नेपाल सिंह, अरुण, सहाबुद्दीन और रमेश समेत 70 किसानों को कंबल, घड़ी और डायरी दी गई है।