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Fatehpur News: बेदखली के आदेश के बाद भी था अवैध कब्जा, अब ढहा
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हथगाम। आरोपियों की दबंगई का आलम यह रहा कि सरकारी आदेश भी अमल में नहीं लाया जा सका। आखिर इसके पीछे क्या वजह रही, जो सरकारी आदेश के आगे भी बौने साबित हो गए। तिहरे हत्याकांड के बाद उठी बुलडोजर कार्रवाई की मांग पर बुधवार को अवैध कब्जे ढहाए गए।
अखरी गांव में तिहरे हत्याकांड के आरोपी पूर्व प्रधान मुन्नू सिंह और करीबी हत्यारोपी ज्ञान सिंह उर्फ विपुल सिंह का गाटा संख्या 58 हरिजन आबादी की जगह पर करीब 3650 वर्गमीटर पर अवैध कब्जा कई साल से है। अवैध कब्जे की जगह पर मुन्नू सिंह का एक बड़ा कमरा बना हुआ था। दूसरी बाकी जगह पर ज्ञान सिंह की बहन रहती है। वहां मवेशी पालन के लिए चरही आदि का निर्माण है।
खागा एसडीएम कोर्ट में सरकारी संपत्ति कब्जे का वाद चला था। करीब एक साल पहले संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश किया गया था। आदेश कागजों में ही हुआ, उसे अमल में नहीं लाया गया। हत्याकांड के बाद दोपहर करीब एक बजे मुन्नू सिंह के डेढ़ बिस्वा अतिक्रमण को कब्जा मुक्त कराया गया। इसके अलावा ज्ञान सिंह भदौरिया उर्फ विपुल की बहन के कब्जे से भूमि मुक्त कराई गई। परिजन व ग्रामीण मुन्नू सिंह दूसरी संपत्तियों को धराशायी करने की मांग करते रहे। उन पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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अखरी गांव में तिहरे हत्याकांड के आरोपी पूर्व प्रधान मुन्नू सिंह और करीबी हत्यारोपी ज्ञान सिंह उर्फ विपुल सिंह का गाटा संख्या 58 हरिजन आबादी की जगह पर करीब 3650 वर्गमीटर पर अवैध कब्जा कई साल से है। अवैध कब्जे की जगह पर मुन्नू सिंह का एक बड़ा कमरा बना हुआ था। दूसरी बाकी जगह पर ज्ञान सिंह की बहन रहती है। वहां मवेशी पालन के लिए चरही आदि का निर्माण है।
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खागा एसडीएम कोर्ट में सरकारी संपत्ति कब्जे का वाद चला था। करीब एक साल पहले संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश किया गया था। आदेश कागजों में ही हुआ, उसे अमल में नहीं लाया गया। हत्याकांड के बाद दोपहर करीब एक बजे मुन्नू सिंह के डेढ़ बिस्वा अतिक्रमण को कब्जा मुक्त कराया गया। इसके अलावा ज्ञान सिंह भदौरिया उर्फ विपुल की बहन के कब्जे से भूमि मुक्त कराई गई। परिजन व ग्रामीण मुन्नू सिंह दूसरी संपत्तियों को धराशायी करने की मांग करते रहे। उन पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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