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Fatehpur News: तेल माफिया मनोज को हाईकोर्ट से राहत, गैंगस्टर की कार्रवाई खारिज
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फतेहपुर। मथुरा जिले के तेल माफिया के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे कुर्क की गई 35 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्तीकरण से मुक्त करने का रास्ता साफ हो गया है। संपत्ति की बाजार कीमत करीब 80 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हाईकोर्ट ने गैंग चार्ट तैयार करते समय संबंधित प्राधिकारियों की संयुक्त बैठक नहीं होने को शासनादेश के विपरीत माना।
मथुरा जिले के फरह थाना क्षेत्र के बेरी निवासी मनोज अग्रवाल के खिलाफ मलवां पुलिस ने 16 मई 2019 को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। इस मामले में मैनपुरी निवासी रवि उर्फ रबिया सिंह, पंकज सिंह और शैलेंद्र सिंह उर्फ शैलू को भी आरोपी बनाया गया था। गिरोह पर इंडियन ऑयल की बरौनी से मथुरा जाने वाली पाइपलाइन तोड़कर तेल (डीजल-पेट्रोल) चोरी करने के तीन मुकदमे दर्ज थे।
पुलिस ने 10 फरवरी 2024 को आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद आरोपियों की संपत्तियां कुर्क कर ली गई थीं। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) की अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान मनोज अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गैंगस्टर की कार्रवाई को चुनौती दी।
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15 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि गैंग चार्ट तैयार करते समय संबंधित प्राधिकारियों की संयुक्त बैठक नहीं हुई थी। इसे शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन माना गया। इस आदेश से मनोज अग्रवाल को गैंगस्टर एक्ट के मामले में राहत मिली है।
मामले में मलवां पुलिस की पैरवी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि उपलब्ध तथ्यों से यह पुष्टि नहीं होती कि पुलिस की शिथिल पैरवी ही आदेश का कारण बनी।
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मथुरा जिले के फरह थाना क्षेत्र के बेरी निवासी मनोज अग्रवाल के खिलाफ मलवां पुलिस ने 16 मई 2019 को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। इस मामले में मैनपुरी निवासी रवि उर्फ रबिया सिंह, पंकज सिंह और शैलेंद्र सिंह उर्फ शैलू को भी आरोपी बनाया गया था। गिरोह पर इंडियन ऑयल की बरौनी से मथुरा जाने वाली पाइपलाइन तोड़कर तेल (डीजल-पेट्रोल) चोरी करने के तीन मुकदमे दर्ज थे।
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पुलिस ने 10 फरवरी 2024 को आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद आरोपियों की संपत्तियां कुर्क कर ली गई थीं। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) की अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान मनोज अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गैंगस्टर की कार्रवाई को चुनौती दी।
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15 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि गैंग चार्ट तैयार करते समय संबंधित प्राधिकारियों की संयुक्त बैठक नहीं हुई थी। इसे शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन माना गया। इस आदेश से मनोज अग्रवाल को गैंगस्टर एक्ट के मामले में राहत मिली है।
मामले में मलवां पुलिस की पैरवी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि उपलब्ध तथ्यों से यह पुष्टि नहीं होती कि पुलिस की शिथिल पैरवी ही आदेश का कारण बनी।