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गंगा व पांडु नदी उफनाईं, खतरे में तटवर्ती गांव
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:31 AM IST
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animalls in road
- फोटो : घ्घ्घ्घघ््घ्घघघ्घ्घ्घ्घ्घ््घ््घ्््घघ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ
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बारिश के साथ ही गंगा और पांडु नदी की बाढ़ से तटवर्ती गांवों में तबाही शुरू हो गई है। गलाथा गांव में 200 बीघे खेत जलमग्र हो गए हैं। इसमें करीब 40 किसानों की फसलें डूबी हैं। पांडु की कटान से बिंदकी फारम गांव में एक झोपड़ी पानी में बह गई है। राजस्व विभाग की टीम ने पीड़ित परिवार को नाव से नदी पार लाकर जाड़े के पुरवा के स्कूल में ठहराया है।
लगातार हुई बारिश से गंगा नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। गंगा के बाढ़ से पांडु नदी की धारा उफना गई है। इससे तटवर्ती गांव गलाथा, रामघाट, बेरीनारी, बिंदकी फारम, जाड़े का पुरवा, बेनी खेड़ा में बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। बिंदकी फारम गांव के किनारे राजू निषाद की झोपड़ी पांडु नदी के तेज कटाव में बह गई। पीड़ित परिवार को राजस्व विभाग की टीम ने जाड़े के पुरवा में रोक दिया है। वहीं बाढ़ का पानी गलाथा गांव के 40 किसानों के खेतों में भर गया है। इससे मिर्च, गोभी, तरोई, लौकी, धनिया, मूली, तिल्ली और मवेशियों के लिए हरा चारा की फसलें डूब गई हैं। किसान हरीलाल, अक्षयलाल, रामचंद्र निषाद, यदुवंश, भागीरथ, अश्वनी कुमार, पप्पू, ओमप्रकाश, गेंदालाल निषाद, रामकिशोर निषाद, रामचंद्र निषाद, राजू सिंह ने बताया कि हरी सब्जी और मशाला की फसलों के डूबने से तटवर्ती गांव के लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। खेतों में बोया हरा चारा की फसलें भी डूब गई हैं। इससे मवेशियों को चारा खिलाने की समस्या आ गई है। बाढ़ का पानी गलाथा के मजरा बेरीनारी, रामघाट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लोगों ने अपने मवेशियों को गांव से बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। खुद भी जंगल में बने टीलों व ऊपर के गांवों में पलायन करने के लिए समान सुरक्षित कर रहे हैं।
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मवेशियों के लिए चारे की समस्या
औंग। बाढ़ के पानी ने मवेशी पालकों के सामने चारे की समस्या खड़ी कर दी है। जंगल में हरी घास चरने और खेतों में बोया हुआ हरा चारा बाढ़ से नष्ट हो गया है। तटवर्ती गांव के लोग अपने मवेशियों को नदी किनारे की हरी घास चराकर मवेशियों का पेट भरते थे, लेकिन अब खेतों में पानी भर गया है। ग्रामीणों ने अपने मवेशियों को जाड़े का पुरवा गांव के संपर्क मार्ग किनारे बांध दिया है।
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बाढ़ चौकियों में लेखपाल किए गए तैनात
औंग। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए चौकियों में राजस्व कर्मियों को मुस्तैद कर दिया है। नाव से बाढ़ प्रभारी प्रभावित क्षेत्र का मुआयना कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य टीम व दवाएं उपलब्ध करा दिया गया है। नायब तहसीलदार संतराज पाल, राजस्व कर्मी शुभम सिंह, अभिनाश सिंह ने बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया।
बारिश में बरगद, मंदिर व घर ढहा
औंग। थाना क्षेत्र के गंगचौली गांव में मंगलवार की रात को बारिश में एक पुराना बरगद का पेड़ गिर गया। बरगद के पेड़ की चपेट में आकर शिवमंदिर ढह गया। वहीं गोधरौली गांव में आशीष सिंह के मकान का एक हिस्सा बारिश के पानी से गिर गया।
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लगातार हुई बारिश से गंगा नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। गंगा के बाढ़ से पांडु नदी की धारा उफना गई है। इससे तटवर्ती गांव गलाथा, रामघाट, बेरीनारी, बिंदकी फारम, जाड़े का पुरवा, बेनी खेड़ा में बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। बिंदकी फारम गांव के किनारे राजू निषाद की झोपड़ी पांडु नदी के तेज कटाव में बह गई। पीड़ित परिवार को राजस्व विभाग की टीम ने जाड़े के पुरवा में रोक दिया है। वहीं बाढ़ का पानी गलाथा गांव के 40 किसानों के खेतों में भर गया है। इससे मिर्च, गोभी, तरोई, लौकी, धनिया, मूली, तिल्ली और मवेशियों के लिए हरा चारा की फसलें डूब गई हैं। किसान हरीलाल, अक्षयलाल, रामचंद्र निषाद, यदुवंश, भागीरथ, अश्वनी कुमार, पप्पू, ओमप्रकाश, गेंदालाल निषाद, रामकिशोर निषाद, रामचंद्र निषाद, राजू सिंह ने बताया कि हरी सब्जी और मशाला की फसलों के डूबने से तटवर्ती गांव के लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। खेतों में बोया हरा चारा की फसलें भी डूब गई हैं। इससे मवेशियों को चारा खिलाने की समस्या आ गई है। बाढ़ का पानी गलाथा के मजरा बेरीनारी, रामघाट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लोगों ने अपने मवेशियों को गांव से बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। खुद भी जंगल में बने टीलों व ऊपर के गांवों में पलायन करने के लिए समान सुरक्षित कर रहे हैं।
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मवेशियों के लिए चारे की समस्या
औंग। बाढ़ के पानी ने मवेशी पालकों के सामने चारे की समस्या खड़ी कर दी है। जंगल में हरी घास चरने और खेतों में बोया हुआ हरा चारा बाढ़ से नष्ट हो गया है। तटवर्ती गांव के लोग अपने मवेशियों को नदी किनारे की हरी घास चराकर मवेशियों का पेट भरते थे, लेकिन अब खेतों में पानी भर गया है। ग्रामीणों ने अपने मवेशियों को जाड़े का पुरवा गांव के संपर्क मार्ग किनारे बांध दिया है।
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बाढ़ चौकियों में लेखपाल किए गए तैनात
औंग। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए चौकियों में राजस्व कर्मियों को मुस्तैद कर दिया है। नाव से बाढ़ प्रभारी प्रभावित क्षेत्र का मुआयना कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य टीम व दवाएं उपलब्ध करा दिया गया है। नायब तहसीलदार संतराज पाल, राजस्व कर्मी शुभम सिंह, अभिनाश सिंह ने बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया।
बारिश में बरगद, मंदिर व घर ढहा
औंग। थाना क्षेत्र के गंगचौली गांव में मंगलवार की रात को बारिश में एक पुराना बरगद का पेड़ गिर गया। बरगद के पेड़ की चपेट में आकर शिवमंदिर ढह गया। वहीं गोधरौली गांव में आशीष सिंह के मकान का एक हिस्सा बारिश के पानी से गिर गया।