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एक साथ उठीं चार अर्थियां, हर आंख हुई नम

Mon, 19 Jul 2021 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 12:03 AM IST
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Four earths arose simultaneously, every eye became moist
हुसैनगंज। बिंदकी के झावनखेड़ा गांव के अमर सिंह, उनके पिता रामकिशोर और दो बेटियों की मौत से गांव में मातम है। चारों का शव शनिवार की देर शाम ही आ गया था, लेकिन अंतिम संस्कार रविवार को सुबह किया गया। रामकिशोर और अमरसिंह का दाह संस्कार किया गया, जबकि दोनों बेटियों को दफनाया गया। एक ही परिवार के चार लोगों की एक साथ अर्थी देख लोगों की आंखें नम हो गईं।
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झावनखेड़ा गांव निवासी अमर सिंह, उनके पिता रामकिशोर, पत्नी नीलम वर्मा, बेटी अनन्या, तन्नो और बेटे अयांश कानपुर जाते समय हादसे का शिकार हो गए थे। उनकी कार खागा के आधारपुर गांव के सामने खडे़ कंटेनर से शनिवार की सुबह टकरा कई थी।
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अमर सिंह, पिता रामकिशोर व बेटी अनन्या व तन्नो की मौत हो गई, जबकि पत्नी नीलम और बेटा अयांश घायल हैं। शनिवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव झावनखेड़ा गांव पहुंचे तो गांव में मातम छा गया। रविवार की सुबह परिजन और ग्रामीण शव लेकर भिटौरा घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। यहां अमर सिंह और रामकिशोर के शव का दाह संस्कार हुआ, जबकि बेटियों को दफन कर उन्हें मां गंगा को सौंप दिया गया।
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बेहद गरीब परिवार के अमर सिंह के पिता रामकिशोर मजदूरी करते थे। मां का निधन अमर सिंह के बचपन में ही हो गया था। परिवार के लोगों ने बताया कि अमर सिंह पढ़ाई में अच्छे थे। ऐसे में पिता के साथ ही गांव के कुछ लोग भी उनकी पढ़ाई में लगने वाले छोटे-बड़े खर्च दे दिया करते थे।
ग्रामीणों का यह स्नेह अमर सिंह को हमेशा याद रहता था। परिजनों ने बताया कि अमर सिंह नौकरी लगने के बाद जब गांव आते थे तो पढ़ने वाले बच्चों को वही स्नेह देते थे, जो ग्रामीणों ने उन्हें बचपन में दिया था। इतना ही नहीं मोहल्ले के बच्चों को खाने के लिए पैसे देते थे। इससे बच्चे खुश रहते थे।

कानपुर के निजी अस्पताल में अमर सिंह की पत्नी नीलम की हालत फिलहाल चिंताजनक बनी हुई है। अमरसिंह के चाचा ने बताया कि इलाज के दौरान वह कई बार होश में आईं और फिर बेहोश हो गईं। बेटे अयांश की हालत ठीक है। अभी तक नीलम बातचीत करने की स्थिति में नहीं आ सकी है।
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