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कान्हा गोशाला में 16 गायों ने जन्मे विभिन्न प्रजाति के बच्चे
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कान्हा गोशाला में बीमार पड़े गाय व बछड़े। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। नगर पालिका की कान्हा गोशाला में एक सप्ताह के अंदर दो गायों की मौत हो चुकी है। जबकि चार अभी भी बीमार है। हालात ये है कि क्षमता से अधिक गोवंश होने के चलते अव्यवस्था का माहौल है।
कान्हा गोशाला संचालन का जिम्मा मेसर्स वेद विद्या परिषद यूनीखेडा मुजफ्फरनगर के पास है। इस गोशाला की क्षमता 300 गोवंश रखने की है। इसके सापेक्ष वर्तमान में 480 गोवंश हैं।
इनमें चार बीमार हैं और अंदर दो गोवंश मरे पड़े हैं। फरवरी महीने से अब तक गोशाला में 32 गोवंशों की मौत हो चुकी है। क्षमता से डेढ़ गुना से अधिक गोवंश होने के कारण बीमार गोवंशों को खासी दिक्कतें हो रही हैं।
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बीमार पशु गोवंश से कुचलकर घायल हो जाते हैं और मर भी जाते हैं। गोशाला में गोवंशों को सूखा और आधे पेट भूसा खिलाया जा रहा है। सुबह चरहियों में मजदूर भूसा डालते हैं।
इस दौरान आधे मवेशी अंदर चारा खाने के लिए भेजे जाते हैं। चरही खाली होने के बाद उन मवेशियों को बाहर कर दूसरे मवेशी चारा खाने के लिए अंदर लाए जाते हैं। जबकि गोशाला में हरा चारा काटने की व्यवस्था है।
गोशाला प्रबंधक सागर का कहना है कि गेट पर लगे सूचना पट पर गोवंशों की संख्या के साथ उनकी स्थिति, भूसा, दाना का स्टाक नियमित अंकित किया जाता है। सभी गोवंशों को भरपेट चारा दाना दिया जाता है। इसके संचालन में धनाभाव भारी पड़ रहा है।
16 गायों ने जन्मे बच्चे
गोशाला में मार्च महीने से बंद देशी गायों से गिरी, जर्सी, साहीवाल नस्ल की गायें तैयार करने की पहल हो रही है। इसके तहत 85 गायों का गर्भाधान कराया था। महीने भर में 16 गायों ने बच्चे जन्मे हैं।
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कान्हा गोशाला संचालन का जिम्मा मेसर्स वेद विद्या परिषद यूनीखेडा मुजफ्फरनगर के पास है। इस गोशाला की क्षमता 300 गोवंश रखने की है। इसके सापेक्ष वर्तमान में 480 गोवंश हैं।
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इनमें चार बीमार हैं और अंदर दो गोवंश मरे पड़े हैं। फरवरी महीने से अब तक गोशाला में 32 गोवंशों की मौत हो चुकी है। क्षमता से डेढ़ गुना से अधिक गोवंश होने के कारण बीमार गोवंशों को खासी दिक्कतें हो रही हैं।
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बीमार पशु गोवंश से कुचलकर घायल हो जाते हैं और मर भी जाते हैं। गोशाला में गोवंशों को सूखा और आधे पेट भूसा खिलाया जा रहा है। सुबह चरहियों में मजदूर भूसा डालते हैं।
इस दौरान आधे मवेशी अंदर चारा खाने के लिए भेजे जाते हैं। चरही खाली होने के बाद उन मवेशियों को बाहर कर दूसरे मवेशी चारा खाने के लिए अंदर लाए जाते हैं। जबकि गोशाला में हरा चारा काटने की व्यवस्था है।
गोशाला प्रबंधक सागर का कहना है कि गेट पर लगे सूचना पट पर गोवंशों की संख्या के साथ उनकी स्थिति, भूसा, दाना का स्टाक नियमित अंकित किया जाता है। सभी गोवंशों को भरपेट चारा दाना दिया जाता है। इसके संचालन में धनाभाव भारी पड़ रहा है।
16 गायों ने जन्मे बच्चे
गोशाला में मार्च महीने से बंद देशी गायों से गिरी, जर्सी, साहीवाल नस्ल की गायें तैयार करने की पहल हो रही है। इसके तहत 85 गायों का गर्भाधान कराया था। महीने भर में 16 गायों ने बच्चे जन्मे हैं।

कान्हा गोशाला में भूसा खाती गाय। संवाद- फोटो : FATEHPUR

कान्हा गोशाला में गाय के बछड़़े। संवाद- फोटो : FATEHPUR