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गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे शिवगोपाल
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भारतपुर गांव में गरीब बच्चों को पढ़ाते शिवगोपाल। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
खजुहा। यमुना कटरी के गांवों में शिवगोपाल निशुल्क शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। गरीब बच्चों के पढ़ाने से ही इनकी समाज में अलग पहचान बन गई है। लॉकडाउन के दौरान बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का निर्णय लिया। गांव को शिक्षित बनाने का जज्बा देख लोग इस बेटे की तारीफ कर रहे हैं।
भारतपुर निवासी शिवगोपाल निषाद ने बताया कि उनका गरीब परिवार से संबंध है। धनाभाव के कारण कई बार पढ़ाई प्रभावित होने पर उन्हें कष्ट होता था। प्राइमरी शिक्षा ही बच्चों की नींव होती है।
ऐसे में उन्हें पढ़ाने में थोड़ी मेहनत कर दी जाए, तो बच्चे का भविष्य संवर जाएगा। लॉकडाउन के दौरान स्कूल कॉलेज बंद थे। ऐसे में नौनिहाल पढ़ाई में कमजोर ना हो जाए, इसलिए उन्होंने गरीब बच्चों को बुलाकर पढ़ाना शुरू किया।
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उस समय बहादुरपुर, धौकलपुर, भारतपुर गांव से 250 बच्चे आते थे। स्कूल खुलने के बाद अब बच्चों की संख्या 70 है। शिवगोपाल कहते हैं कि फीस लेकर तो सभी पढ़ाते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने में जो सुकून मिलता है।
उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। छोटे बच्चों को पढ़ाने के साथ ही उन्हें होमवर्क भी देते हैं। दूसरे दिन कॉपी की जांच होती है। काम पूरा नहीं होता उन बच्चों को दोबारा समझाया जाता है। उन्होंने बताया कि वह गरीब व निराश्रित बच्चों को पढ़ाने का प्रयास आगे भी जारी रखेंगे।
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भारतपुर निवासी शिवगोपाल निषाद ने बताया कि उनका गरीब परिवार से संबंध है। धनाभाव के कारण कई बार पढ़ाई प्रभावित होने पर उन्हें कष्ट होता था। प्राइमरी शिक्षा ही बच्चों की नींव होती है।
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ऐसे में उन्हें पढ़ाने में थोड़ी मेहनत कर दी जाए, तो बच्चे का भविष्य संवर जाएगा। लॉकडाउन के दौरान स्कूल कॉलेज बंद थे। ऐसे में नौनिहाल पढ़ाई में कमजोर ना हो जाए, इसलिए उन्होंने गरीब बच्चों को बुलाकर पढ़ाना शुरू किया।
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उस समय बहादुरपुर, धौकलपुर, भारतपुर गांव से 250 बच्चे आते थे। स्कूल खुलने के बाद अब बच्चों की संख्या 70 है। शिवगोपाल कहते हैं कि फीस लेकर तो सभी पढ़ाते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने में जो सुकून मिलता है।
उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। छोटे बच्चों को पढ़ाने के साथ ही उन्हें होमवर्क भी देते हैं। दूसरे दिन कॉपी की जांच होती है। काम पूरा नहीं होता उन बच्चों को दोबारा समझाया जाता है। उन्होंने बताया कि वह गरीब व निराश्रित बच्चों को पढ़ाने का प्रयास आगे भी जारी रखेंगे।