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दंपती को पांच-पांच साल की कैद
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फतेहपुर। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट-2 ने दंपती को पांच साल की सजा सुनाई है। मामला गाजीपुर थाक्षेत्र के गांव मोहनपुर का है।
यहां रहने वाले सुरेंद्र सिंह 20 अक्तूबर 2011 की सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर के बाहर बैठे थे। इस दौरान बंटवारे के विवाद में उनके भाई ज्ञानेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी बबीता के साथ मिल कर उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया था।
बीचबचाव करने पर सुरेंद्र के बेटे अनूप की भी जमकर पिटाई की थी। इसमें दोनों घायल हुए थे। हालत ज्यादा गंभीर होने पर परिजन सुरेंद्र सिंह को कानपुर के एक अस्पताल लेकर गए थे।
जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने अनूप की तहरीर पर मारपीट की एनसीआर लिखी थी। बाद में गाजीपुर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धारा में तरमीम कर दिया था।
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वादी पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता शिव गोपाल सिंह ने कोर्ट के सामने गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट-2 विनय तिवारी ने दंपती को दोषी करार देते हुए दोनों को पांच साल की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
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यहां रहने वाले सुरेंद्र सिंह 20 अक्तूबर 2011 की सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर के बाहर बैठे थे। इस दौरान बंटवारे के विवाद में उनके भाई ज्ञानेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी बबीता के साथ मिल कर उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया था।
बीचबचाव करने पर सुरेंद्र के बेटे अनूप की भी जमकर पिटाई की थी। इसमें दोनों घायल हुए थे। हालत ज्यादा गंभीर होने पर परिजन सुरेंद्र सिंह को कानपुर के एक अस्पताल लेकर गए थे।
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जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने अनूप की तहरीर पर मारपीट की एनसीआर लिखी थी। बाद में गाजीपुर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धारा में तरमीम कर दिया था।
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वादी पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता शिव गोपाल सिंह ने कोर्ट के सामने गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट-2 विनय तिवारी ने दंपती को दोषी करार देते हुए दोनों को पांच साल की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।