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200 ईंटों भट्ठों पर लगेगा ताला
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फतेहपुर। जिले के 200 ईंट भट्ठों पर ताला लगाने की तैयारी हो गई है। मानकों को पूरा न करने पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से इन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ था लेकिन इसके बाद भी इनका संचालन हो रहा था।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभाग ने इन्हें नोटिस जारी कर दी है। दिवाली के बाद प्रयागराज से टीम आकर इनका स्थलीय निरीक्षण करेगी। यदि इन भट्ठों पर काम होता मिला तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न लेने वाले इन ईंट भट्ठों को बंद कराने के आदेश हाईकोर्ट ने दिए हैं। पिछले माह प्रदूषण नियंत्रण विभाग प्रयागराज की टीम ने जिले में आकर इन भट्ठों को चिह्नित किया था।
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तब जिले के कुल 465 भट्ठो में करीब 200 मानक विहीन मिले थे। जिन्हें बंद करने के लिए विभाग ने नोटिस जारी कीं हैं। संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वह किसी भी हाल में भट्ठा नहीं चलाएंगे। अगर इसकी अनदेखी की तो उन पर मुकदमा दर्ज होगा।
चेतावनी को नजर अंदाज करना पड़ा भारी
विभाग प्रदूषण रोकने के लिए हर संभव उपाय कर रहा है। पौधरोपण के अलावा औद्योगिक संस्थाओं में भी प्रदूषण को कम करने वाले नई तकनीक के उपकरणों को लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
ईंट भट्ठों के लिए भी वर्ष 2012 में ऐसी ही गाइड लाइन जारी की गई थी। इसमें साफ कहा गया था कि जो भी ईंट भट्ठा मानकों का पालन नहीं करता उसे तत्काल बंद कर दिया जाए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी भी इसमें मुख्य थी। बार-बार पत्र जारी होने और विभाग की चेतावनी के बाद भी ये भट्ठा संचालक लापरवाह बने रहे। अब जब नोटिसें जारी हुईं तो संचालकों में खलबली मची हुई है।
भट्ठे बंद होने से ईंट की कीमतों पर पड़ सकता है असर
ईंट भट्ठे बंद हुए तो ईंट की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। जिले में दिवाली के बाद से ईंट भट्ठों में ईंटों की पथाई का काम शुरू होने वाला है। बाहरी मजदूर दिवाली के ठीक बाद भट्ठों में पहुंचने लगेंगे।
इस बीच करीब 200 भट्ठों को बंद करने की तैयारी है। इससे सैकड़ों मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। इससे भी ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा, जो भवन निर्माण करा रहे हैं। ईंट निर्माण में कमी होने से इसकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
ईंट भट्ठों के संचालन के लिए ये हैं मानक
1. कोयले की राख के निस्तारण, ध्वनि प्रदूषण से सुरक्षा, चारों ओर दोहरी दीवार होनी चाहिए।
2. हाईड्राफ्ट तकनीक होनी चाहिए। ईंट भट्ठों को हाईड्राफ्ट बनाने के लिए चिमनी को छोड़कर पूरा भट्ठा दोबारा बनाना पड़ेगा। इसमें दो पंखे और दो जेनरेटर रखने होंगे। इससे ईंट बनाने में निकलने वाली धूल नीचे ही रह जाएगी और हवा में मोटे कण नहीं जाएंगे। अभी एक ईंट भट्ठे से जितना प्रदूषण होता है, वह नई तकनीक के बाद एक तिहाई ही रह जाएगा। इस सिस्टम को लगाने में करीब 40 लाख रुपये खर्च आता है।
3. नगर निकाय की सीमा से पांच किमी के दायरे में कोई ईंट भट्ठा संचालित नहीं होगा। 100 से 150 की आबादी वाले क्षेत्र से करीब 500 मीटर और जहां 150 से अधिक आबादी है, वहां से एक किमी दूरी का मानक है।
4. अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल, सार्वजनिक भवन आदि से एक किमी, वन्य जीव अभ्यारण्य और ऐतिहासिक स्मारक से पांच किमी दूरी होनी चाहिए।
5. रेलवे ट्रैक से 200 मीटर और एनएच व एसएच से 300 मीटर की दूरी पर भट्ठा स्थापित नहीं होगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मानक विहीन ईंट भट्ठों को किसी भी कीमत पर संचालित नहीं होने दिया जाएगा। फतेहपुर जिले में करीब 200 ईंट भट्ठे मानक विहीन मिले हैं, जिन्हें बंद करने के लिए नोटिसें जारी की जा चुकी हैं। दिवाली के बाद इन भट्ठों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। अगर कहीं काम होता मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। - आरके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग प्रयागराज।
करीब 200 ईंट भट्ठा संचालकों को नोटिसें दी गई हैं। वह जल्द इस मुद्दे को लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से वार्ता करेंगे। जो खामियां हैं उन्हें दूर कराकर भट्ठों का संचालन कराने का प्रयास होगा। - छत्रपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, फतेहपुर ईंट निर्माता समिति।
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभाग ने इन्हें नोटिस जारी कर दी है। दिवाली के बाद प्रयागराज से टीम आकर इनका स्थलीय निरीक्षण करेगी। यदि इन भट्ठों पर काम होता मिला तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न लेने वाले इन ईंट भट्ठों को बंद कराने के आदेश हाईकोर्ट ने दिए हैं। पिछले माह प्रदूषण नियंत्रण विभाग प्रयागराज की टीम ने जिले में आकर इन भट्ठों को चिह्नित किया था।
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तब जिले के कुल 465 भट्ठो में करीब 200 मानक विहीन मिले थे। जिन्हें बंद करने के लिए विभाग ने नोटिस जारी कीं हैं। संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वह किसी भी हाल में भट्ठा नहीं चलाएंगे। अगर इसकी अनदेखी की तो उन पर मुकदमा दर्ज होगा।
चेतावनी को नजर अंदाज करना पड़ा भारी
विभाग प्रदूषण रोकने के लिए हर संभव उपाय कर रहा है। पौधरोपण के अलावा औद्योगिक संस्थाओं में भी प्रदूषण को कम करने वाले नई तकनीक के उपकरणों को लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
ईंट भट्ठों के लिए भी वर्ष 2012 में ऐसी ही गाइड लाइन जारी की गई थी। इसमें साफ कहा गया था कि जो भी ईंट भट्ठा मानकों का पालन नहीं करता उसे तत्काल बंद कर दिया जाए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी भी इसमें मुख्य थी। बार-बार पत्र जारी होने और विभाग की चेतावनी के बाद भी ये भट्ठा संचालक लापरवाह बने रहे। अब जब नोटिसें जारी हुईं तो संचालकों में खलबली मची हुई है।
भट्ठे बंद होने से ईंट की कीमतों पर पड़ सकता है असर
ईंट भट्ठे बंद हुए तो ईंट की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। जिले में दिवाली के बाद से ईंट भट्ठों में ईंटों की पथाई का काम शुरू होने वाला है। बाहरी मजदूर दिवाली के ठीक बाद भट्ठों में पहुंचने लगेंगे।
इस बीच करीब 200 भट्ठों को बंद करने की तैयारी है। इससे सैकड़ों मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। इससे भी ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा, जो भवन निर्माण करा रहे हैं। ईंट निर्माण में कमी होने से इसकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
ईंट भट्ठों के संचालन के लिए ये हैं मानक
1. कोयले की राख के निस्तारण, ध्वनि प्रदूषण से सुरक्षा, चारों ओर दोहरी दीवार होनी चाहिए।
2. हाईड्राफ्ट तकनीक होनी चाहिए। ईंट भट्ठों को हाईड्राफ्ट बनाने के लिए चिमनी को छोड़कर पूरा भट्ठा दोबारा बनाना पड़ेगा। इसमें दो पंखे और दो जेनरेटर रखने होंगे। इससे ईंट बनाने में निकलने वाली धूल नीचे ही रह जाएगी और हवा में मोटे कण नहीं जाएंगे। अभी एक ईंट भट्ठे से जितना प्रदूषण होता है, वह नई तकनीक के बाद एक तिहाई ही रह जाएगा। इस सिस्टम को लगाने में करीब 40 लाख रुपये खर्च आता है।
3. नगर निकाय की सीमा से पांच किमी के दायरे में कोई ईंट भट्ठा संचालित नहीं होगा। 100 से 150 की आबादी वाले क्षेत्र से करीब 500 मीटर और जहां 150 से अधिक आबादी है, वहां से एक किमी दूरी का मानक है।
4. अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल, सार्वजनिक भवन आदि से एक किमी, वन्य जीव अभ्यारण्य और ऐतिहासिक स्मारक से पांच किमी दूरी होनी चाहिए।
5. रेलवे ट्रैक से 200 मीटर और एनएच व एसएच से 300 मीटर की दूरी पर भट्ठा स्थापित नहीं होगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मानक विहीन ईंट भट्ठों को किसी भी कीमत पर संचालित नहीं होने दिया जाएगा। फतेहपुर जिले में करीब 200 ईंट भट्ठे मानक विहीन मिले हैं, जिन्हें बंद करने के लिए नोटिसें जारी की जा चुकी हैं। दिवाली के बाद इन भट्ठों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। अगर कहीं काम होता मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। - आरके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग प्रयागराज।
करीब 200 ईंट भट्ठा संचालकों को नोटिसें दी गई हैं। वह जल्द इस मुद्दे को लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से वार्ता करेंगे। जो खामियां हैं उन्हें दूर कराकर भट्ठों का संचालन कराने का प्रयास होगा। - छत्रपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, फतेहपुर ईंट निर्माता समिति।