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प्रधानमंत्री फसल बीमा से 12 हजार किसानों ने मुंह मोड़ा
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कृषि भवन। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। दैवीय आपदा के दौरान किसानों के लिए संकट मोचक करार दी गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब दम तोड़ती नजर आ रही है। इस योजना में व्यवस्थाएं तो बहुत हैं, लेकिन किसानों को इनकी जानकारी नहीं है।
बीमा कंपनी के अधिकारी भी प्रीमियम जमा कराकर गायब हो जाते हैं। यही कारण है कि हर सीजन में फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या कम हो रही है। पिछले साल रबी फसल की तुलना में इस बार 12 हजार किसानों ने योजना से किनारा कर लिया है।
कृषि विभाग में चार लाख किसान पंजीकरण कराकर किसान होने का दंभ भर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 50 हजार किसान भी अब नहीं जुड़ पा रहे हैं।
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रबी फसलों का बीमा कराने का समय 31 दिसंबर तक था, जिसमें 44079 किसानों ने फसलों का बीमा कराया है। इसमें 27180 हेक्टेयर क्षेत्रफल बीमित हुआ है। जबकि पिछले साल रबी के सीजन में 56152 किसानों की फसलें बीमित की गईं थी।
जिसमें 37303 हेक्टेयर क्षेत्रफल बीमा के लिए कवर हुआ था। ऐसे ही हर सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों की संख्या कम होती जा रही है। इसकी वजह सिर्फ जानकारी का अभाव ही है। फसल बीमा कराने वाले 44 हजार किसानों में सिर्फ 135 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने खुद फसल बीमा के लिए पंजीकरण कराया है। (संवाद)
पीएम फसल बीमा योजना 2016 में हुई शुरू
जिले में गंगा, यमुना, पांडु और रिंद नदी के बाढ़ से करीब 250 गांव प्रभावित होते हैं। हर साल बारिश में किसानों की फसलें डूब जाती हैं। फसलें चौपट होने से तमाम परिवारों के सामने भोजन का संकट गहरा जाता है।
पूरे देश में ऐसे ही किसानों की समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी। योजना के तहत भूमि मालिक किसानों के साथ-साथ बटाईदार व सह खातेदार को भी लाभ देने की व्यवस्था की गई। किसानों को न्यूनतम प्रीमियम का भुगतान करना होता है, लेकिन यह सारी कवायद अब तक बहुत फायदेमंद नहीं रही।
इन परिस्थितियों में मिलता है फसल बीमा
- मौसम के प्रतिकूल होने पर फसलों की बुआई न कर पाने पर
- फसल की प्राकृतिक आपदा जैसे सूखा, बाढ़, भूस्खलन, ओलावृष्टि, बिजली तूफान, चक्रवात या फिर अन्य रोके न जा सकने वाले जोखिम
- फसलों की कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को बेमौसम बारिश, चक्रवात से नुकसान होने पर
इन मदों में नहीं है मुआवजे का प्रावधान
किसानों को फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की भरपाई के जिन मदों को तय किया गया है, उनमें किसानों के लिए दो बड़ी चुनौतियां शामिल हैं। अन्ना मवेशियों से होने वाले फसलों के नुकसान की भरपाई किसान फसल बीमा में नहीं है। जबकि अन्ना मवेशी किसानों की फसलों के लिए इस समय सबसे बड़े दुश्मन बने हैं। इसी प्रकार रबी की फसल में बिजली की चिंगारी से फसलों में आग लगती है और किसानों का भारी नुकसान होता है, लेकिन बीमा कंपनी से इसका क्लेम नहीं दिया जाता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा में इस तरह घटती गई किसानों की संख्या
खरीफ/रबी फसल वर्ष - किसानों की संख्या
2016 - 86850 - 95740
2017 - 82036 - 92722
2018 - 75073 - 71153
2019 - 59688 - 58708
2020 - 58171 - 56152
2021 - ----- 44079
कोट:
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रचार एलईडी टीवी युक्त वाहन से कराया जाता है। गांवों में होने वाली गोष्ठियों में कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किसानों को योजना के विषय में बताते हैं। बीमा कंपनी के लोग भी कृषि विभाग की तरह प्रचार करें, तो किसानों में जल्दी जागरूकता लाई जा सकती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक है। - राममिलन सिंह परिहार, उप कृषि निदेशक
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बीमा कंपनी के अधिकारी भी प्रीमियम जमा कराकर गायब हो जाते हैं। यही कारण है कि हर सीजन में फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या कम हो रही है। पिछले साल रबी फसल की तुलना में इस बार 12 हजार किसानों ने योजना से किनारा कर लिया है।
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कृषि विभाग में चार लाख किसान पंजीकरण कराकर किसान होने का दंभ भर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 50 हजार किसान भी अब नहीं जुड़ पा रहे हैं।
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रबी फसलों का बीमा कराने का समय 31 दिसंबर तक था, जिसमें 44079 किसानों ने फसलों का बीमा कराया है। इसमें 27180 हेक्टेयर क्षेत्रफल बीमित हुआ है। जबकि पिछले साल रबी के सीजन में 56152 किसानों की फसलें बीमित की गईं थी।
जिसमें 37303 हेक्टेयर क्षेत्रफल बीमा के लिए कवर हुआ था। ऐसे ही हर सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों की संख्या कम होती जा रही है। इसकी वजह सिर्फ जानकारी का अभाव ही है। फसल बीमा कराने वाले 44 हजार किसानों में सिर्फ 135 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने खुद फसल बीमा के लिए पंजीकरण कराया है। (संवाद)
पीएम फसल बीमा योजना 2016 में हुई शुरू
जिले में गंगा, यमुना, पांडु और रिंद नदी के बाढ़ से करीब 250 गांव प्रभावित होते हैं। हर साल बारिश में किसानों की फसलें डूब जाती हैं। फसलें चौपट होने से तमाम परिवारों के सामने भोजन का संकट गहरा जाता है।
पूरे देश में ऐसे ही किसानों की समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की थी। योजना के तहत भूमि मालिक किसानों के साथ-साथ बटाईदार व सह खातेदार को भी लाभ देने की व्यवस्था की गई। किसानों को न्यूनतम प्रीमियम का भुगतान करना होता है, लेकिन यह सारी कवायद अब तक बहुत फायदेमंद नहीं रही।
इन परिस्थितियों में मिलता है फसल बीमा
- मौसम के प्रतिकूल होने पर फसलों की बुआई न कर पाने पर
- फसल की प्राकृतिक आपदा जैसे सूखा, बाढ़, भूस्खलन, ओलावृष्टि, बिजली तूफान, चक्रवात या फिर अन्य रोके न जा सकने वाले जोखिम
- फसलों की कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को बेमौसम बारिश, चक्रवात से नुकसान होने पर
इन मदों में नहीं है मुआवजे का प्रावधान
किसानों को फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की भरपाई के जिन मदों को तय किया गया है, उनमें किसानों के लिए दो बड़ी चुनौतियां शामिल हैं। अन्ना मवेशियों से होने वाले फसलों के नुकसान की भरपाई किसान फसल बीमा में नहीं है। जबकि अन्ना मवेशी किसानों की फसलों के लिए इस समय सबसे बड़े दुश्मन बने हैं। इसी प्रकार रबी की फसल में बिजली की चिंगारी से फसलों में आग लगती है और किसानों का भारी नुकसान होता है, लेकिन बीमा कंपनी से इसका क्लेम नहीं दिया जाता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा में इस तरह घटती गई किसानों की संख्या
खरीफ/रबी फसल वर्ष - किसानों की संख्या
2016 - 86850 - 95740
2017 - 82036 - 92722
2018 - 75073 - 71153
2019 - 59688 - 58708
2020 - 58171 - 56152
2021 - ----- 44079
कोट:
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रचार एलईडी टीवी युक्त वाहन से कराया जाता है। गांवों में होने वाली गोष्ठियों में कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किसानों को योजना के विषय में बताते हैं। बीमा कंपनी के लोग भी कृषि विभाग की तरह प्रचार करें, तो किसानों में जल्दी जागरूकता लाई जा सकती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक है। - राममिलन सिंह परिहार, उप कृषि निदेशक