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कब बनी और कब होगी एक्सपायर, मिठाई में नहीं लिख रहे दुकानदार
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फतेहपुर। शहर के ज्यादातर मिष्ठान भंडारों में सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। सरकार ने भले ही मिठाइयों की निर्माण तिथि व एक्सपायरी डेट लिखने के आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन 95 फीसदी दुकानदार, हलवाई इन आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। सरकार के नियमों का ठेंगा दिखा रहे हैं।
इसके पीछे की एक वजह यह भी है कि आदेश तो जारी हो गए हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनदेखी कर रहे हिैं। जांच न होने का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। मिलावटखोरी के साथ हफ्तों पुरानी मिठाई को बेच रहे हैं। शहर से लेकर कस्बों तक मिठाई की दुकानें हैं और रंग बिरंगी मिठाइयां सजाएं हुए हैं।
सरकार के आदेशानुसार फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जनवरी महीने में ही गाइड लाइन जारी की थी, जिसमें काउंटर में रखी जाने वाली मिठाइयों में बनाने की तिथि और एक्सपायरी डेट लिखना जरूरी किया है। शहर के कुछ मिष्ठान भंडार तो इस पर अमल कर रहे हैं, लेकिन अभी भी 95 फीसदी दुकानदार ऐसे हैं। जो न बनाने की तारीख लिखते हैं और न ही एक्सपायरी डेट।
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खाद्य एवं औषधीय विभाग द्वारा मिष्ठान भंडारों से नमूना लिया जाता है। जब कोई नमूना फेल हो जाता है, तो उक्त मिष्ठान भंडार संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। नमूना फेल होने पर सीजेएम कोर्ट में चालान पेश किया जाता है। प्रमाणित होने पर दोषी को छह माह से आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा सब स्टैंडर्ड और मिक्सब्रांड पाए जाने पर एडीएम कोर्ट में चालान पेश किया जाता है। इसमें तीन से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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इसके पीछे की एक वजह यह भी है कि आदेश तो जारी हो गए हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनदेखी कर रहे हिैं। जांच न होने का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। मिलावटखोरी के साथ हफ्तों पुरानी मिठाई को बेच रहे हैं। शहर से लेकर कस्बों तक मिठाई की दुकानें हैं और रंग बिरंगी मिठाइयां सजाएं हुए हैं।
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सरकार के आदेशानुसार फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जनवरी महीने में ही गाइड लाइन जारी की थी, जिसमें काउंटर में रखी जाने वाली मिठाइयों में बनाने की तिथि और एक्सपायरी डेट लिखना जरूरी किया है। शहर के कुछ मिष्ठान भंडार तो इस पर अमल कर रहे हैं, लेकिन अभी भी 95 फीसदी दुकानदार ऐसे हैं। जो न बनाने की तारीख लिखते हैं और न ही एक्सपायरी डेट।
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खाद्य एवं औषधीय विभाग द्वारा मिष्ठान भंडारों से नमूना लिया जाता है। जब कोई नमूना फेल हो जाता है, तो उक्त मिष्ठान भंडार संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। नमूना फेल होने पर सीजेएम कोर्ट में चालान पेश किया जाता है। प्रमाणित होने पर दोषी को छह माह से आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा सब स्टैंडर्ड और मिक्सब्रांड पाए जाने पर एडीएम कोर्ट में चालान पेश किया जाता है। इसमें तीन से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।