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रजबहों में टेल तक पानी पहुंचाना मुश्किल
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहपुर।
Updated Sun, 28 Jun 2015 01:13 AM IST
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जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना निचली गंगा नहर व जरौली पंप कैनाल के रजबहों में टेल तक पानी पहुंचाना अधिकारियों के लिए टेढ़ीखीर बन गया है।
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बुधवार से चल रही निचली गंगा नहर व जरौली पंप कैनाल के आधे रजबहों के हेड में पानी नहीं पहुंचा है। टूटे व खराब गेट के कारण 50 फीसदी रजबहों के हेड तक पानी नहीं पहुंच रहा है, जिसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।
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निचली गंगा नहर में 23 जून से 809 क्यूसिक और जरौली पंप कैनाल में पांच पंप चलाकर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिसमें खजुहा, देवमई, बहुआ, अमौली, असोथर, विजईपुर और धाता विकास खंड क्षेत्र के रजबहों व माइनरों से सिंचाई के पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे जिले का किसान समय से धान की रोपाई करा सके।
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निचली गंगा नहर के भदौहा, घोसी, हकीमपुर, बेलाई, जाम, नारा, धाता, अढौली, एरई, गजपतपुर और बेनीपुर माइनरों के हेड में पानी नहीं पहुंचा है।
जबकि निचली गंगा नहर से कौशांबी के करारी रजबहा, पइंसा, गंभीरी, उदहिन, बहरामऊ, मंझनपुर, भेलखा, कुतुबपुर, अगियौना, सोनारी, थाम्बा, टेवां और दानपुर आदि रजबहों में टेल तक पानी पहुंचाया जाता है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से जिले के 50 फीसदी रजबहों में पानी नहीं पहुंच रहा है।
किसानों की मानें तो देवमई, अमौली और मलवां विकास खंड क्षेत्र के रजबहों के हेड में स्टील गेट का कोई अतापता नहीं है, जो गेट लगे भी है उनमें पानी रोकने की क्षमता नहीं है। इससे आधे से अधिक नहर का पानी मुख्यालय आने के पहले ही खत्म हो जाता है।
जबकि रहबहों व माइनरों में पानी मापक गेज लगे हैं, जिसमें ज्यादा पानी न छोड़ने के निर्देश है लेकिन गेट न होने से पानी बिना रोक के पहले ही बहता रहता है। टूटे हुए गेटों की आज तक मरम्मत तक नहीं कराई गई है। इससे विजईपुर,
धाता और कौशांबी क्षेत्र के किसानों को फसल सिंचाई के लिए समय से पानी नहीं मिलता है।
निचली गंगा नहर के अधिशासी अभियंता आरके गुप्ता ने बताया कि छह जुलाई तक निचली गंगा नहर में पानी चलेगा, जिसमें मुख्य नहर के टेल और सभी रजबहों के टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अवर अभियंताआें को सभी रजबहों में निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ने को निर्देशित किया है।