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मां काली के दर्शनों को उमड़ती है भक्तों की भीड़
ब्यूरो अमर उजाला फतेहपुर
Updated Thu, 15 Oct 2015 01:14 AM IST
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मोहल्ला हजरतपुर ठठराही स्थित मां काली के दर्शनों के लिए नवरात्र में भक्तों की भीड़ जुटती है। शारदीय नवरात्र महोत्सव के दूसरे दिन मां काली के जयकाराें के बीच भक्तों ने पूजा अर्चना कर नारियल फोड़ मन्नतें मांगी। मां का इतिहास इतना रोचक है कि दिन में तीन बार मां अपना स्वरूप बदलकर भक्तों को दर्शन देती हैं।
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नवरात्र पर्व में इस सिद्धपीठ धाम में कोलकाता तक के भक्त मां के दर्शनों के लिए यहां आते हैं।
नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां काली मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दर्शनों के लिए जुटी रही। मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक मां काली को खुश करने के लिए भक्तगण हवन, पाठ करते रहे।
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वहीं महिलाएं देवी गीत में मगशूल रहीं। एक सदी पूर्व प्राचीन मंदिर में सिद्धपीठ मां काली की स्थापित मूर्ति का इतिहास बहुत ही रोचक है। पत्थर के आधारशिला में लिखी लिपि किस भाषा में लिखी है, इसे कोई व्यक्ति नहीं पढ़ सका है।
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मां काली की मूर्ति दिन में तीन रूप बदलने वाली, सूरज की किरणों की तरह चमचमाती, छवि बदलती, अभय प्रदान करती यह चतुर्भुजी विशाल मूर्ति भक्तों के जीवन में खुशियां बिखेरने वाली हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि एक सदी पहले एक धनाढ्य व्यापारी बैलगाड़ी से पांच फुट की मूर्ति लेकर जा रहा था। वह रात को ठठराही मोहल्ले में रुककर सुबह जब चलने को हुआ तो मूर्ति अपने स्थान से नहीं हिली।
लोगों ने निर्णय लिया कि मां यहीं विराजमान होना चाहती है। मां काली की मूर्ति इसी स्थान पर स्थापित कर दी गई। लोगों के सहयोग से मंदिर बनवाया गया था। प्राण प्रतिष्ठा, अनुष्ठान, भंडारा के आयोजन के बाद से यह स्थान तीर्थस्थल का रूप लेता चला गया।
मंदिर के पुराने पुजारी दयाशंकर के अनुसार नित्य प्रतिदिन आसपास के गांव व अन्य प्रांतों तक से लोग आकर मां के चरणों में अर्जी लगाते हैं। मनोकामनाएं पूर्ण होने पर नारियल, चुनरी व घंटे चढ़ाते हैं। प्रत्येक बुधवार को मां का भव्य श्रृंगार किया जाता है, यहां सैकड़ों महिलाएं कीर्तन आदि करती है और प्रसाद वितरण किया जाता है।
इस प्राचीन मंदिर में प्रतिवर्ष दिसंबर में शतचंडी यज्ञ, संतों के प्रवचन, रासलीला व शारदीय नवरात्र में तीन दिवसीय होने वाले महोत्सव, कंस वध मेले में हजारों भक्तों की भीड़ जुटती है।