{"_id":"5a5e35fd4f1c1b8c268b4c1a","slug":"181516123645-fatehpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेता का क्लासमेट बनाए था सिंडीकेट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नेता का क्लासमेट बनाए था सिंडीकेट
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले के मौरंग खदानों में खनन के दौरान कई स्तर पर सिंडीकेट बैठे थे। सपा शासन काल में दो सिंडीकेटों के तिलिस्म को तोड़कर एक रसूखदार नेता के सहपाठी ने चीफ की कुर्सी पर कब्जा किया था। उसने जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश की खदानों पर सिंडीकेट के रूप में जमकर वसूली की थी।
साल 2012 से 2015 के बीच जिले के कई मौरंग खदानों में अवैध खनन की जांच में जुटी सीबीआई अब सिंडीकेटों की पड़ताल में जुटी है। सिंडीकेट के कब्जे में रही मौरंग खदानों के पीछे एक बड़ा प्रभावशाली नाम आया है। कहा जाता है कि जिले में एक बार ही वह सारी खदानों का जायजा लेने आए थे। पहली बार ललौली थाने के खनन को लेकर वह विवादित अढ़ावल खदान में जा रहे थे, तभी रास्ते में बैरियर प्वाइंट पर अपने ट्रकों से वसूली देखकर भड़क गए थे।
मामूली विवाद होने पर करीब तीन घंटे तक ललौली थाना हिल गया था। थाने में जिले के सारे कद्दावर इकट्ठा थे। पंचम तल से फोन आने पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के भी हाथ-पांव फूल गए थे। जिले में वैध अवैध सभी तरह के खनन चालू थे। सारी लाइजनिंग की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। जिले की सारी खदानों से करीब सात से आठ सौ ट्रक मौरंग खनन होता था। हर ट्रक से छह हजार रुपये सिंडीकेट वसूल करता था। सीबीआई के रडार पर उनके नाम भी आने की चर्चा तेज हो गई है।
विज्ञापन
पहली बार तूफान की तरह आया था सिंडीकेट
सपा शासनकाल में जिले में पहली बार सिंडीकेट के रूप में वाराणसी के एक कारोबारी की कंपनी आई थी। करीब 100 सफेद लग्जरी वाहनों के साथ इस सिंडीकेट की आमद हुई थी। ललौली क्षेत्र में सिंडीकेट की आते ही सारे वाहन सड़कों के किनारे हो गए थे। धूल के गुबार में लग्जरी वाहनों के कतारों के आगे कुछ नहीं दिखा था। बताते हैं कि पूरे प्रदेश से करीब 22 अरब रुपये में सिंडीकेट के उच्च स्तर की सौदेबाजी हुई थी। बाद में वह कंपनी पैर जमाने में असफल हो गई। जिसके बाद लखनऊ के एक कद्दावर से जुड़ी एक कंपनी ने रेट बढ़ाकर खदानों पर कब्जे कर लिया। लोकल सिंडीकेट तैयार कर उसने सिस्टम बनाए लेकिन चलाने में नाकाम रही। इसी के बाद कद्दावर नेता के भतीजे के सहपाठी ने इंट्री मारी। उसकी इंट्री के बाद पूरे यमुना तटवर्ती इलाके में अवैध मौरंग कारोबार पनपा। जिले के कई बड़े नामचीन हस्तियों ने पुराने सिंडीकेट का दामन पकड़ा। उसके इशारे जहां चाहा वहां खनन चालू कराया।
विज्ञापन
फतेहपुर। जिले के मौरंग खदानों में खनन के दौरान कई स्तर पर सिंडीकेट बैठे थे। सपा शासन काल में दो सिंडीकेटों के तिलिस्म को तोड़कर एक रसूखदार नेता के सहपाठी ने चीफ की कुर्सी पर कब्जा किया था। उसने जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश की खदानों पर सिंडीकेट के रूप में जमकर वसूली की थी।
साल 2012 से 2015 के बीच जिले के कई मौरंग खदानों में अवैध खनन की जांच में जुटी सीबीआई अब सिंडीकेटों की पड़ताल में जुटी है। सिंडीकेट के कब्जे में रही मौरंग खदानों के पीछे एक बड़ा प्रभावशाली नाम आया है। कहा जाता है कि जिले में एक बार ही वह सारी खदानों का जायजा लेने आए थे। पहली बार ललौली थाने के खनन को लेकर वह विवादित अढ़ावल खदान में जा रहे थे, तभी रास्ते में बैरियर प्वाइंट पर अपने ट्रकों से वसूली देखकर भड़क गए थे।
विज्ञापन
मामूली विवाद होने पर करीब तीन घंटे तक ललौली थाना हिल गया था। थाने में जिले के सारे कद्दावर इकट्ठा थे। पंचम तल से फोन आने पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के भी हाथ-पांव फूल गए थे। जिले में वैध अवैध सभी तरह के खनन चालू थे। सारी लाइजनिंग की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। जिले की सारी खदानों से करीब सात से आठ सौ ट्रक मौरंग खनन होता था। हर ट्रक से छह हजार रुपये सिंडीकेट वसूल करता था। सीबीआई के रडार पर उनके नाम भी आने की चर्चा तेज हो गई है।
विज्ञापन
पहली बार तूफान की तरह आया था सिंडीकेट
सपा शासनकाल में जिले में पहली बार सिंडीकेट के रूप में वाराणसी के एक कारोबारी की कंपनी आई थी। करीब 100 सफेद लग्जरी वाहनों के साथ इस सिंडीकेट की आमद हुई थी। ललौली क्षेत्र में सिंडीकेट की आते ही सारे वाहन सड़कों के किनारे हो गए थे। धूल के गुबार में लग्जरी वाहनों के कतारों के आगे कुछ नहीं दिखा था। बताते हैं कि पूरे प्रदेश से करीब 22 अरब रुपये में सिंडीकेट के उच्च स्तर की सौदेबाजी हुई थी। बाद में वह कंपनी पैर जमाने में असफल हो गई। जिसके बाद लखनऊ के एक कद्दावर से जुड़ी एक कंपनी ने रेट बढ़ाकर खदानों पर कब्जे कर लिया। लोकल सिंडीकेट तैयार कर उसने सिस्टम बनाए लेकिन चलाने में नाकाम रही। इसी के बाद कद्दावर नेता के भतीजे के सहपाठी ने इंट्री मारी। उसकी इंट्री के बाद पूरे यमुना तटवर्ती इलाके में अवैध मौरंग कारोबार पनपा। जिले के कई बड़े नामचीन हस्तियों ने पुराने सिंडीकेट का दामन पकड़ा। उसके इशारे जहां चाहा वहां खनन चालू कराया।