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यूसुफ क्लब 68 साल बाद सरकार के नाम
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फतेहपुर। आईटीआई रोड स्थित यूसुफ क्लब की बेशकीमती संपत्ति का मालिकाना हक अब सरकार के नाम हो गया है। अभी तक क्लब के माध्यम से कई लोग इस संपत्ति पर अपने मालिकाना हक की दावेदारी कर रहे थे। जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने बताया कि सर्किल दरों के मुताबिक जमीन की कीमत 16 करोड़ 60 लाख रुपये है।
जमींदारी प्रथा खत्म करने के दौरान 1952 से 1954 के बीच 1359 फसली वर्ष में शहर की आईटीआई के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर दो बीघा एक बिस्वा जमीन की खतौनी में यूसुफ क्लब का नाम अंकित किया गया। यह नाम किस आदेश से चढ़ाया गया, खतौनी में इसका कोई जिक्र नहीं है। कई लोग अपनी मिलकियत बताकर इस संपत्ति को अपने अधिकार में होना जता रहे थे। डीएम ने एसडीएम सदर नंदप्रकाश मौर्य से प्रकरण की जांच कराई। दो पखवाड़े तक एसडीएम ने मौजूदा खतौनी से लेकर 68 साल पुराने अभिलेेख खंगाले। जांच में पाया कि 1359 फसली वर्ष में यह जमीन श्रेणी 6.2 में दर्ज थी। इस श्रेणी की जमीन आमजन के लिए प्रयोग हो सकती है। किसी भी एक व्यक्ति या एक संस्था के नाम नहीं हो सकती। 1359 फसली में जमीन का कोई काश्तकार भी नहीं मिला। जांच में स्पष्ट हुआ कि यूसुफ क्लब का नाम फर्जी तरीके से खतौनी में अंकित किया गया था।
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जमींदारी प्रथा खत्म करने के दौरान 1952 से 1954 के बीच 1359 फसली वर्ष में शहर की आईटीआई के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर दो बीघा एक बिस्वा जमीन की खतौनी में यूसुफ क्लब का नाम अंकित किया गया। यह नाम किस आदेश से चढ़ाया गया, खतौनी में इसका कोई जिक्र नहीं है। कई लोग अपनी मिलकियत बताकर इस संपत्ति को अपने अधिकार में होना जता रहे थे। डीएम ने एसडीएम सदर नंदप्रकाश मौर्य से प्रकरण की जांच कराई। दो पखवाड़े तक एसडीएम ने मौजूदा खतौनी से लेकर 68 साल पुराने अभिलेेख खंगाले। जांच में पाया कि 1359 फसली वर्ष में यह जमीन श्रेणी 6.2 में दर्ज थी। इस श्रेणी की जमीन आमजन के लिए प्रयोग हो सकती है। किसी भी एक व्यक्ति या एक संस्था के नाम नहीं हो सकती। 1359 फसली में जमीन का कोई काश्तकार भी नहीं मिला। जांच में स्पष्ट हुआ कि यूसुफ क्लब का नाम फर्जी तरीके से खतौनी में अंकित किया गया था।
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