{"_id":"61fad4be9fd8da3bae678952","slug":"congress-fatehpur-news-knp678534510","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल लगा तो कांग्रेस के नाम कर दी जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल लगा तो कांग्रेस के नाम कर दी जिंदगी
विज्ञापन
रामचरन की चाय की गुम्टी, जिसमें कट रहा जीवन (संवाद)
- फोटो : FATEHPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहपुर। संगठन में पद और चुनाव में टिकट न मिलने पर पार्टी छोड़ देने वाले नेताओं को रामचरन से समर्पण की सीख लेनी चाहिए। जवानी में कांग्रेस से इस कदर दिल लगा कि पूरी जिंदगी ही पार्टी के नाम कर दी। पद और प्रतिष्ठा की परवाह किए बिना अभी भी पंजे की परछाई में राजनीतिक कर रहे हैं। 77 वसंत देख चुके रामचरण को अब हाईटेक कांग्रेसी तवज्जो नहीं देते हैं।
विजयीपुर ब्लाक के सिलमी गांव निवासी रामचरन ने 1965 में कांग्रेस का झंडा थामा था। कांग्रेस के प्रति उनकी दीवानगी इस कदर थी कि चौबीस घंटे पार्टी का झंडा साथ रखते और हर आयोजनों में शामिल होते। इससे उन्हें लोग रामचरन पंजेवाला और झंडेवाला’ कहने लगे थे।
1978 में लोकसभा के उपचुनाव में प्रत्याशी प्रेमदत्त तिवारी के प्रचार में इंदिरा गांधी आई थीं। उन्होंने रामचरन से मुलाकात की। इसके बाद रामचरन गांधी परिवार के भक्त हो गए और पूरे देश में कांग्रेस का प्रचार करने लगे। (संवाद)
विज्ञापन
रामचरन ने बताया कि वह कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में प्रचार के लिए गए। भोजन समेत पूरा खर्च पार्टी नेता उठाते थे। 1984 में दिल्ली में राजीव गांधी से मुलाकात हुई। तभी शादी न कर कांग्रेस के लिए जीवन समर्पित करने का फैसला कर लिया। रायबरेली, सुल्तानपुर और अमेठी में गांधी परिवार के लिए प्रचार किया। इंदिरा और राजीव की अंत्येष्टि में भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि पहले इंदिरा, राजीव, एनडी तिवारी और वीर बहादुर सिंह जैसे नेता उनके खाने पीने का इंतजाम करते थे। अब कोई नहीं पूछता है। पेट पालने के लिए उन्होंने खागा में चाय की दुकान खोल ली है। उपेक्षा का मलाल तो है लेकिन कांग्रेस के लिए प्रचार बंद नहीं किया है।
रामचरन को प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और अखबारों में कवरेज मिलता था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बंगले के सामने उनकी तस्वीर, 1999 में वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा की खिल्ली उड़ाने के लिए आयोजित प्रदर्शन की तस्वीर, अमेठी में राजीव और राहुल के प्रचार की तस्वीरोें की कटिंग उनके पास धरोहर हैं।
मेरा जीवन और प्यास कांग्रेस के लिए ही है। कोई दुश्मन भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेगा तो उसका आखिरी सांस तक प्रचार करूंगा। मेरे खून के हर कतरे से बस कांग्रेस ही निकलेगा। आज के नेता मेरी मदद नहीं कर रहे हैं तो इसका मुझे मलाल नहीं है।
विज्ञापन
विजयीपुर ब्लाक के सिलमी गांव निवासी रामचरन ने 1965 में कांग्रेस का झंडा थामा था। कांग्रेस के प्रति उनकी दीवानगी इस कदर थी कि चौबीस घंटे पार्टी का झंडा साथ रखते और हर आयोजनों में शामिल होते। इससे उन्हें लोग रामचरन पंजेवाला और झंडेवाला’ कहने लगे थे।
विज्ञापन
1978 में लोकसभा के उपचुनाव में प्रत्याशी प्रेमदत्त तिवारी के प्रचार में इंदिरा गांधी आई थीं। उन्होंने रामचरन से मुलाकात की। इसके बाद रामचरन गांधी परिवार के भक्त हो गए और पूरे देश में कांग्रेस का प्रचार करने लगे। (संवाद)
विज्ञापन
रामचरन ने बताया कि वह कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में प्रचार के लिए गए। भोजन समेत पूरा खर्च पार्टी नेता उठाते थे। 1984 में दिल्ली में राजीव गांधी से मुलाकात हुई। तभी शादी न कर कांग्रेस के लिए जीवन समर्पित करने का फैसला कर लिया। रायबरेली, सुल्तानपुर और अमेठी में गांधी परिवार के लिए प्रचार किया। इंदिरा और राजीव की अंत्येष्टि में भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि पहले इंदिरा, राजीव, एनडी तिवारी और वीर बहादुर सिंह जैसे नेता उनके खाने पीने का इंतजाम करते थे। अब कोई नहीं पूछता है। पेट पालने के लिए उन्होंने खागा में चाय की दुकान खोल ली है। उपेक्षा का मलाल तो है लेकिन कांग्रेस के लिए प्रचार बंद नहीं किया है।
रामचरन को प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और अखबारों में कवरेज मिलता था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बंगले के सामने उनकी तस्वीर, 1999 में वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा की खिल्ली उड़ाने के लिए आयोजित प्रदर्शन की तस्वीर, अमेठी में राजीव और राहुल के प्रचार की तस्वीरोें की कटिंग उनके पास धरोहर हैं।
मेरा जीवन और प्यास कांग्रेस के लिए ही है। कोई दुश्मन भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेगा तो उसका आखिरी सांस तक प्रचार करूंगा। मेरे खून के हर कतरे से बस कांग्रेस ही निकलेगा। आज के नेता मेरी मदद नहीं कर रहे हैं तो इसका मुझे मलाल नहीं है।